Do not make children fond of showing off -sachi shiksha hindi

बच्चों को न बनाएं दिखावे का शौकीन

पिछले कुछ वर्षों से मीडिया, फिल्म, टीवी एक्टर एक्टेÑसेस, खिलाड़ी इनका प्रभाव जवान बच्चों पर कुछ ज्यादा ही दिखाई देने लगा है। पहनावे, बात करने, बालों के विभिन्न स्टाइल, बॉडी लैंग्वेज, शारीरिक बनावट की नकल काफी होने लगी है। बच्चों के साथ-साथ कई पेरेंटस भी इस प्रभाव से अछूते नहीं हैं।

परिणाम कुछ भी हो, वे उसकी परवाह किए बिना कॉपी करना चाहते हैं। इस प्रकार कई बच्चे, किशोर, जवान ईटिंग डिस्आर्डर के शिकार बन जाते हैं। ऐसे में पेरेंट्स की ड्यूटी बनती है कि वे बच्चों के रोल मॉडल बनें और सिलेब्रिटीज की असलियत उन्हें बताएं।

दिखावे से बचाएं:

Stop Child Using Phone (5)मेल सिलेब्रिटीज अपने सिक्स पैक, एट पैक्स से बच्चों को प्रभावित करते हैं, वहीं फीमेल सिलेब्रिटीज अपने तरीके से प्रभावित करती हैं। बच्चे भी उनसे प्रभावित होकर उनके जैसा बनने की सोचते हैं। नतीजतन बच्चों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। लड़कियां खाना-पीना छोड़ कर पतला होना चाहती हैं

या दवाईयों का सहारा लेकर, लड़के हाई प्रोटीन डाइट लेकर तरह तरह की एक्सरसाइज करने लगते हैं। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए कि वो बच्चों को समझाएं कि मॉडल्स की फिगर और दांतों की सफेदी में फोटोग्राफिक तकनीक का भी हाथ होता है। हर इन्सान की बॉडी-शेप अलग होती है जो कुदरत की देन है। थोड़ा बहुत बदलाव हम ध्यान देकर कर सकते हैं।

व्यायाम नियमित करवाएं:

बच्चों को प्रारंभ से हल्के-फुल्के व्यायाम करने की प्रेरणा दें। हो सके तो प्रात: या शाम की सैर के समय उन्हें साथ ले जाएं। अगर बच्चा किसी खेल में विशेष रूचि लेता है और उसे खेलने का शौक भी है तो उसके खेल को आगे तक ले जाने में मदद करें। खेलों से भी बच्चों में आत्म-विश्वास विकसित होता है, इसलिए जरूरी है बच्चों की शारीरिक एक्टीविटीज का ध्यान रखें।

बच्चों के आत्मविश्वास को बढ़ावा दें:

बच्चों की नकारात्मक सोच दूर करने में मदद करें। इसके लिए पहले स्वयं को सकारात्मक बनायें। बच्चों के सामने स्वयं कोई डेÑस पहनने पर सबके विचार न जानें, मसलन मैं बुरी तो नहीं लग रही, मोटी तो नहीं लग रही, क्या यह कलर मुझे सूट कर रहा है या नहीं। बच्चे अगर आपको डेÑस और ब्यूटी के प्रति इतना जागरूक देखेंगे तो वे भी हर डेÑस पहनने के बाद नखरे करेंगे।

पौष्टिक आहार दें:

अपने बच्चों को पौष्टिक आहार लेने के लिए उत्साहित करें। कौन-सा आहार या भोजन स्वास्थ्य को लाभ पहुंचाने वाला है और कौन-सा हानिकारक है, इस बारे में उन्हें समझाएं। बच्चों को समझाएं कि वेट कम करने के स्थान पर वे हेल्दी डाइट लें और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें। बच्चों को अधिक खाने के लिए प्रेरित न करें। इससे उनका वजन बढ़ेगा।

सहयोग करें:

कभी-कभी बच्चे मोटे, गिट्ठे, बहुत पतले होते हैं। उनकी लुक्स के लिए टिप्पणी न करें क्योंकि आत्मविश्वास अधिक जरूरी है परफेक्ट फिगर से। बच्चों को जिम जाने की सही उम्र समझाएं। बाहर के लोग यदि बच्चों की लुक्स पर टिप्पणी दें तो उसे पॉजिटिव लें। उन्हें बच्चों को यह सब कहने के लिए मना करें और स्वयं किसी डाइटीशियन और एक्सरसाइज टेऊनर की देखरेख में डाइट प्लान करवायें और व्यायाम के लिए उत्साहित करें।

स्वयं रोल मॉडल बनें:

अगर हम कोशिश करके खुद को सुधार कर उनका रोल मॉडल बनें तो अधिक प्रभाव पड़ेगा। सीमित पौष्टिक आहार लेकर, नियमित व्यायाम कर, प्रात: समय पर उठकर, रात्रि में समय पर सोकर, टीवी बहुत न देखकर, न्यूज देखकर, कंप्यूटर पर कम से कम समय बिता कर फालतू की सर्च न करके उन्हें सही राह दिखायें। जब बच्चा घर में ऐसा वातावरण देखेगा तो शायद वो भी आपको कापी करने का प्रयास करेगा और आपकी कही बात को मानने का प्रयास करेगा।

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