Yaad-e-Murshid -sachi shiksha hindi

कैसे करें तेरे रहमो-करम की तारीफ मेरे सतगुरु – याद-ए-मुर्शिद 13 दिसम्बर

‘तेरी याद से है रोशन मेरा जहां,
करें जिनसे तेरे रहमो-करम की तारीफ,
हमारे पास नहीं वो अल्फाज।
सुना सके जो तेरे उपकारों का तराना,
दुनिया में बना नहीं कोई ऐसा साज।
दिल की धड़कनों से ही होता है ब्यां,
बस कुछ ऐसा था
आपका प्यार देने का अंदाज।’

परम पूजनीय सच्चे रहबर परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने जीव-सृष्टि के उद्धार के लिए अपने रहमो-करम की ऐसी लहर चलाई कि जो भी जीव आप जी के सम्पर्क में आया, बगैर किसी भेदभाव के आप जी ने सबको अपनी दया-मेहर से सराबोर किया। आप जी की ही रहमत है कि आज साढ़े छह करोड़ से भी ज्यादा परिवारों में, घर-घर में आप जी के इन्हीं परोपकारों, आप जी के ही अपार रहमो-करम की चर्चा है। ऐसे प्यारे दाता, रूहानियत के सच्चे रहबर पूजनीय परमपिता जी के पवित्र चरण-कमलों में बार-बार सजदा, कोटि-कोटि नमन करते हैं।

पवित्र जीवन झलक:

पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज गांव श्री जलालआणा साहिब, तहसील डबवाली जिला सरसा के रहने वाले थे। आप जी ने पूजनीय पिता जैलदार सरदार वरियाम सिंह जी के घर अति पूजनीय माता आस कौर जी की पवित्र कोख से 25 जनवरी 1919 को अवतार धारण किया। आप जी अपने पूजनीय माता-पिता जी की इकलौती संतान थे। करीब 17-18 वर्ष के लम्बे इंतजार के बाद एक मस्त फकीर की दुआ और परमपिता परमात्मा की कृपा से सृष्टि पर आप जी का शुभ आगमन हुआ। उस मस्त फकीर ने पूजनीय माता-पिता की सच्ची तड़प और सेवा-भावना से प्रसन्न होकर परमपिता परमेश्वर से दुआ करते हुए कहा, ‘भाई भगतो! आपकी सेवा परमेश्वर को मंजूर हो गई है।

आपके घर कोई महापुरुष जन्म लेगा, वो आपका वारिस बनकर आएगा।’ उस फकीर-बाबा ने यह भी बता दिया था कि ये महान हस्ती चालीस वर्ष तक ही आपके यहां रहेंगे, उसके बाद उसी राम, परमपिता परमात्मा द्वारा सौंपे मानवता हितैषी कार्य, जीवोद्धार के लिए उन्हीं के पास ही चले जाएंगे, जिसके हुक्म से इनका आप जी के घर शुभ आगमन हुआ है। वर्णनीय है कि परमपिता परमात्मा अपनी हस्तियों को (अपने स्वरूप को) प्रकट करने के लिए ऐसे जन्मदाता के घर भेजता है, जो बहुत ऊंचे संस्कारों वाले व उसकी भक्ति से जुड़े होते हैं।

आप जी सिद्धू वंश से संबंध रखते थे। पूजनीय माता-पिता जी ने आप जी का नाम सरदार हरबंस सिंह जी रखा था, उपरांत अपने पूजनीय सतगुरु बेपरवाह सार्इं मस्ताना जी महाराज के सम्पर्क में आने पर उन्होंने आप जी का नाम बदलकर सरदार सतनाम सिंह जी (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज) रख दिया। अभी आप जी छोटी अवस्था में ही थे कि आपके पूजनीय पिता जी का साया आप जी के सिर से सदा के लिए उठ गया। आप जी का लालन-पालन, शिक्षा आदि का सारा कार्यभार पूजनीय माता जी पर आन पड़ा, जिसे उन्होंने आप जी के पूजनीय मामा (ओड़ निभा गए जीएसएम सेवादार) बाबा बीर सिंह जी की पावन देख-रेख में खूब निभाया।

सच की प्राप्ति:

