Experiences of satsangis

सतगुरु जी ने वही पुत्र की दात बख्शी -सत्संगियों के अनुभव
पूजनीय बेपरवाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज का रहमो-करम

माता कौशल्या इन्सां पत्नी सचखंडवासी बनारसी दास, निवासी सुख सागर कॉलोनी, सरसा, (हरि.) से सच्चे मुर्शिदे-कामिल पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज के रहमो-करम का करिश्मा इस प्रकार वर्णन करती है:

मैंने पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज से नाम लिया हुआ है। वाक्या (बात) वर्ष 1960 के बाद का है। मेरे दो बच्चे थे। लड़की बड़ी और लड़का छोटा था। मेरे एक और लड़का पैदा हुआ। उस समय मेरी लड़की 5 साल की थी। उसने लड़का पैदा होते ही कह दिया कि यह तो पिता जी (डेरा सच्चा सौदा के पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज) के पास जाएगा। इस पर मुझे गुस्सा आया और मैंने अपनी बेटी को थप्पड़ दे मारा।

वह बच्चा जब चार दिन का था, तो वह पूरा हो गया। जब वह बच्चा गुजर गया तो एक रात मुझे सपना आया कि मेरा बच्चा मेरी मौसी की लड़की मुझसे छीनकर ले गई है। फिर मुझे सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने दर्शन दिए और पास खड़े होकर वचन फरमाए,‘बेटा, यह तो तेरा ही है।’ उनके हाथ में मेरा वो ही लड़का था। मैंने उसी समय पूजनीय शहनशाह जी के चरणों में अर्ज की कि सार्इं जी, मेरे पास तो मेरा एक बेटा नंद है। मेरी बुआ के लड़के के घर बच्चा नहीं है, यह उसको दे दो। पूजनीय शहनशाह जी ने वचन फरमाए, ‘उनका देखेंगे, यह तो तेरा ही है।’ सतगुरु जी के वचनानुसार हमारे घर उसी वर्ष उस लड़के ने जन्म लिया।

बच्चा वही। बिलकुल नैन-नक्श, चेहरा, सब कुछ वही। पूजनीय सार्इं जी ने मेरा बेटा मुझे दोबारा लौटा दिया। उधर मेरी बुआ के बेटे के घर लड़की पैदा हुई। फिर मेरी मां उनके परिवार को डेरा सच्चा सौदा सरसा दरबार में लेकर आई। सतगुरु-मुर्शिद का लाख-लाख, कोटि-कोटि धन्यवाद करते हैं। इसके बाद उनके सारे परिवार ने नाम-शब्द ले लिया। उपरांत उनके घर मालिक ने दो पुत्र और दो पुत्रियां बख्शी। वह परिवार आज भी डेरा सच्चा सौदा से जुड़ा हुआ है। अब मेरी पूज्य हजूर पिता जी के चरणों में यही विनती है कि अपने प्यार-मोहब्बत व रहमो-करम से मेरी ओड़ निभा देना जी।

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