Earth Day पर्यावरण की शुद्धता ही लंबे जीवन की गारंटी
नीले गगन के तले-धरती का प्यार पले, ऐसे ही जग में आती हैं सुबह-ऐसे ही शाम ढले…। वर्ष 1967 में बनीं फिल्म हमराज में सिंगर महेंद्र कपूर द्वारा गाया गया यह गीत हमें धरती और प्रकृति की खूबसूरती से रूबरू करता है। इससे हमें यह भी संदेश लेना चाहिए कि हमें हर हाल में पृथ्वी को अपनी पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए सुरक्षित करना है। विश्व पृथ्वी दिवस-2026 पर हमें इस गीत को प्रेरणा बनाकर धरती को संवारने के लिए कदम बढ़ाने चाहिए।
बता दें कि विश्व पृथ्वी दिवस 190 से अधिक देशों में वैश्विक स्तर पर मनाया जाता है। यह दिन हमें आने वाली पीढ़ियों के लिए पृथ्वी को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी याद दिलाता है। हमें यह समझना होगा कि हम अपनी प्रकृति, पेड़-पौधों एवं अपनी भूमि के संरक्षक हैं। पृथ्वी दिवस पर हमें नदियों की सफाई में अग्रणी भूमिका निभानी है। पर्यावरण बचाने में सिर्फ सरकार की योजनाएं ही काफी नहीं, हम सबके सामूहिक प्रयास भी बहुत जरूरी हैं।
वर्तमान में धरती पर सबसे बड़ी चुनौती बढ़ती जनसंख्या है। धरती की कुल आबादी साढ़े सात अरब के आंकड़े को पार कर चुकी है। प्रकृति का यह सिद्धांत भी है कि जनसंख्या विस्फोट उपलब्ध संसाधनों पर नकारात्मक दबाव डालता है, जिससे पृथ्वी प्रभावित होती है। बढ़ती जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करने के लिए पृथ्वी के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन आज चरम पर पहुँच चुका है। जलवायु परिवर्तन के खतरे को कम करना दूसरी सबसे बड़ी चुनौती है। विश्व में बढ़ती जनसंख्या तथा तेजी से बढ़ते शहरीकरण व औद्योगीकरण के साथ-साथ ठोस अपशिष्ट पदार्थोें द्वारा पैदा पर्यावरण प्रदूषण की समस्या गंभीर हो रही है।
यह बात भी प्रमाणित हो चुकी है कि आज पर्यावरण को मनुष्य ने सबसे अधिक नुकसान पहुंचा है। आज दुनिया अपनी निर्धारित सीमाओं के भीतर रहने की क्षमता तेजी से खो रही है। स्वास्थ्य से जुड़े संकट की खबरें आम हो गई हैं। हम सब हालात बदलना चाहते हैं। पर्यावरण की साफ-सफाई और संरक्षण में योगदान देना चाहते हैं। हम जिस हवा में सांस लेते हैं, वह इतनी दूषित हो चुकी है कि हर साल लाखों लोग इसके कारण काल के मुंह में समा रहे हैं। हमारी नदियाँ कूड़े-कचरे और गंदे पानी से अपना अस्तित्व खो रही हैं।
साथ ही हमारे वनों पर भी खतरा मंडराने लगा है। हमें अपना पर्यावरण बचाने के लिए काफी काम करना होगा। अगर कुछ नहीं कर पाए तो पृथ्वी का अस्तित्व ही दांव पर लग जाएगा। पृथ्वी हमारे जीवन का केंद्र होने के साथ-साथ हमारे अस्तित्व का भी आधार है। जिस स्थिति में आज पृथ्वी है, उसे वहाँ पहुंचाने के लिये मनुष्य ही जिम्मेदार हैं। सबसे बड़ी समस्या मानव का पृथ्वी पर बढ़ता उपभोग है, लेकिन पृथ्वी केवल उपभोग की वस्तु नहीं है। वह मानव जीवन के साथ-साथ असंख्य वनस्पतियों-जीव-जंतुओं के आश्रय का भी स्थल है।
Table of Contents
हम सबको बनना होगा पृथ्वी के प्रहरी: डा. राम सिंह
पर्यावरणविद् डा. राम सिंह कहते हैं कि पृथ्वी दिवस के अवसर पर हम सबको पृथ्वी के प्रहरी बनने का संकल्प लेना होगा। पृथ्वी पर किसी जीव-जंतु के पास ऐसे विशेष अधिकार नहीं हैं कि वे पृथ्वी को बचाने में कुछ कर सकें। यह नियामत भी मनुष्य के पास है, जैसे हम अपनी लंबी आयु चाहते हैं और तमाम तरह के प्रयास हम करते हैं। बीमार होने पर दवा लेते हैं। ऐसे ही हमें पृथ्वी के साथ करना होगा। पृथ्वी को स्वच्छ, स्वस्थ रखने के लिए काम करना होगा।