पूजनीय माता जी के पवित्र संस्कारों के कारण आप जी बचपन से ही असल सच (खुद-खुदा, परमपिता परमेश्वर) के मिलाप की प्रबल इच्छा रखते थे। आप जी बचपन से ही सच की तलाश में लगे हुए थे और जैसे कुछ बड़े हुए, सच को पाने के लिए आप जी ने कई बड़े-बड़े साधु-महात्माओं की भी सोहबत, उनसे राम-नाम की चर्चा और उनसे कई गोष्टियां की, परंतु कहीं से भी तसल्ली नहीं हुई। इसी दौरान आप जी ने डेरा सच्चा सौदा के पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज (डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक) जिन्होंने 29 अप्रैल 1948 को डेरा सच्चा सौदा की नींव रखी, डेरा सच्चा सौदा सर्वधर्म संगम स्थापित किया, की उपमा के बारे में सुना।

आप जी ने डेरा सच्चा सौदा सरसा में पूजनीय बेपरवाह जी का रूहानी सत्संग सुना। सत्संग सुनकर और पूजनीय बेपरवाह जी के नूरानी दर्शन करके आप जी बहुत प्रभावित हुए। सच सामने था, जिसे पाकर आप जी की पूर्ण तसल्ली हो गई। आप जी ने पूजनीय बेपरवाह जी के बहुत सत्संग सुने। आप जी ने इस दौरान नाम-शब्द लेने की भी बहुत बार कोशिश की, परंतु पूजनीय बेपरवाह सार्इं मस्ताना जी महाराज आप जी को हर बार यह कहकर नाम-शब्द वालों से उठा दिया करते कि ‘अभी आपको नाम-शब्द लेने का हुक्म नहीं हुआ है। जब समय आया तो खुद बुलाकर और आवाज लगाकर नाम-शब्द देंगे। आप सत्संग करते रहो। आपको काल नहीं बुलाएगा।’

पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने 14 मार्च 1954 को घुक्कांवाली दरबार में सत्संग फरमाने के बाद वहीं पर खड़े होकर जिस जगह पर विराजमान होकर उन्होंने सत्संग किया था, आप जी को खुद बुलाकर और आवाज देकर कहा, ‘सरदार हरबंस सिंह जी, (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज का बचपन का नाम) आज रात आपको नाम-शब्द का हुक्म हुआ है। आप अंदर जाके हमारे मूढे के पास जाकर बैठो, हम भी अभी आते हैं।’ मूढे के पास जगह न होने के कारण आप जी अन्य नामाभिलाषी जीवों में पीछे बैठ गए। जब सार्इं जी अंदर आए, तो आप जी को आवाज देकर अपने मूढ़े के पास बिठाया और फरमाया, ‘आपको इसलिए पास बिठाकर नाम देते हैं कि आपसे कोई काम लेना है। आपको जिंदाराम का लीडर बनाएंगे, जो दुनिया को नाम जपाएगा।’

आप जी तो पहले दिन से ही अपने मुर्शिद प्यारे पूजनीय बेपरवाह मस्ताना जी महाराज को अपने पीरो-मुर्शिद अपना मौला, परमेश्वर के स्वरूप में अपने अंतर-हृदय में विराजमान करके अपना तन-मन-धन और अपना सब कुछ उनके अर्पण कर चुके थे। इस तरह नाम-शब्द के रूप में प्रभु का प्रभु-परमेश्वर से मिलाप हो गया।

उस फकीर-बाबा के वचनानुसार वह समय भी आ गया था। आयु वो ही लगभग 40 साल। आप जी अपना सब कुछ अपने सतगुरु-मौला पर कुर्बान कर चुके थे और जब बेपरवाही-ईलाही हुक्म हुआ, तो आप जी ने पल भी नहीं लगाया। अपनी शाही हवेली को बेपरवाही हुक्मानुसार स्वयं अपने हाथों से तोड़ा और हवेली का सारा मलबा, एक-एक र्इंट, छोटे कंकर तक, लकड़-बाला, बड़े-बड़े शतीर, भारी लोहे के गार्डर और घर का सारा सामान (छोटी सूई से लेकर बड़ी से बड़ी वस्तु तक) अपनी जमीन-जायदाद आदि हर चीज को ट्रकों,

