Eat dates with pleasure -sachi shiksha hindi

शौक से खाइये खजूर-छुहारे

ठंड के मौसम ने दस्तक दे दी है और खाने-पीने की चीजों के इस मौसम में बहार रहती है। गुड़ की गजक, रेवड़ी, मूंगफली और पिंड फलों में खजूर इस मौसम में शौक से खाए जाते हैं।

दूसरों की सेवा करना है, परोपकारी बनना है तो खजूर के फल की तरह जरूर बनिए, क्योंकि खजूर की तरह शायद ही कोई फल हो जो परोपकारी, बहुउपयोगी हो। यह गरीब का गुड़ और अमीर का मेवा है। नारियल और खजूर ही ऐसे पेड़ हैं, जिन्हें वैज्ञानिकों द्वारा ‘आॅल परपज ट्री’ कहा जाता है।

खजूर का एक पेड़ 50 किलो फल हर मौसम में देता है। इसकी औसत उम्र 50 वर्ष आँकी गई है। खजूर की खेती मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के सूखे क्षेत्रों में की जाती है। इराक, ईरान और सऊदी अरब में इसका उत्पादन सर्वाधिक होता है। ठंड के दिनों में खाया जाने वाला यह फल बहुत पौष्टिक होता है। इसमें 75 से 80 प्रतिशत ग्लूकोज होता है।

खजूर को ‘सर्दियों का मेवा’ कहा जाता है और इसे इस मौसम में खाने से खास फायदे होते हैं। खजूर या पिंडखजूर कई प्रकार के पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसमें आयरन और फ्लोरिन भरपूर मात्रा में होते हैं। इसके अलावा यह कई प्रकार के विटामिंस और मिनरल्स का बहुत ही खास स्त्रोत होता है।

इसका इस्तेमाल नियमित तौर पर करने से आप खुद को कई प्रकार के रोगों से दूर रख सकते हैं। यह कॉलेस्ट्राल को कम रखने में भी मददगार है। फेट का स्तर भी इसके अंदर काफी कम होता है। खजूर में प्रोटीन के साथ साथ डाइटरी फाइबर और विटामिन बी1, बी2, बी3, बी5, ए1 और सी भरपूर मात्रा में होते हैं।
छुहारा और खजूर एक ही पेड़ की देन है। इन दोनों की तासीर गर्म होती है। ये दोनों शरीर को स्वस्थ रखने व शरीर को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गर्म तासीर होने के कारण सर्दियों में तो इसकी उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। खजूर में छुहारे से ज्यादा पौष्टिकता होती है। खजूर मिलता भी सर्दी में ही है। छुहारे को ‘खारक’ भी कहते हैं। यह पिण्ड-खजूर का सूखा हुआ रूप होता है, जैसे अंगूर का सूखा हुआ रूप किशमिश और मुनक्का होता है। छुहारे का प्रयोग मेवा के रूप में किया जाता है। इसके मुख्य दो भेद हैं- 1. खजूर और 2. पिण्ड-खजूर।

गुण:

यह शीतल, रस व पाक में मधुर, स्निग्ध, रुचिकारक, हृदय को प्रिय, भारी तृप्तिदायक, ग्राही, बलदायक और क्षत, क्षय, रक्तपित्त, कोठे की वायु, उलटी, कफ, बुखार, अतिसार, भूख, प्यास, खाँसी, श्वास, दम, मूर्च्छा, वात और पित्त तथा मद्य-सेवन से हुए रोगों को नष्ट करने वाला होता है।

रासायनिक संगठन (पौष्टिकता में भरपूर)

इसके फल में प्रोटीन 1.2, वसा 0.4, काबोर्हाइड्रेट 33.8, सूत्र 3.7, खनिज द्रव्य 1.7, कैल्शियम 0.022 तथा फास्फोरस 0.38 प्रतिशत होता है। इस वृक्ष के रस से बनाई गई नीरा में विटामिन बी और सी पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है। पके पिण्ड-खजूर में अपेक्षाकृत अधिक पोषक तत्व होते हैं। इसमें शर्करा 85 प्रतिशत तक पाई जाती है।

उपयोग:

खजूर के रस से बनाई ‘नीरा’ को तुरन्त पी लेने से पौष्टिकता के गुण प्राप्त होते हैं और यह बलवर्द्धक भी है। इसके रस से गुड़ भी बनाया जाता है। इसका उपयोग वात और पित्त का शमन करने के लिए किया जाता है। यह पौष्टिक और मूत्रल है, हृदय और स्नायविक संस्थान को बल देने वाला तथा शुक्र दौर्बल्य दूर करने वाला होने से इन व्याधियों को नष्ट करने के लिए उपयोगी है।

दुर्बलता:

