Father's Day -sachi shiksha hindi

पिता-सा नहीं होता कोई – फादर्स-डे

‘पिता’ एक ऐसा रिश्ता जो किसी भी धर्म, देश, भाषा, जाति और समाज में सदैव समान रहता है, जिसका ध्येय इन सब बातों से ऊपर सिर्फ अपनी संतान की सुरक्षा, उसके जीवन के निर्माण और उसे अच्छी सामाजिक पृष्ठ भूमि देने का होता है। वो अपनी संतान में अपना प्रतिबिम्ब तो देखना चाहता है, परन्तु अपने से अच्छी और आकर्षक छवि हो। वो एक ऐसा साया है, जो अपने बच्चे के सम्पूर्ण जीवन तक उसके साथ रहता है। हर समय पिता के ख्यालों में उसकी औलाद, उसका परिवार समाया रहता है।

पिता एक अस्तित्व है, जिसके सानिध्य को प्राप्त करते ही एक घने बरगद की छाया में मिलने वाली शांति-सा अहसास होता है। अपनी विशाल शाखाओं की छाया में सुरक्षा का अहसास प्रदान करने वाले वृक्ष जो प्रकृति की मार से कर रहे संघर्ष का अहसास छाया लेने वाले को नहीं होने देता, उसी तरह पिता सदैव संघर्ष कर अपने पुत्र के जीवन को आकार देने के लिए अपनी खुशियों का त्याग करता है।

एक किशोर जो युवावस्था में पहुंच अपनी जीवन के सर्वश्रेष्ठ काल के चिर आनंद को भोगते हुए जैसे ही पितृत्व का अहसास प्राप्त करता है, उसे संयम की शक्ति, त्याग की भावना और अपनी पहचान को बांटने का सामर्थ्य प्राप्त होता है, और यही संयम उसके पुत्र को साहस प्रदान करता है, यही त्याग की भावना पुत्र के जीवन की अंश पूंजी होती है। यही पहचान उसे बहुत से रिश्ते दिलाती है, जिस पहचान और रिश्तों के जरिये वो पिता के बताये और अपनी महत्वाकांक्षाओं की प्राप्ति के मार्ग पर चलता है।

सूर्य प्रतिदिन उदित हो अपने प्रकाश से और प्रकाश में समाहित ऊर्जा से समस्त संसार को जीवन प्रदान कर और समस्त प्राणियों के जीवन को सुचारू चलने की व्यवस्था करता है। परिवार में वही स्थान पिता का होता है, जिसकी दिनचर्या अपने परिवार की सुचारू जीवन के लिए होती है। वो अपनी संतान रूपी बीज को नित्य अपनी आजीविका से सींच कर एक विशाल वृक्ष बनाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करता है। पिता की कई संतान हो सकती हैं, परन्तु सभी के लिए पिता का भाव हमेशा सम होता है। यही पिता के हृदय की विशालता होती है।

पिता कैसा भी हो सफल, असफल, अमीर, गरीब, शिक्षित या अशिक्षित, उसका भाव अपने पुत्र को हर क्षेत्र में अपने से अधिक सफल देखने का ही होता है। मनुष्य इस रिश्ते पर आकर कितना अलग हो जाता है, शायद यहीं आकर उसकी प्रतियोगिता की भावना समाप्त हो जाती है। पुत्र को कई रिश्तों की सम्पूर्णता प्रदान करने वाला पिता उसे अनुभव प्रदान करने के लिए उसके बाल साथी, शिक्षक, युवा मित्र और कई बार अंग रक्षक भी बन कर उसके व्यक्तित्व को निखारता है। यही पिता है।

10-15 साल के बच्चे ऐसे मनाएं फादर्स डे:-

केक पार्टी:

जाहिर सी बात है कि आपके पापा अपना काम-धंधा निपटाकर रात को ही घर लौटेंगे। फादर्स डे आने से पहले ही अपनी पॉकेट मनी से कुछ पैसे अलग से जोड़ें और फादर्स डे पर अपने पापा के लिए एक अच्छा-सा केक खरीदें और पापा को सरपराईज करें।

कार्ड्स:

अपना प्यार जाहिर कीजिये, उन्हें कार्ड देकर। आपको पेंटिंग का शौक है या आपने स्कूल में थोड़ी-बहुत ड्रार्इंग सीखी है, तो उससे अपने पापा के लिए प्यारा सा कार्ड तैयार करें। आप अपने पापा की फोटोज, या कोई कविता, या कोई अपनी कलाकृति बना सकते हैं। सच मानिए, आपने जैसा भी कार्ड बनाया होगा, आपके पापा उसे देखकर फूले नहीं समाएंगे।

