Strawberry Farming स्ट्रॉबेरी से क्षेत्र को मिली नई पहचान, किसान भी मालामाल
मैं पिछले 10 सालों से स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहा हूँ। अगर फ्रूट अच्छा हो और मंडी मेें बेहतर भाव मिल जाए तो प्रति एकड़ ढाई से तीन लाख रुपए की बचत पक्की है। इसे बच्चे क तरह पालना पड़ता है। यह कहना है हरियाणा के गांव बीरण (भिवानी) के किसान मनफूल सैनी का, दरअसल वह बापोड़ा गाँव में भूमि पट्टे पर लेकर स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहा है। करीब 10 सालों से इस खेती से जुड़ा है, इस बार भी 13 एकड़ में स्ट्रॉबेरी लगाई है।
मनफूल का कहना है कि स्ट्रॉबेरी को शुद्ध पानी की आवश्यकता होती है। जिसका टीडीएस कम से कम 250 होना चाहिए और जमीन उपजाऊ हो। इसके अलावा यह रेतीले एरिया में भी हो सकती है। शुरूआत में खेत की अच्छे से जुताई करनी चाहिए। देशी खाद डालकर खेत तैयार किया जाता है और फिर पौधों की रोपाई की जाती है।
किसान मनफूल ने बताया कि खेत में यदि खुद कार्य किया जाए तो बचत और बढ़ जाती है। मेरा खुद का परिवार मज़दूरों के साथ मिलकर स्ट्रॉबेरी को पैक करता है।
वहीं स्ट्रॉबेरी खुद की गाड़ी में दिल्ली लेकर जाते हैं और दिल्ली की आज़ादपुर मंडी में बेचते हैं। उन्होंने बताया कि स्ट्रॉबेरी लगाने में प्रति एकड़ करीब 5 लाख खर्चा आता है। वहीं गाँव दिनोद के किसान धर्मबीर ने बताया कि वह पिछले करीब 27 साल से स्ट्रॉबेरी की खेती करता आ रहा है। इस बार 8 एकड़ में स्ट्रॉबेरी लगाई है। अगर स्ट्रॉबेरी की फसल अच्छी हो तो प्रति एकड़ 2-3 लाख रुपए की बचत हो जाती है।
एक एकड़ में अच्छी फसल हो तो 8-10 हजार ट्रे पैदा हो जाती है। हमारे यहाँ कई किसानों ने स्ट्रॉबेरी की खेती की हुई है। आसपास में करीब 60 एकड़ में स्ट्रॉबेरी की बिजाई की हुई है। वे स्ट्रॉबेरी की पौध महाराष्ट्र के पूना से लेकर आते हैं।
फंगस का ज्यादा खतरा
इस खेती में फंगस की ज्यादा दिक्कत है। जिस पर नियंत्रण के लिए स्प्रे करनी पड़ती है और खाद डालनी पड़ती है। इसमें ड्रिप सिस्टम से सिंचाई की जाती है। किसान धर्मबीर ने बताया कि जमीन पट्टे पर लेकर स्ट्रॉबेरी बिजाई की है। अगर घर की जमीन हो तो हरियाणा सरकार सब्सिडी भी देती है।

































