पृथ्वी पर इंसान के हस्तक्षेप से जलवायु के चक्र बदल चुके हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात का चक्र अब पूरी तरह से बदला हुआ है। हम इस पर बात तो खूब करते हैं, मगर इसे अपनी सही स्थिति में लाने के लिए प्रयासों में हमेशा कमी रखते हैं या फिर प्रयास करते ही नहीं।
हमारी प्रकृति में डायनासोर भी होते थे। बड़े दाँतों वाले हाथी और गिद्धों के बारे में हमने किताबों में ही पढ़ा है। शायद ही हमने इन्हें अपनी आँखों से देखा हो।
यह भी चिंता की बात है। एक्सपर्ट इस बात पर भी चिंतित हैं। प्रकृति में हो रहे बदलावों से मनुष्य की आने वाली पीढ़ियां तेजी से विलुप्त होने के कगार पर खड़ी कई प्रजातियों के बारे में सिर्फ किताबों में ही ना जाने। वे अपनी आँखों से इन सबको देखें, क्योंकि आज दुनिया में हज़ारों प्रजातियों के पक्षी, स्तनधारी और कीट-पतंगे या तो विलुप्त हो चुके हैं या फिर विलुप्त होने की कगार पर हैं। हमें यह भी नहीं भूलना चाहिए कि जलवायु में परिवर्तन, पेड़ों, वनों की अंधाधुंध कटाई, कंक्रीट के बढ़ते जंगल, बढ़ता शहरीकरण, कीटनाशकों का इस्तेमाल और प्लास्टिक प्रदूषण हमारे जीवन को प्रभावित करने और इन प्रजातियों को खत्म करने के लिए जिम्मेदार हैं।
Earth Day पर्यावरण का सच्चा प्रहरी डेरा सच्चा सौदा
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में डेरा सच्चा सौदा के प्रयास दुनियाभर में विख्यात हैं। बात चाहे पौधारोपण, स्वच्छता की हो या फिर चाहे पानी बचाने की बात हो, डेरा सच्चा सौदा ने हर क्षेत्रों में इतने मजबूत प्रयास किए हैं कि वे खुद-ब-खुद विश्व रिकार्ड बनते चले गए। सन् 1948 में डेरा सच्चा सौदा की स्थापना हुई, तभी से ही डेरा सच्चा सौदा धरती माँ की सार-संभाल में जुटा हुआ है। पूज्य संत डॉ. एमएसजी के पावन सान्निध्य में देश-विदेश में रह रहे करोड़ों डेरा श्रद्धालुओं ने हमेशा पर्यावरण संरक्षण एवं स्वच्छता को प्राथमिकता के तौर पर अपनाया हुआ है।
पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने पर्यावरण संरक्षण को नया आयाम देते हुए वर्ष 2007 में पौधा रोपण मुहिम का आगाज किया था। डेरा सच्चा सौदा की साध-संगत हर वर्ष 15 अगस्त को लाखों पौधे लगाकर पूज्य गुरु जी को पावन अवतार दिवस की बधाई के रूप में अनूठी सौगात देती है। डेरा सच्चा सौदा की ओर से अब तक 26.7 करोड़ पौधे लगाए जा चुके हैं। दिलचस्प बात यह भी है कि डेरा अनुयायी पौधारोपण करने के साथ-साथ उन पौधों की सार-संभाल का जिम्मा भी खुद ही उठाते हैं।
यही कारण है डेरा सच्चा सौदा की ओर से रोपित पौधों में से अधिकतर पौधे बड़े पेड़ बनकर पर्यावरण की स्वच्छता में अहम भूमिका निभा रहे हैं।
यही नहीं, डेरा सच्चा सौदा ने बड़े-बड़े शहरों, नगरों व महानगरों में लगे गंदगी के ढेरों को हटाने का भी बीड़ा उठाते हुए सितंबर 2011 में ‘हो पृथ्वी साफ मिटे रोग अभिशाप’ सफाई महाअभियान चलाया।
सफाई महाअभियान का यह कारवां अब तक दिल्ली, गुड़गांव, हरिद्वार, ऋषिकेश, मुंबई जैसे 32 शहरों व नगरों को स्वच्छता की सौगात दे चुका है, जो अपने-आप में बेमिसाल है। वहीं दिनोंदिन गहराते भूमिगत जल के संचय को लेकर भी डेरा सच्चा सौदा द्वारा किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। पूज्य गुरु जी किसानों को कम सिंचाई वाली फसलों को तरजीह देने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, इसके साथ-साथ बारिश के पानी को भूमिगत टैंकों में एकत्रित करने के लिए कई नायाब तरीके सुझा चुके हैं, जिसे अपनाकर किसान लाभांवित हो रहे हैं। पृथ्वी दिवस पर डेरा सच्चा सौदा के इन प्रयासों की अहमियत और बढ़ जाती है।

































