टैÑक्टर-ट्रालियों में भरकर अपने प्यारे सच्चे रहबर की पावन हजूरी में डेरा सच्चा सौदा दरबार में लाकर रख दिया और अपने-आपको भी पूर्ण तौर पर अपने मुर्शिद प्यारे को सौंप दिया। त्याग करना भी रूहानियत में बहुत महत्वपूर्ण बताया गया है, लेकिन आपजी का ऐसा महान त्याग कि अपने छोटे-छोटे साहिबजादे, साहिबजादियां पूरी जवानी की उम्र इत्यादि और इतने बड़े खानदान का त्याग करना अपने-आपमें बेमिसाल है।

सतनाम-कुल मालिक का नाम:-

पूजनीय बेपरवाह जी ने आप जी की सख्त से सख्त परीक्षा ली और जब आप जी को हर तरह से परिपूर्ण पा लिया, तो गुरगद्दी बख्शिश करने का अटल फैसला किया। पूजनीय बेपरवाह जी आपजी पर, आपजी के प्यार, अपने सतगुरु, परमपिता परमात्मा के लिए महान त्याग पर बहुत खुश थे। पूजनीय बेपरवाह जी ने 28 फरवरी 1960 को आपजी को अपना स्वरूप भाव सरदार हरबंस सिंह जी से सरदार सतनाम सिंह जी (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज) कुल मालिक बना लिया।

पूजनीय सार्इं जी ने 28 फरवरी 1960 को आप जी को अपने साथ शाही स्टेज पर विराजमान किया और अपने पवित्र कर-कमलों से डेरा सच्चा सौदा की गुरगद्दी पर बतौर दूसरे पातशाह विराजमान करते हुए साध-संगत में वचन फरमाया, ‘सतनाम कुल मालिक का ही नाम है। आज असीं सरदार हरबंस सिंह जी को सरदार सतनाम सिंह जी कुल मालिक बना दिया है। सतनाम वो ताकत है जिसके सहारे सारे खण्ड-ब्रह्मण्ड खड़े हैं।’ पूजनीय बेपरवाह जी ने सरेआम साध-संगत में यह भी स्पष्ट किया कि ‘जिस सतनाम को दुनिया जपदी-जपदी मर गई, पर वो नहीं मिला।

ये वो ही सतनाम है। असीं इन्हें अपने सच्चे मुर्शिदे-कामिल दाता सावण शाह जी के हुक्म से अर्शों से लाकर तुम्हारे सामने बिठा दिया है। ये अपनी दया-मेहर से दुनिया का उद्धार करेंगे।’ जो इनके पीठ पीछे से भी दर्शन कर लेगा और अपने मुख से ‘सतनाम’ बोल देगा, वह भी नरकों में नहीं जाएगा। ये अपने रहमो-करम से उसका भी उद्धार करेंगे। और इसके साथ ही पूजनीय बेपरवाह सार्इं जी ने अपनी हर तरह की जिम्मेदारी और डेरा सच्चा सौदा व साध-संगत की सेवा व संभाल का कार्यभार भी उसी दिन से ही आपजी को सौंप दिया। और उसके बाद बेपरवाह जी ने आप जी को अनामी गुफा में स्वयं अपने पवित्र कमलों से खुद विराजमान किया, जो पूजनीय बेपरवाह जी ने स्वयं अपनी देख-रेख में आप जी के लिए ही विशेष तौर पर तैयार करवाई थी।

तेरे उपकार सतगुरु जाएं न गिनाए:-

डेरा सच्चा सौदा में गद्दीनशीन होकर पूजनीय परमपिता जी ने 30-31 वर्षों तक साध-संगत व डेरा सच्चा सौदा दरबार के प्रति अपना जो अनमोल प्यार बख्शा, वह कहने-सुनने से परे है। आप जी ने साध-संगत रूपी फुलवाड़ी को अपने रहमो-करम के प्रेम-अमृत से जिस तरह से सींचा, उसी के फलस्वरूप डेरा सच्चा सौदा आज करोड़ों लोगों (साढेÞ छह करोड़ से भी अधिक साध-संगत) की आस्था का केन्द्र, हरमन प्यारा, सच्चा ईष्ट, सिजदा करने का पवित्र स्थान है।

