बच्चों के साथ खेलें ऐसे खेल Play games with children
तीन-चार साल के बच्चे कच्ची मिट्टी की तरह होते हैं। उन्हें जैसे मोड़ा जाए वैसे मुड़ जाते हैं और उनके माता-पिता या अभिभावक होते हैं उनके कुम्हार, जो उन्हें आने वाले जीवन के लिए एक नए स्वरूप में ढालते हैं।
तो इससे बेहतर समय और क्या हो सकता है जब उन्हें शारीरिक, सामाजिक और भावनात्मक विकास के बारे में खेल-खेल में सिखाया जाए।
Table of Contents
शारीरिक गतिविधियाँ
झूला-झुलाना:
सुनने में भले ही थोड़ा अटपटा लगे, लेकिन झूला झुलाने से बच्चे में बैलेंस करने की क्षमता को बेहतर बनाया जा सकता है, हालांकि इस बात का ध्यान रखें कि बच्चे को अधिक तेजी से झूला न झुलाएं। वह घबरा भी सकता है। उसे सुरक्षित रखते हुए पकड़कर ही झूला झुलाएं।
डांस करना:

सामाजिक गतिविधियाँ
रोलप्ले या एक्टिंग करना:
बच्चों को एक्टिंग करने में या फिर नकल करने में बहुत मज़ा आता है और वे इस उम्र में स्कूल भी जाने लगते हैं तो उनसे स्कूल के दोस्तों की नकल करने को कहें। इससे होगा यह कि बच्चा अपने आस-पास मौजूद लोगों को गौर से देखना और समझना शुरू कर देगा। ये उसके लिए बाकी लोगों से जुड़ने में सहायक होगा।
प्रतियोगिता में भाग लेना:
स्कूल में किसी भी प्रकार की प्रतियोगिता में भाग लेने से बच्चा न केवल ज्यादा लोगों से बात कर पाएगा बल्कि कई प्रकार की चुनौतियों के लिए तैयार हो पाएगा। इसके लिए जरूरी है कि आप उसका साथ दें, जितना हो सके उसे समझें और उसके संसार को उसके अनुसार विस्तार देने की कोशिश करें।
भावनात्मक गतिविधियाँ
कहानी सुनाना-
बच्चों को कहानी सुनना बेहद पसंद होता है और ये उनके सामाजिक-भावनात्मक विकास के लिए बहुत अच्छा है क्योंकि कहानियाँ बच्चों में भाव और रचनात्मकता पैदा करती हैं। बच्चे को कहानियाँ सुनाएं और फिर इस बारे में उससे चर्चा भी करें। ऐसा करने से बच्चे में सहानुभूति विकसित होगी। वह खुद की और दूसरों की भावनाओं को बताना भी सीखेगा।
घर से बाहर घुमाना-
पार्क या किसी ऐसी जगह उसे घुमाने ले जाएं जहाँ पर्यावरण या इतिहास से संबंधी चीजें/इमारतें मौजूद हों। इससे बच्चा चीज़ों को महसूस करके उनके बारे में जानेगा। जो उसके संसार की तस्वीर को बड़ा करने का काम करेंगे। कोशिश करें कि बच्चे को जानकारी देते समय आप उत्साहित रहें। इससे वह भी आपसे हर प्रश्न उत्साह के साथ ही पूछेगा जो उसे जिज्ञासु बनाने के साथ उसके बौद्धिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएगा।
यह न भूलें कि वह बच्चा ही है
बच्चे को कोई भी चीज सिखाने से पहले इतना याद रखें कि वह अभी संसार को जानने के लिए पहला कदम रख रहा है। इसलिए उस पर बोझ न बनने दें कि उसे क्या सीखना और क्या करना है।
उसे हर चीज प्यार के साथ धीरे-धीरे ही सिखाएं। साथ ही बच्चे के प्रश्नों के जितना हो सके उत्तर देने की कोशिश करें। इससे उसके दिमाग में हर चीज को जानने की इच्छा और बढ़ेगी। जिस गतिविधि में बच्चा उत्साहित नहीं हो, उसे न ही करें तो बेहतर है।

































































