May every house be lit up with the fight of happiness diwali -sachi shiksha hindi

हर घर जगमग हो खुशियों की लड़ी

दीपावली हमारे देश का सबसे बड़ा त्यौहार है और हर कोई इस त्यौहार को भरपूर हर्षोउल्लास से मनाना चाहता है। मगर वर्तमान की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग इस कद्र उलझ गए हैं कि दीपावली का त्यौहार भी पूर्ण रूप से नहीं मना पाते। नौकरी-पेशा, बिजनेस करने वाले लोग, दिहाड़ी-मजदूरी करने वाले लोग यानि हर तरह के लोगों का यही हाल है।

इसलिए जरूरी है यह जानना कि आखिर हमारे इस सबसे बड़े पर्व को मनाने का सही तरीका क्या होना चाहिए? तो पहले यह निश्चय कर लें कि दीपावली वाले दिन हमने सिर्फ भरपूर आनन्द लेना है। आपका यह दिन पूर्ण रूप से परिवार को समर्पित होना चाहिए।

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इसलिए हम यहां कुछ सुझाव बता रहे हैं, जिन्हें अपनाकर आप दीपावली त्यौहार का भरपूर आनन्द उठा सकते हैं:-

साफ-सफाई:

दिवाली की रात अमावस्या की रात होती है और देवी लक्ष्मी का त्यौहार है। हम सब का मानना है कि इस दिन देवी लक्ष्मी हमारे घर में विराजमान होती हैं। तो सबसे पहली बात आती है घर की साफ-सफाई की। इसलिए दीपावली पर अपने घर को बिलकुल साफ-सुथरा बनाना हमारा पहला काम है। यही कारण है कि लोग इस त्यौहार के आने से 10-12 दिन पहले ही अपने घर की साफ-सफाई में लग जाते हैं। घर के साफ-सुथरा रहने से परिवार के हर सदस्य का मन प्रसन्न रहता है, जिससे इस त्यौहार की खुशी और ज्यादा बढ़ जाती है।

खरीददारी:

अब बारी आती है खरीददारी की। हमें इस त्यौहार के लिए कई चीजें खरीदनी होती हैं। चूँकि बच्चों को भी दिवाली का खास इंतजार रहता है। उनके मन में इस दिन पटाखे जलाने और नए कपड़े पहनने का खास उत्साह होता है। इसलिए सबसे पहले बच्चों के लिए खरीददारी करना जरूरी है, ताकि वो खुश हो जाएं। बच्चे यदि खुश रहेंगे तो त्यौहार मनाने का मजा दौगुना हो जाएगा।

आप बच्चों को उनकी पसंद के पटाखे तो दिलाएं, पर ये भी जरूरी है कि आप उन्हें समझाएं कि वो सुरक्षित तरीके से दिवाली कैसे मनायें। बच्चों को ज्यादा बड़े और खतरनाक पटाखे या बम ना दिलाएं। खरीददारी में नए कपड़े भी शामिल हैं। दीपावली पर अगर बच्चे नए कपड़े ना पहनें तो दिवाली की तैयारी अधूरी-सी लगती है। इसलिए बच्चों के लिए उस दिन पहनने के लिए नई ड्रेस खरीदना भी जरूरी है। क्योंकि घर का हर सदस्य दिवाली पर नए कपड़े पहनता है, तो फिर बच्चे क्यों नहीं।

दिवाली पूजन का सामान और रसोई में बनने वाले पकवान के लिए खरीददारी करनी होती है। देवी लक्ष्मी की फोटो से लेकर, फल, सजावट का सामान, मोमबत्तीयां, दीये, रंगीर झालर, चांदी का सिक्का और तरह-तरह की मिठाइयां खरीदनी होती हैं। ये काम आप दिवाली वाले दिन सुबह से लेकर दोपहर तक कभी भी कर सकते हैं। अब आपकी दीपावली की तैयारी पूरी हो चुकी है।

सोशल मीडिया का इस्तेमाल:

आजकल डिजिटल युग है, तो दीपावली के दिन सबसे पहले उठते ही अपने सभी दूर के रिश्तेदारों और मित्रों को वट्स या फेसबुक के द्वारा दीपावली के खुशनुमा सन्देश भेजें। अपने खुद के परिवार वालों को भी ‘हैप्पी दिवाली’ बोलें और बड़ों के पैर छूकर उनसे आशीर्वाद लें।

सजावट:

उसके बाद अपने घर की सजावट में लग जाएं। आप जो भी सजावट का सामान लेकर आये थे, उसका उपयोग करके घर को चमकाएं-दमकाएं। दोपहर तक आपका ये काम पूरा हो जाना चाहिए। उसके बाद आपके पास जो भी जरूरी छोटे-मोटे काम हैं वो पूरे करें।

मेल-मिलाप:

2-3 बजे के आस-पास परिवार के सभी सदस्य नहा-धोकर नए कपड़े पहनकर तैयार हो जाएँ। अब बारी आती है अपने खास दोस्तों और पड़ोसियों के घर जाकर उनसे गले मिलकर दिवाली की बधाइयाँ देने की। आप इसके लिए पहले ही लिस्ट बना लें कि आपको किस-किस के घर जाना है।

क्योंकि ये एक टाईम लगने वाला काम है, क्योंकि हर घर में आपको कम से कम 10 मिनट तो लगेंगे ही। इसलिए उसी हिसाब से लोगों से मिलने का समय तय करें। बस इतना दिमाग में रहे कि 4 बजे तक आप अपने घर वापिस आ जाएं।
जो लोग सोचते रहते हैं कि अच्छे तरीके से दीपावली कैसे मनायें, उनको समय प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है। हर काम समय पर होगा तो त्यौहार अच्छी तरह से मना पाएंगे।

जरूरतमंदों की मदद:

त्यौहार की सार्थकता उस समय और भी बढ़ जाती है, जब आप त्यौहार को किसी दूसरे की मदद करके मनाते हैं। इसलिए रिश्तेदारों, मित्रों से मिलने के बाद आप किसी जरूरतमंद के घर भी जाएं और उन्हें जरूरत अनुसार कपड़े, भोजन, मिठाइयां, पटाखे इत्यादि बांटें। इस तरह उनके चेहरों पर जो रोशनी आएगी, वो आपकी दिवाली को और भी अधिक रोशन कर देगी।

नशों से दूर रहें:

जिस घर में इस दिन लोग शराब आदि का सेवन करते हैं वहां दीपावली मनाने का कोई मतलब ही नहीं रह जाता। क्योंकि यह एक पवित्र त्यौहार है और धर्मों में नशों को बर्बादी का घर कहा गया है। इसलिए किसी भी प्रकार के नशे से दूर ही रहें।

खान-पान व पूजन:

खास लोगों से मिलकर उन्हें बधाई देने के बाद घर की महिलाओं को रसोई का काम संभालना होता है। चूँकि इस दिन हम कई सारे पकवान बनाते हैं, तो इसमें बहुत ज्यादा वक़्त लगता है। इसलिए महिलाओं को चाहियें कि वो शाम को जल्दी ही अपनी तैयारियां शुरू कर दें। कोशिश करें कि इस दिन आप हैल्दी डिशिज बनाएं, जो स्वाद व स्वास्थ्य दोनों ही कसौटी पर खरा हो।

जब तक महिलाएं पकवान बनाने की तैयारी करें घर के अन्य सदस्यों को पूजन की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। जैसे ही पकवान बनाने की प्रक्रिया पूरी हो जाए घर के सभी सदस्य अपने हाथ धोकर पूजन के लिए एक जगह इकठ्ठा हो जाएं। घर-परिवार के सभी सदस्य इस समय अपने ईष्ट भगवान का स्मरण करके पूजा अर्चना, सुमिरन करें।

दीपक जलाना व पटाखे फोड़ना:

पूजन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आपने जो मोमबत्तियां और दिए खरीदे थे उन्हें जलाकर अपने घर की मुंडेर और अन्य सभी जगहों पर रखें। ऐसा कोई भी कोना ना छोड़ें जहाँ अँधेरा हो। ऐसा करते ही आपका घर दमक जाएगा और आपको सुखद अनुभूति का आभास होगा।

ये सब करने के बाद बारी आती है पकवान खाने की। घर में जो तरह तरह के व्यंजन बने हैं उनका स्वाद लेकर दिवाली मनाने की। घर के सभी सदस्य निश्चिंत होकर खाना खाए और दिवाली की लुत्फ उठायें। अब बारी आती है दिवाली के असली मजे की। यानी पटाखे फोड़कर खुशियाँ मनाने की। पटाखों, फूलझड़ीयों के बिना दिवाली का त्यौहार बहुत ही फीका लगता है। कुछ लोग नसीहत देते हैं कि इस दिन पटाखे ना जलाएं प्रदुषण होता है। यही सही है, इसलिए हमेशा लिमिट ही पटाखे जलाएं।

हाँ, लेकिन आपको पटाखे फोड़ते हुए कुछ सावधानियां बरतने की जरुरत जरूर होती है। बच्चे जब पटाखे फोड़ते हैं, तो उनके पास ही रहें। उनका ध्यान रखें और उन्हें बताते रहें। इसके अलावा ध्यान रखें कि जहाँ आप पटाखे जला रहे हैं, वहां कोई आ-जा ना रहा हो। हो सके तो पटाखे जलाने के लिए कोई खुली जगह चुनें,

जहाँ कोई ऐसा सामान ना पड़ा, हो जिसमें आग लगने की संभावना हो। तो इस तरीके से आप दीपावली को बहुत ही अच्छे तरीके से मना सकते हैं। पटाखे जलाने के बाद पूरा परिवार इकठ्ठा होकर मिठाइयों का मजा ले सकता है।
तो इस तरह से आप इस त्यौहार को बेहतरीन तरीके से मना सकते हैं।

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