आप जी ने अपना हर पल जीवोद्धार, सत्संगों व परमार्थी कार्यों में लगाया। ‘कर लिया सो काम, जप लिया सो नाम’, यही आप जी का परम उद्देश्य रहा। आप जी ने अपने इस परम उद्देश्य को लेकर गर्मी, सर्दी, वर्षा, आंधी, झख्खड़ इत्यादि की कभी परवाह नहीं की। कई बार तो आप जी तेज बुखार (104 डिग्री) के होते हुए भी सत्संग के लिए पहुंच जाते। हालांकि डॉक्टर साहिबान आप जी को पूरा आराम करने की सलाह देते और सेवादार भी सत्संग कैंसिल कर देने की विनती करते, लेकिन आप जी सेवादारों को बड़े प्यार से समझाते, ‘बेटा, संगत बेचारी पता नहीं कब से इंतजार कर रही होगी और अगर नहीं जाएंगे, तो वो बेचारे निराश हो जाएंगे, उनका दिल टूट जाएगा।’

आप जी मानवता भलाई के लिए समाज में फैली दहेज प्रथा व नशे आदि बुराइयों, समाज में फैले वहमों-भ्रमों, तरह-तरह के पाखण्डों तथा रूढ़िवादी कुरीतियों को खत्म करने और साफ-स्वच्छ व स्वस्थ समाज के निर्माण के लिए हमेशा यत्नशील रहे। आपजी ने बढ़ती जनसंख्या पर गहरी चिंता जताते हुए समाज को ‘छोटा परिवार सुखी परिवार’ का संदेश दिया। ‘एक तीर दूजा तुक्का’, आप जी ने छोटे परिवार का ये मंत्र दिया। भाव, एक या दो बच्चों का छोटा परिवार होना चाहिए। (इन पावन ईलाही वचनों सदका पूज्य मौजूदा गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने डेरा सच्चा सौदा की साढ़े छह करोड़ से ज्यादा साध-संगत में बेतहाशा बढ़ रही देश की जनसंख्या को कंट्रोल करने के लिए ‘बच्चा एक ही सही, दो के बाद नहीं’ का वचन लागू करवाया है।

इसी पावन वचन के तहत रोजना जितने भी शादी वाले परिवार दरबार में शादी करवाने आते हैं, लड़का-लड़की दिलजोड़ माला डालते समय पूज्य गुरु जी के इसी वचन के तहत लिखित में प्रण करते हैं।) आप जी ने फरमाया कि कई बार बेटे की चाहत में परिवार बहुत बढ़ जाता है, जिससे बच्चों का पालन-पोषण और उनकी शिक्षा आदि का प्रबंध सही तरीके से नहीं हो पाता। बेटा-बेटी को एक समान समझो और उन्हें अच्छे संस्कार दो। बेटियां भी बेटों से किसी क्षेत्र में कम नहीं हैं।
आप जी ने साध-संगत को जमने-मरने की पुरानी रूढ़िवादी और गलत धारणाओं को छोड़ने के लिए प्रेरित किया। सच्चे संतों का संदेश कुल दुनिया के लिए होता है। आप जी ने मानवता भलाई के लिए डेरा सच्चा सौदा में बिना दान-दहेज की शादियों की एक स्वस्थ परम्परा चलाई। जिस पर चलते हुए आज करोड़ों परिवार फायदा उठाकर बहुत ही सुखमय जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

आप जी ने अपना पूरा जीवन बहुत ही सादगीपूर्ण ढंग से व्यतीत किया। आपजी ने अपने स्वार्थ के लिए उम्र-भर डेरा सच्चा सौदा दरबार से कभी एक नए पैसे की भी वस्तु का प्रयोग नहीं किया, बल्कि अपनी हक-हलाल, अपने पैतृक जमीन की कड़ी मेहनत की कमाई का ज्यादातर हिस्सा डेरा सच्चा सौदा में रह रहे जीएसएम सेवादारों तथा साध-संगत की सुविधा व लंगर-भोजन पर लगा देते। आप जी ने साध-संगत को हर तरह की सुविधाएं प्रदान की और साध-संगत की खुशी के लिए हर यत्न किया।

गुरगद्दी बख्शिश:

