सब्जियों के लिए सिरदर्द है यह ‘पाला’ vegetables
सर्दी बढ़ने से जहाँ आमजन जीवन प्रभावित होना शुरू हो गया है, वहीं मौसम का प्रभाव सब्जियों तथा अन्य फसलों पर भी देखा जा रहा है। कोहरे एवं पाले के मौसम को लेकर कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सचेत किया है कि मौसम के बदलते मिजाज में कोहरे व पाले के प्रभाव से सब्जियों तथा अन्य फलदार पौधों की ग्रोथ तथा फलों पर प्रभाव पड़ सकता है।
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के पूर्व वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डॉ. सीबी सिंह के अनुसार सब्जियों व अन्य फसलों के लिए धूप जरूरी होती है लेकिन धुंध व कोहरे में धूप न होने का दुष्प्रभाव सब्जी वर्गीय फसलों पर अधिक रहता है। सर्दी के मौसम में कोहरे तथा पाले से विशेषकर आलू, टमाटर, मटर, घीया व तोरी इत्यादि की फसलों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि टमाटर, मिर्च, मटर, बैंगन इत्यादि सब्जियों के अलावा पपीते के पौधों एवं मटर इत्यादि का सबसे अधिक 80 से 90 प्रतिशत तक नुकसान की संभावना रहती है।

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शांत हवा के दिन पड़ता है पाला:
डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि जब आकाश बिलकुल साफ हो और हवा शांत हो, तब रेडिएटिव प्रकार का पाला गिरता है। जिस रात पाला पड़ने की आंशका व्यक्त की जाती है, उस रात बादल पृथ्वी के कम्बल की तरह काम करते हैं, जो जमीन से ऊपर उठने वाले संवहन ताप को रोक लेते हैं। ऐसे में बहती हवाएं इस रोकी गई हवा से मिल जुलकर तापमान एक समान कर देती हैं। शांत हवाएं विकिरण ऊष्मा को पृथ्वी से अंतरिक्ष में जाने से रोक देती है। ऐसे में हवा के नहीं चलने से एक इनवर्शन परत बन जाती है। इनवर्शन यानि एक ऐसी वायुमंडलीय दशा जो सामान्य दिनों की तुलना में उल्टी हो। सामान्य दशा में हवा का ताप ऊंचाई बढ़ने से घटता है। इनवर्शन के कारण ठंडी हवा पृथ्वी की सतह के पास इकट्ठा हो जाती है और गर्म हवा इस परत के ऊपर होती है।
फूल झड़ने की समस्या:
डॉ. सिंह ने बताया कि पाले के प्रभाव से फल मर जाते है व फूल झड़ने लगते हैं। प्रभावित फसल का हरा रंग समाप्त हो जाता है तथा पत्तियों का रंग मिट्टी के रंग जैसा दिखता है। ऐसे में पौधों के पत्ते सड़ने से बैक्टीरिया जनित बीमारियों का प्रकोप अधिक बढ़ जाता है। पत्ती, फूल एवं फल सूख जाते है। फल के ऊपर धब्बे पड़ जाते हैं व स्वाद भी खराब हो जाता है। पाले से प्रभावित फसल, फल व सब्जियों में कीटों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। फलदार पौधे पपीता आदि में इसका प्रभाव अधिक पाया गया है। सर्दी वाले पौधे 2 डिग्री सेंटीग्रेड तक का तापमान सहने में सक्षम होते हैं।
ऐसे करें बचाव:
डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि पाले से फसलों की सुरक्षा के लिए जिस रात पाला पड़ने की संभावना हो उस रात 12 से 2 बजे के आस-पास खेत की उत्तरी पश्चिमी दिशा से आने वाली ठंडी हवा की दिशा में खेतों के किनारे पर बोई हुई फसल के आसपास, मेड़ों पर रात्रि में कूड़ा-कचरा या अन्य व्यर्थ घास-फूस जलाकर धुआं करना चाहिए, ताकि खेत में धुआं हो जाए एवं वातावरण में गर्मी आ जाए। सब्जियों की फसलों को कोहरे एवं पाले से बचाव के लिए नियमति सिंचाई करते रहें। वहीं किसान कृषि विशेषज्ञों से सलाह अवश्य लेते रहें।

































































