Patient care घर में रोगी की देखभाल
यदि घर का कोई सदस्य बीमार पड़ जाता है तो अपेक्षित इलाज के अलावा उसकी उचित देखभाल भी करनी चाहिए। ऐसा न करने पर पीड़ित खुद को उपेक्षित, असहाय व नकारा समझने लगता है जिससे मानसिक शांति भंग होने लगती है और रोगी लम्बे समय तक ठीक नहीं हो पाता।
- रोगी का कमरा प्राय: एकांत में होना चाहिए ताकि उसे शोरगुल से बचाया जा सके, लेकिन इतना एकांत भी न हो कि दूसरे उसकी खोज-खबर भी न ले सकें। ऐसा न हो कि उसे लगे कि घरवालों ने एक कोने में पटक दिया है। बेहतर हो उसके बिस्तर के समीप कॉलबेल की व्यवस्था कर देनी चाहिए।
- रोगी का कमरा रसोई से दूर होना चाहिए क्योंकि रसोई में प्रेशर कुकर, मिक्सी व ओवन की गंध उसे परेशान करेगी।
- रोगी का कमरा शौचालय व स्नानगृह के नजदीक हो। उसके कमरे में आवश्यक खिड़की भी हो जिससे ताजी हवा मिल सके और घुटन भी महसूस न हो।
- रोगी के कमरे में रेडियो, टीवी, पत्र पत्रिकाएं आदि भी हों ताकि वह सुविधानुसार अपना मनोरंजन कर सके। साथ ही सत्संग-भजन आदि की आॅडियो-वीडियो की व्यवस्था भी जरूर की जानी चाहिए।
- रोगी के बिस्तर के समीप एक छोटी टेबल या अलमारी हो ताकि उसकी जरूरत की चीजें जैसे, दवाई, पानी का गिलास, थर्मामीटर, तौलिया, टूथब्रश आदि उसकी पहुँच में रहें।
- रोगी का गिलास, कप-प्लेट, चम्मच आदि अलग रखें। रोगी का बिस्तर रोज़ाना बदलें। उसके कमरे की सफाई नियमित हो। फर्श व फर्नीचर आदि को फिनाइल डालकर साफ करें ताकि मक्खी, मच्छर न हों।
- रोगी की देखभाल करने वाले के हाथ साफ-सुथरे हों। उस के पास कागज के नेपकिन, टिशु पेपर आदि रखें ताकि नाक आदि पोंछने के बाद हाथ साफ करने हेतु हाथ धोने के झंझट से बचा रहे।
- जल्दी स्वास्थ्य लाभ के लिए रोगी को समय पर सही खुराक एवं डाक्टर की बताई गई पूरी दवा खिलाएं। रोगी को उसकी पसंद का खाना, फल आदि चिकित्सक के परामर्श से दे सकते हैं। मरीज के समक्ष मिठाई आदि न खाएं।
- रोगी की देखभाल करने वाले का यह फर्ज बनता है कि रोगी ने कौन-कौन सी दवा ली? दिन भर का तापक्रम क्या रहा? नींद कैसी आई? मलमूत्र कितनी बार गया, किस मात्रा में रहा, ताकि चिकित्सक द्वारा पूछे जाने पर समुचित जवाब दिया जा सके।
- रोगी के समक्ष उदास न बैठें, वरना वह भी उदास रहने लगेगा। रोग की गंभीरता कदापि रोगी को न बताएं, वरना वह चिंतित हो जाएगा और उसका गंभीर परिणाम भी हो सकता है।
- रोगी, बीमारी के कारण स्वभाव से चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसे में आप उसकी उपेक्षा न करें।

रोगी का जिम्मेदारी के साथ बड़ी सावधानी से ध्यान रखना चाहिए। रोगी को जब भी दवाई दें, तो नाम-शब्द का सुमिरन करके दवार्इं दें। रोगी को भी नारा लगाकर व 5-10 मिनट सुमिरन करने के बाद दवाई लेनी चाहिए। इससे भगवान की कृपा होती है और रोगी जल्द स्वस्थ हो जाता है।
-पूज्य गुरु संत डॉ. एमएसजी
































































