Get relief from joint pain in winter -sachi shiksha hindi

ठंड में जोड़ों के दर्द से पाएं राहत

ठंड का मौसम आते ही लोगों को जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द की परेशानियां होने लगती हैं। मौसम में बदलाव, तापमान में गिरावट के साथ ही बहुत लोग इससे परेशान नजर आते हैं। ठंड के समय लोगों को अपने जोड़ों व हड्डियों पर विशेष ध्यान देना पड़ता है।

यह मौसम बच्चे, कमजोर एवं उम्रदराज लोगों के शरीर में विद्यमान विटामिन डी को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है जो हड्डियों के लिए बहुत जरूरी है। कैल्शियम और विटामिन डी हमें भोजन, पूरक आहार या सूरज से मिलते हैं जिससे बचपन से जवानी तक हड्डियां बनती हैं और अधेड़ उम्र से लेकर उसके बाद तक हमें स्वस्थ बनाए रखने में सहायता मिलती है।

कमी विटामिन डी की –

हड्डियों की मजबूती के लिए विटामिन डी जरूरी है जो हमें सूर्य की धूप से मिल जाता है। सूर्य धूप में अल्ट्रावायलेट (पराबैंगनी) किरणें होती हैं। इसी को हमारी बाहरी त्वचा अवशोषित कर उसमें से विटामिन डी प्राप्त कर लेती है। यह विटामिन डी हमारे खानपान से प्राप्त कैल्शियम के साथ मिलकर हड्डियों को मजबूती प्रदान करता है।

उम्र बढ़ने के साथ हमारी हड्डियां भुरभुरी व खोखली हो जाती हैं। प्राय: 40 वर्ष के उपरान्त यह स्थिति सभी स्त्राी पुरूषों में आने लगती है। ठंड के समय यही कारण हमें दर्द के रूप में परेशान करता है जिसमें जोड़ों में दर्द एवं मांसपेशियों में जकड़न की परेशानी ठंड के बढ़ने पर या रात्रिकाल में होने लगती है।

बढ़ती आयु, बढ़ता जोखिम –

उम्र के बढ़ने के साथ-साथ यह समस्या गहराने लगती है। 40 वर्ष की उम्र के बाद यदि किसी को बी.पी., हृदय रोग, शुगर है या स्त्रियों को रजोनिवृत्ति मिल चुकी है, तब उनकी यह परेशानी उम्र के साथ बढ़ सकती है। इनकी हड्डियां कमजोर होकर भुरीभुरी, भंगुर व स्पंजी हो जाती हैं जिससे थोड़ा भी गिरने या चोट लगने पर हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

बचाव के उपाय –

उम्र के बढ़ने के साथ हड्डियों में कमजोरी आ जाती है, इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि कुछ ऐसा किया जाए जिससे हड्डियां भी मजबूत हो जाएं और मांसपेशियां भी शिथिल न हों। इसके लिए प्रथम आवश्यकता पौष्टिक खान-पान है। हमारे दैनिक आहार में खनिज तत्व कैल्शियम की पर्याप्त मात्रा होनी चाहिए। दूध इसका सबसे बेहतर स्रोत है। द्वितीय जरूरत विटामिन डी है जिसकी प्राप्ति के लिए धूप का सेवन जरूरी है। ग्रीष्म काल में सूरज का तेजोताप ज्यादा होता है। यही विटामिन डी हमें ठंड के समय धूप से दिन-भर मिलता है।

ग्रीष्म की तेज धूप नुक्सानदायक है इसीलिए उसकी कोमल धूप का लाभ लेने को कहा जाता है, जबकि ठंड के समय ऐसी स्थिति नहीं रहती। इस मौसम में पूरे दिन-भर सूरज की धूप कोमल रहती है। ये तो हुई विटामिन डी प्राप्त करने की बात। ठंड के समय मांसपेशियों में दर्द से बचाव के लिए उनका दुरुस्त रहना जरूरी रह जाता है जो हमारी शारीरिक सक्रि यता एवं व्यायाम से ही संभव हो पाता है। इस आयु में भारी व्यायाम की जगह हल्का-फुल्का व्यायाम करें। जो भी संभव हो, वह काम करें।

भले ही यह उम्र आराम मांगती है किन्तु आराम की अधिकता से ठंड में जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में जकड़न व खिंचाव की शिकायतें बढ़ सकती हैं। इस उम्र में व्यायाम से तात्पर्य कसरती बदन बनाना कदापि नहीं है अपितु शारीरिक सक्रि यता व हल्का-फुल्का व्यायाम व काम से शरीर को चुस्त दुरुस्त रखना है। यही सब हमें ठंड में होने वाली शारीरिक परेशानियों से बचायेंगे। दर्द अधिक हो तब डाक्टर से जरूर मिलें।
-सीतेश कुमार द्विवेदी

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