4 छुहारे एक गिलास दूध में उबालकर ठण्डा कर लें। प्रात:काल या रात को सोते समय, गुठली अलग कर दें और छुहारें को खूब चबा-चबाकर खाएँ और दूध पी जाएँ। लगातार 3-4 माह सेवन करने से शरीर का दुबलापन दूर होता है, चेहरा भर जाता है, सुन्दरता बढ़ती है, बाल लम्बे व घने होते हैं और बलवीर्य की वृद्धि होती है। यह प्रयोग नवयुवा, प्रौढ़ और वृद्ध आयु के स्त्री-पुरुष, सबके लिए उपयोगी और लाभकारी है।

शारीरिक कमजोरी को दूर करता है :

प्रात: खाली पेट दो छुहारे टोपी सहित खूब चबा-चबाकर दो सप्ताह तक खाएँ। तीसरे सप्ताह से 3 छुहारे लेने लगें और चौथे सप्ताह से चार। ध्यान रखें कि चार छुहारे से ज्यादा न लें। इस प्रयोग के साथ ही रात को सोते समय दो सप्ताह तक दो छुहारे, तीसरे सप्ताह में तीन छुहारे और चौथे सप्ताह से बारहवें सप्ताह तक यानी तीन माह पूरे होने तक चार छुहारे एक गिलास दूध में उबालकर, गुठली हटाकर, खूब चबा-चबाकर खाएँ और ऊपर से दूध पी लें। यह प्रयोग स्त्री, पुरुषों को अपूर्व शक्ति देने वाला, शरीर को पुष्ट और सुडौल बनाने वाला शारीरिक कमजोरी को दूर करने वाला है।

दमा :

दमा के रोगी को प्रतिदिन सुबह-शाम 2-2 छुहारे खूब चबाकर खाना चाहिए। इससे फेफड़ों को शक्ति मिलती है और कफ व सर्दी का प्रकोप कम होता है।

  • अगर पाचन शक्ति अच्छी हो तो खजूर खाना ज्यादा फायदेमंद है।
  • छुहारे का सेवन तो सालभर किया जा सकता है, क्योंकि यह सूखा फल बाजार में हर मौसम में मिलता है।
  • छुहारा यानी सूखा हुआ खजूर आमाशय को बल प्रदान करता है।
  • छुहारे की तासीर गर्म होने से ठंड के दिनों में इसका सेवन नाड़ी के दर्द में भी आराम देता है।
  • छुहारा खुश्क फलों ड्राई फ्रूट की श्रेणी में गिना जाता है। इसके प्रयोग से शरीर हृष्ट-पुष्ट बनता है। शरीर को शक्ति देने के लिए मेवों के साथ छुहारे का प्रयोग खासतौर पर किया जाता है।
  • छुहारे व खजूर दिल को शक्ति प्रदान करते हैं। यह शरीर में रक्त वृद्धि करते हैं।
  • साइटिका रोग से पीड़ित लोगों को इससे विशेष लाभ होता है।
  • दो-दो छुहारे सुबह-शाम या खजूर के सेवन से दमे के रोगियों के फेफड़ों से बलगम आसानी से निकल जाता है। कफ व सर्दी से मुक्ति मिलती है।
  • लकवा और सीने के दर्द की शिकायत को दूर करने में भी खजूर सहायता करता है।
  • भूख बढ़ाने के लिए छुहारे का गूदा निकाल कर दूध में पकाएं। उसे थोड़ी देर पकने के बाद ठंडा करके पीस लें। यह दूध बहुत पौष्टिक होता है। इससे भूख बढ़ती है और खाना भी पच जाता है।
  • प्रदर रोग स्त्रियों की बड़ी बीमारी है। छुआरे की गुठलियों को कूट कर घी में तल कर गोपी चन्दन के साथ खाने से प्रदर रोग दूर हो जाता है।
  • छुहारे को पानी में भिगो दें। गल जाने पर इन्हें हाथ से मसल दें। इस पानी का कुछ दिन प्रयोग करें, शारीरिक जलन दूर होगी।
  • अगर आप पतले हैं और थोड़ा मोटा होना चाहते हैं तो छुहारा आपके लिए वरदान साबित हो सकता है, लेकिन अगर मोटे हैं तो इसका सेवन सावधानीपूर्वक करें।
  • जुकाम से परेशान रहते हैं तो एक गिलास दूध में पांच दाने खजूर, पांच दाने काली मिर्च, एक दाना इलायची डालकर अच्छी तरह उबाल कर उसमें एक चम्मच घी डाल कर रात में पी लें। सर्दी-जुकाम बिल्कुल ठीक हो जाएगा।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here
Captcha verification failed!
CAPTCHA user score failed. Please contact us!