Experiences of satsangis

बेटा! घबरा मत,ये तेरा ही कर्म काट रहे हैं…-सत्संगियों के अनुभव
पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपार रहमत

प्रेमी हरी सिंह इन्सां (85 मैम्बर राजस्थान) पुत्र सचखंडवासी गुरदयाल सिंह, निवासी गांव टिब्बी, जिला हनुमानगढ़ (राज.) से पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपने पर हुई रहमत का वर्णन करता है:

मार्च 1994 की घटना है। मैंने अपने प्लाट में नया मकान बनाया था। र्इंटें लाने के लिए मैंने दो ट्रैक्टर लगा दिए। एक आयशर और दूसरा ऐसकॉर्ट था। उस रात जब मैं गहरी नींद में सोया हुआ था, तो सपने में मैंने देखा कि हम दोनों टैÑक्टरों पर र्इंटें ला रहे हैं। हमारी ढाणी की तरफ रास्ता कच्चा था। एक ट्रैक्टर तो सीधा निकल गया और दूसरा रेत में फंस गया। ड्राइवर के कहे अनुसार हम ट्रैक्टर की अगली साइड में दोनों तरफ दो-दो आदमी चढ़ गए।

ट्रैक्टर ऊंचा उठा, परंतु दोबारा फिर फंस गया। हम दोबारा फिर टैÑक्टर पर तीन आदमी एक तरफ और मैं अकेला दूसरी तरफ चढ़ गया। ट्रैक्टर फिर ऊंचा उठा और मेरा दायां पैर गुटके लगाने वाली जगह में फंस गया और बुरी तरह कुचला गया। टैÑक्टर जब नीचे गिरा तो मेरी बायीं टांग ट्रैक्टर के नीचे आने से टूट गई। मुझे तुरंत उठाकर अस्पताल में ले गए। वहां डॉक्टर ने शुरुआती ईलाज के बाद मेरा दायां पैर काट दिया। उस समय मैं अस्पताल में बैड पर पड़ा सोच रहा था कि कुल मालिक हजूर पिता जी सभी के कष्ट काटते हैं, अगर मेरा भी कर्म काट देते तो अच्छा होता, परंतु फिर ख्याल आया कि जो मालिक को मंजूर होता है, वही होता है।

उसी समय मेरी पत्नी ने आवाज दी कि उठकर चाय पी लो। मैं ‘पीता हूं’ कहकर फिर सो गया। सोने के तुरंत बाद उसी तरह सपना दोबारा चलने लगा। अब मुझे पूज्य हजूर पिता जी ने दर्शन दिए। मुझे आशीर्वाद देते हुए फरमाया, ‘बेटा! घबरा मत, ये तेरा ही कर्म काट रहे हैं।’ पूज्य हजूर पिता जी मुझे धैर्य देते हुए अदृश्य हो गए। पावन दर्शन करके मुझे जो खुशी मिली, उसकी कोई सीमा-रेखा नहीं है। उसी समय मेरी पत्नी ने दोबारा फिर पूरी ऊंची आवाज में कहा कि उठकर चाय पी लो। मैंने नारा लगाकर अपनी टांग को पकड़कर देखा और खड़ा होने लगा, तो मेरा पैर भी सही-सलामत था। मैंने सतगुरु का शुक्राना किया कि सब ठीक-ठाक है।

मैं चाय पीकर ट्रैक्टर वालों के साथ र्इंटें लाने के लिए चला गया। मैं सपने वाली बात भूल गया। वापिस आते समय उसी सपने की तरह एक ट्रैक्टर तो निकल गया, परंतु आयशर ट्रैक्टर रेत में फंस गया। उसी तरह हम एक बार तो ट्रैक्टर के दोनों तरफ दो-दो आदमी चढ़े और दूसरी बार उसी तरह (सपने की तरह) एक तरफ मैं अकेला और दूसरी तरफ तीन आदमी चढ़ गए। ट्रैक्टर जब ऊंचा उठा तो मेरे पैर पर एक लोहे की पत्ती लग गई, जिससे कि एक हल्की सी चोट आई, जिस पर पट्टी बांधने की भी जरूरत नहीं पड़ी।

उसी समय मुझे रात के सपने वाला सारा सीन याद आ गया। मेरे पैर में से खून निकलता देखकर मेरी माता जी ने कहा कि बेटा, ये क्या हो गया! जाकर जल्दी से डॉक्टर से इंजेक्शन लगवा ले। मैंने कहा कि मां, घबराने वाली कोई बात नहीं है। पता नही कितने ही टीके लगने थे, कितनी पट्टियां होनी थी। लेकिन मालिक ने एक हल्की सी खरोंच से ही कर्म काट दिया है।

मैं और मेरा पूरा परिवार कुल मालिक पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का कोटि-कोटि धन्यवाद करते हैं और अरदास करते हैं कि हमारी समेत परिवार आप जी के चरणों में ओड़ निभ जाए जी।

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