मनोरंजन:

आपकी परवरिश के लिए पैसा कमाने के चक्कर में आपके पापा अपना मनोरंजन करना ही भूल जाते हैं। तो आप बच्चे अपनी मम्मी के साथ मिलकर एक कार्यक्रम तैयार करें, जिससे आपके पापा सिर्फ आपके कार्यक्रम का आनंद ले सकें। जैसे आप कोई कविता तैयार कर सकते हैं, कोई डांस या गाना अपने पापा के लिए तैयार करके उन्हें सुनाएं और खूब मस्ती करें।

युवा बच्चे ऐसे मनाएं फादर्स डे:-

घूमाने ले जाएं:

आप युवा हैं, समझदार हैं, तो आप पापा के लिए कोई टूर प्लान करें। उन्हें किसी अच्छे टूरिस्ट प्लेस पर घूमाने ले जाएं। हालांकि आप पूरा परिवार घूमने जाएंगे, लेकिन यह टूर प्लान आप अपने पिता को डेडिकेट कर सकते हैं।

लेख लिखें:

बचपन से आज तक आपने देखा है कि आपके पिता ने आपके लिए कितना संघर्ष किया है। आपने यह भी देखा होगा कि सीमित आय में भी उन्होंने आपके खर्चों को ज्यादा अहमियत दी और आपको कभी अभावों में नहीं रहने दिया। तो यह सब सोचकर अपने पिता के लिए एक लेख लिखें और उन्हें बताएं कि आपकी जिंदगी में उनकी कितनी अहमियत है। जब आप ऐसा करेंगे, तो आपके पिता समझ जाएंगे कि मेरा बेटा अब बहुत सयाना हो गया है।

पिता की उपेक्षा पर खरे उतरें:

पिता, पिता ही होता है। आप चाहे कितनी भी गलतियां कर लो, लेकिन पिता फिर भी आपको माफ करते जाएंगे और आपसे यही उम्मीद करेंगे कि आप सफल हो जाएं। तो इस ‘फादर्स डे’ पर यदि आपसे कोई गलती हुई है, तो क्षमा मांगकर अपनी गलती का अहसास करें और पिता को बताएं कि अब आप उनकी उपेक्षाओं पर खरे उतरने का भरपूर प्रयास करेंगे।

उपहार दें:

आपको लगता है कि बहुत समय से आपके पिता किसी चीज को पाने की जुगत में हैं। तो आप अपनी सैलेरी या किसी अन्य बचत से अपने पिता को वही चीज उपहार स्वरूप भेंट करें। सच मानिये, यह देखकर आपके पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो जाएगा।

शादीशुदा बच्चे कैसे मनाएं फादर्स डे:-

सरपराईज पार्टी:

आप शादी कर अपने ससुराल चली गई हैं, मगर याद कीजिए आपके पिता ने किस तरह से आपको पाला है। आज आप उनके पास नहीं हैं, सोचिए उन्हें कैसा लगता होगा? तो इस बार फादर्स डे पर बिना उन्हें बताएं अपने घर जाएं और अपने पिता के लिए एक सरपराईज पार्टी अरेंज कीजिए। पिता के प्रति आपका यह प्रेम उन्हें अंदर तक गहरा सुकून देगा।

पिता के दोस्तों को टी-पार्टी पर बुलाएं:

हो सकता है कि आपको संभालने की जद्दोजहद में पापा बरसों से अपने दोस्तों से मिले भी न हों। ऐसे में उनके घर आने पर उनके दोस्तों से चाय पर ये खास मुलाकात उनके लिए स्मरणीय रहेगी।

मिल आइए उनसे:

यदि आप किसी अन्य शहर में हैं, तो इस दिन उनसे एक मुलाकात कर आइए। यह निश्चित रूप से खुशी से उनकी आंखें नम कर देगा।

गोद में सिर रखकर सो जाएं:

भले ही आप आज बच्चों वाले हो गए हैं, लेकिन आपके पिता के लिए आप आज भी बच्चे ही हैं। जिस तरह से बचपन में वे आपसे प्यार करते थे, आपको गोद में खिलाते थे, वे आज भी ऐसा ही चाहते हैं। तो आप अपने पिता की गोद में सिर रखकर सोएं, उनसे बातें करें, उनके कोमल बुजुर्ग हाथों का स्पर्श प्राप्त करें, तो इस अहसास को जीएं कि वो आज भी आपको कितना प्यार करते हैं।

कोई जवाब दें

Please enter your comment!
Please enter your name here
Captcha verification failed!
CAPTCHA user score failed. Please contact us!