Editorial -sachi shiksha hindi

कण-कण में समाया है सतगुरु का नूरे-जलाल -सम्पादकीय
प्यारे सतगुरु जी का नूरे-जलाल कण-कण में समाया हुआ है। उसी के नूर से हर शैअ रोशन है। सतगुरु प्यारे के दीद की मीठी यादें केवल एक इन्सान को ही नहीं, बल्कि सारी मानवता को संवार रही हैं। सतगुरु रुपी परोपकार के महा समुद्र की ये लहरें समूची मानवता को निखार रही हैं।

ऐसे महान रहबर, महान समाज-सुधारक, महान सच्चे दार्शनिक, सद्भावना, सांझीवालता के थम्ब थे डेरा सच्चा सौदा के दूसरे पातशाह पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज। डेरा सच्चा सौदा के आज ये करोड़ों डेरा श्रद्धालु, सत्संगी-प्रेमी पूजनीय सच्चे रहबर को उनकी 32वीं पावन स्मृति पर कोटि-कोटि नमन् करते हैं।

डेरा सच्चा सौदा की समस्त साध-संगत पूजनीय सतगुरु जी की बहुत की अहसानमंद है। पूजनीय सच्चे पातशाह परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपने उत्तराधिकारी और डेरा सच्चा सौदा के पूजनीय मौजूदा गुरु हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को 23 सितम्बर 1990 को अपना स्वरूप बख्शकर अपने पवित्र कर-कमलों से डेरा सच्चा सौदा की गुरगद्दी पर विराजमान करके साध-संगत पर बहुत बड़ा उपकार किया है। पूजनीय सतगुरु जी का यह रहमो-करम साध-संगत और पूरी मानवता के लिए बहुत बड़ा चमत्कार सिद्ध हुआ है। पूजनीय परमपिता जी का प्यार पूजनीय हजूर पिता जी व डेरा सच्चा सौदा तथा समस्त साध-संगत की जिंदगी है। पूजनीय परमपिता जी का प्यार ही हम सबकी जिंदगी, हम सबकी बंदगी, हम सबकी रूह व रूह की खुराक है।

दया-रहमत के विशाल महासागर पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज स्वयं कुल मालिक के प्रत्यक्ष स्वरूप सृष्टि व मानवता के उद्धार के लिए 25 जनवरी 1919 को जगत में पधारे। पूजनीय परमपिता जी ने जीवोद्धार के साथ-साथ समाज व मानवता की भलाई का भी महान रहमो-करम किया। आप जी की ही अपार दया-मेहर सदका डेरा सच्चा सौदा की साढ़े छह करोड़ से भी ज्यादा साध-संगत आज पूज्य हजूर पिता जी के पावन मार्ग-दर्शन में सुखपूर्वक खुशहाल जीवन जी रही है।

जिनका तबाह और बर्बाद जीवन संवर कर गुलो-गुलजार हो गया हो, जिनके चूल्हों पर भांग भुनती थी, चूल्हे जला नहीं करते थे, जो घर-परिवार बुराइयों व नशों के कारण अति गरीबी की दलदल में फंसे हुए दु:खों के समुद्र में गोते खा रहे थे, आप जी की पावन प्रेरणाओं को फॉलो करके (अपना कर) आज वो ही बहुत बड़े ‘दाना’ कहलाते हैं, अर्थात् सेवा-सुमिरन व परमार्थ भाव दीन-दुखियों की नि:स्वार्थ भावना से मदद करने में सबसे आगे हैं। ये सब आप जी का ही अपार रहमो-करम है।

छोटा परिवार और डेरा सच्चा सौदा में बिना दान-दहेज के सादगीपूर्ण विवाह-शादी की पावन मर्यादा चलाकर समाज सुधार के प्रति आप जी ने बहुत ही कारगर कदम उठाया। आप जी की ही पावन प्रेरणा से डेरा सच्चा सौदा की करोड़ों में साध-संगत बगैर दान-दहेज के सादगीपूर्ण विवाह और छोटा परिवार, सुखी परिवार (एक तीर दूजा तुक्का, भाव एक या दो बच्चों का परिवार) के नियम पर चलते हुए जहां खुद बेखटके से खुशी भरपूर जीवन बसर कर रहे हैं, वहीं दूसरों के लिए भी उदाहरण बने हैं।

आप जी ने डेरा सच्चा सौदा, साध-संगत और राम-नाम के बारे दिन दोगुना, रात चौगुना, कई गुणा बढ़ने के जो वचन फरमाए, उन्हीं के अनुसार पूज्य मौजूदा हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन रहनुमाई में डेरा सच्चा सौदा, साध-संगत और राम-नाम आज कई गुणा तरक्की के मार्ग पर अग्रसर है। आप जी ने 13 दिसम्बर 1991 तक, भाव 30-31 वर्षों में ग्यारह लाख से भी ज्यादा लोगों के नशा व बुराइयां छुड़वाकर उन्हें राम-नाम से जोड़ा और उन्हें मोक्ष-मुक्ति का मार्ग दर्शाया। इस तरह डेरा सच्चा सौदा से जुड़कर आज करोड़ों लोग आप जी के इस रहमो-करम को पा रहे हैं। आप जी के ही अपार-रहमो करम सदका पूज्य मौजूदा हजूर पिता जी की पावन रहनुमाई में डेरा सच्चा सौदा का नाम आज नेकी-भलाई के कार्यों में भी पूरी दुनिया में, पूरे विश्व में गूंज रहा है।
कोटि-कोटि नमन है जी।
-सम्पादक

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here
Captcha verification failed!
CAPTCHA user score failed. Please contact us!