तड़प से की गई अरदास कबूल हुई -सत्संगियों के अनुभव

पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपार रहमत

बहन रजनी इन्सां पत्नी मुकेश कुमार पुत्र मदन गोपाल गांव सरायसुखी तहसील शाहबाद जिला कुरूक्षेत्र(हरियाणा) से अपने तथा अपने पति पर पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की हुई रहमत का वर्णन करती है:-
सच्चा सौदा के हुक्मानुसार पचासी मैंबरों की देखरेख में मार्च 2023 में हमारे ब्लॉक धुराला का पुनर्गठन किया गया। इस चुनाव में मुझे साध-संगत ने गांव की पंद्रह मैंबर कमेटी मेंं चुना। मुझे सेवा का मौका मिला। मैंने खुशी से प्रसाद ग्रहण किया।

पिछले कुछ समय से मेरे पेट में बहुत अधिक दर्द होता था जोकि असहनीय दर्द था। मैंने दवाई ली, परंतु दर्द से आराम नहीं हुआ। इस बात से मैं अत्यधिक परेशान थी। लेकिन जिस दिन मैंने सेवादार बनने का प्रसाद लिया तो अगले ही दिन पिता जी की रहमत हुई। बाथरूम करते समय बहुत बड़ी पत्थरी निकली। मैंने वह पत्थरी अपने परिवारजनों तथा साध-संगत के भाई-बहनों को दिखाई। पूज्य पिताजी की रहमत से मुझे दर्द से आराम मिला और मैं आॅप्रेशन करवाने से बच गई। मैंने अपने सतगुरु पिता जी का लाख-लाख बार शुक्राना किया।

मेरा पति मुकेश कुमार बहुत ज्यादा शराब पीता था। मैं उसकी नशे की आदत से बहुत परेशान थी। वह कई-कई दिनों तक दिन-रात शराब पीता और घर पर ही पड़ा रहता। मैं सुबह-शाम पूज्य हजूर पिता जी से विनती करती कि पिता जी! मेरे घर से नशे की बुराई को खत्म कर दो जी। मैं डेरा सच्चा सौदा के स्थापना दिवस व ‘जाम-ए-इन्सां गुरु का’ की वर्षगांठ (29 अप्रैल 2023) के सत्संग भंडारे पर सरसा दरबार आई। भंडारे के सत्संग के दौरान मैंने पूज्य हजूर पिता जी के स्वरूप के सामने रो-रोकर विनती की कि पिता जी! आप की बेटी का घर उजड़ रहा है।

आप दया-मेहर, रहमत करो। मेरे पति को सद्बुद्धि दो। उनका सुधार करो, जैसे भी करो। आप क्या नहीं कर सकते? आपजी ने बड़े-बड़े राक्षसों को सुधारा है, मेरे पति का भी सुधार कर दो। मैंने उसी दिन रात को सत्संग भंडारे का प्रसाद सुमिरन करके अपने पति को खिला दिया। उस समय भी उसने शराब पी रखी थी। उस रात अढ़ाई बजे का समय था। मेरे पति को शराब का नशा उतर गया था। उसको तोड़ लगी हुई थी अर्थात शरीर का अंग-अंग दर्द कर रहा था। उसे नींद नहीं आ रही थी। उसने टेलीविजन चला रखा था। उस समय पूज्य हजूर पिता जी एक अजनबी बुजुर्ग के भेष में मेरे पति के सामने आ खड़े हुए। उनके सफेद वस्त्र पहने थे और हाथ में कोका-कोला रंग की लम्बी लाठी थी।

उन्होंने मेरे पति को डांटते हुए कहा- तुझे शर्म नहीं आती। तुमने अपनी क्या हालत बना रखी है। तू नहाता क्यूं नहीं, इतना गंदा बना हुआ है! मेरे पति ने उन बुजुर्ग बाबा जी से पूछा- आप कौन हैं? उन्होंने कहा, तू कितने सालों से हमारे पास आ रहा है, फिर भी गलतियां करता है? तू गल्तियों से बाज नहीं आता, इसलिए हमें आना पड़ा। इसके साथ ही उन्होंने छह-सात लाठियां मेरे पति की कमर पर जड़ दी। इन लाठियों की चोट का मेरे पति को अत्यधिक दर्द हुआ और निशान पड़ गए। फिर उस अजनबी बुजुर्ग ने पूछा- तुम इतना नशा क्यों करते हो? मेरे पति ने कहा कि मैं नशा छोड़ना चाहता हूं, परंतु छूटता नहीं। उन्होंने कहा, तुम सरसा आओ। सरसा हस्पताल में अपना इलाज करवाओ, मालिक कृपा करेंगे।

मेरे पति ने उपरोक्त सारी बातें मुझे सुबह बताई और कमर पर लाठी के निशान भी दिखाए जोकि तीन-चार दिन तक उनके शरीर पर रहे। उनके शरीर पर पड़े निशान हमारे सभी रिश्तेदारों तथा सत्संगी प्रेमियों ने भी देखे। मेरे पति ने बताया कि स्वरूप चाहे अजनबी बुजुर्ग का था, परंतु आवाज पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की ही थी।

पूज्य पिता जी के हुक्मानुसार व उनकी रहमत से हम सारा परिवार मेरे पति को सरसा दरबार लेकर आए और शाह सतनाम जी स्पेशलिटी हस्पताल में दस दिन तक उनका इलाज करवाया। पूरा समय पूरे परिवार सहित हमने सेवा, सुमिरन व अरदास की कि हे पिता जी! मेरे पति को अपने चरणों में लगाए रखो, ताकि वह कभी भी नशे जैसी बुराई की तरफ न जाएं और आपजी की दया-मेहर को पाते रहें जी। उन्होंने भी आगे से नशा न करने की कसम खाई और तौबा की। मैं अपने सतगुरु जी का बहुत-बहुत शुक्राना करती हूं, जिन्होंने मेरा उजड़ता घर बसा दिया।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here
Captcha verification failed!
CAPTCHA user score failed. Please contact us!