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महिला सशक्तिकरण की मिसाल ‘प्रवेश’

कोरोना काल में दुनियाभर में करोड़ों लोगों का जीवन प्रभावित हुआ। लाखों लोगों ने जान गंवाई और लाखों का रोजगार छिन गया। इसी दौर में गुरुग्राम की महिला प्रवेश का परिवार भी प्रभावित हुआ। प्रवेश देवी के पति की कंपनी से नौकरी चली गई और वे बेरोजगार हो गए। इस समय में प्रवेश ने खुद कुछ करने की ठानी और स्वरोजगार शुरू किया। आज वह अपने पति के साथ मिलकर जूट के बैग बनाने के काम में मजबूती से आगे बढ़ते हुए अच्छी-खासी कमाई कर रही हैं।

गुरुग्राम के पटौदी खंड के ऊंचा माजरा गांव की रहने वाली प्रवेश के पति धर्मेंद्र की कंपनी में पक्की नौकरी थी, लेकिन कोरोना के कारण वह नौकरी छूट गई। पहले से ही सेल्फ हेल्प गु्रप को संचालित करने वाली प्रवेश ने कोरोना काल में अपने गु्रप को और अधिक सक्रिय किया। कोरोना काल में मास्क बनाने शुरू किए। एडीसी कार्यालय गुरुग्राम से उन्हें कपड़ा मिला। प्रवेश के मुताबिक उन्होंने गाँव की महिलाओं के साथ मिलकर एक लाख 70 हजार रुपए के मास्क बेचे। यहीं से उनके जीवन में और बेहतर काम करने का मिशन शुरू हुआ।

वर्ष 2020 में उन्होंने अपने गाँव में ही पति की परचून व कपड़ों की दुकान खुलवाई। काम अच्छा चल पड़ा। वर्ष 2022 में प्रवेश ने रूडसेट संस्थान से बैग बनाने की ट्रेनिंग ली। गाँव में 35 महिलाओं के साथ जूट के बैग बनाकर दुकानों पर बेचने के लिए खुद ही मार्केटिंग करनी शुरू की। उनके इस प्रोडक्ट को काफी पसंद किया जाने लगा। वर्ष 2023 से उन्होंने सरस मेले में अपनी स्टॉल लगाकर जूट के बैग को बड़े मंच पर प्रदर्शित किया। प्रवेश कहती हैं कि सरस मेले में आकर यह भी अंदाज़ा हुआ कि ग्राहक किस तरह के बैग पसंद करते हैं। ग्राहकों की डिमांड के अनुसार ही उन्होंने बैग के डिजायन बनाने शुरू किए। कैनवास, जूट, जकाट, रुगार्ड के डिजायनर बैग वे बना रही हैं। बैग बनाने के लिए वह गोवा, बिहार, कलकत्ता से कच्चा माल मंगवाती हैं और अपने गाँव ऊंचा माजरा में ही जूट के बैग तैयार करती हैं।

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प्रवेश ने इस काम को शुरू करने के लिए साढ़े तीन लाख रुपए निवेश किए। उनसे कच्चा माल व मशीनें खरीदीं। आज उनकी वर्कशॉप में जूट के बैगों की 23 वैरायटी तैयारी होती हैं। गोगल बैग, सीलिंग बैग, बोतल बैग, लंच बैग, लैपटॉप बैग और महिलाओं के लिए पर्स के आकार के बैग समेत कई तरह के बैग तैयार किए जाते हैं। खास बात यह है कि मेलों में महिलाओं से बातचीत, उनके द्वारा बताए गए डिजाइन के बैग प्रवेश तैयार करवाती हैं। प्रवेश के मुताबिक, घर में सभी कमाएं तो कोई किसी पर निर्भर नहीं रहता।

इसलिए उन्होंने अपने पति की नौकरी छूटने के दुख में बैठने की बजाय खुद ही कमान संभाली। पातली हाजीपुर गाँव की बेटी प्रवेश ने शादी से पहले 10वीं कक्षा की ही पढ़ाई की थी। शादी के बाद उन्होंने 12वीं और बीए की पढ़ाई पूरी की। पिछले साल ही उन्होंने बीए कोर्स पूरा किया है, यानि स्वरोजगार के साथ उन्होंने पढ़ाई को भी महत्व दिया। उनका कहना है कि पढ़ाई हर जगह जरूरी है। इसलिए उसने पढ़ाई जारी रखी। उनकी बेटी तनिषा हिंदू कॉलेज दिल्ली में पढ़ रही हैं और बेटा सुशांत 11वीं कक्षा में पढ़ता है।