समय व स्थिति के अनुसार पूजनीय परमपिता जी ने गुरगद्दी बख्शिश करने का अपना अटल फैसला जुलाई 1989 में साध-संगत के जिम्मेवारों से सांझा किया। आप जी ने अपने इस पवित्र उद्देश्य के लिए साध-संगत के साथ लगभग सवा साल तक मीटिंगों के जरिये विचार-विमर्श किया। इस दौरान आप जी ने धुरधाम से बनकर आई उस पवित्र रूह को अपने रहमो-करम से पूर्ण कर लिया था। गुरगद्दी बख्शिश के लिए आप जी ने 23 सितम्बर 1990 का दिन निश्चित किया, जबकि गुरगद्दी की कानूनी परिक्रिया को इससे लगभग 2-3 महीने पहले ही (वसीयतनामा के रूप में) पूर्ण करवा लिया था।

आप जी ने 23 सितम्बर 1990 दिन रविवार को मौजूदा गुरु जी पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को पूर्ण पवित्र मर्यादानुसार सरेआम साध-संगत में अपना उत्तराधिकारी घोषित कर डेरा सच्चा सौदा गुरगद्दी पर स्वयं अपने पवित्र कर-कमलों से विराजमान किया। आप जी ने साध-संगत में फरमाया, ‘भाई, जैसा हम चाहते थे, शहनशाह मस्ताना जी महाराज ने उससे भी कहीं बढ़कर योग्य नौजवान हमें ढूंढ कर दिया है। आज हम बहुत खुश हैं और अपने-आपको ‘हौला फुल’ (हल्का-फुलका) महसूस कर रहे हैं। ऐसे लगता है कि जैसे हमारे सिर से बहुत भारी बोझ उतर गया हो। हमने इनकी झोली में दोनों जहां की दौलत डाल दी है। इन्हें ऐसा बब्बर शेर बनाएंगे, जो मुंह तोड़ जवाब देंगे। कोई उंगली नहीं उठा सकेगा। पहाड़ भी टकराएगा तो चूर-चूर हो जाएगा।’

गुरगद्दी बख्शिश करने के साथ ही पूजनीय परमपिता जी ने जहां डेरा सच्चा सौदा की सारी जिम्मेदारी अपने वारिस पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को सौंप दी, वहीं सत्संग, नाम, साध-संगत की सेवा व संभाल तथा डेरा सच्चा सौदा के सभी कार्यों की जिम्मेवारी भी उन्हें सौंप दी। आप जी ने साध-संगत के भले के लिए अपना एक पवित्र हुक्मनामा भी उसी दिन साध-संगत के नाम जारी किया। यह पवित्र हुक्मनामा सारी साध-संगत में पढ़कर सुनाया गया, ताकि साध-संगत अपने मन या किसी और के बहकावे में आकर अपना अकाज न कर ले।

आप जी ने अपने पवित्र हुक्मनामे में साध-संगत में फरमाया कि ये (पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां) हमारा ही रूप हैं। इनका हुक्म हमारा हुक्म है। जो इनसे प्रेम करोगा, वह मानो हमसे प्रेम करता है। जो इनसे भेदभाव करेगा, वह मानो हमसे भेदभाव करता है। आप जी ने यह भी फरमाया कि जो जीव सतगुरु के वचनों पर भरोसा करेगा, वह सुख पाएगा। इतना ही नहीं, आप जी लगभग पंद्रह महीने (सवा साल तक) खुद बॉडी रूप में मौजूदा पूज्य गुरु हजूर पिता जी के साथ साध-संगत में मौजूद रहे। पूजनीय परमपिता जी ने साध-संगत पर अपना ऐसा परोपकार करके दुनिया में एक अनोखी मिसाल पेश की।

पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज 13 दिसम्बर 1991 को अपना पंच भौतिक (पांच तत्व का भौतिक) शरीर त्यागकर परमपिता परमात्मा की अखंड ज्योति में ज्योति-ज्योत समा गए।
‘हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे’। आप जी के इन्हीं पावन वचनों के अनुरूप आप जी अपने मौजूदा स्वरूप पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा आप जी के वचनानुसार साध-संगत की सेवा व संभाल पहले से भी कहीं ज्यादा, दोगुनी-चौगुनी, कई गुणा बढ़कर कर रहे हैं। चहुं ओर यानि हर तरफ आज आप जी का ही जल्वा, नूरे जलाल झलक रहा है।

महान विभूति:

पूजनीय परमपिता जी एक महान विभूति, अद्वितीय शख्सियत थे। आप जी के रूहानी जलवे, नूरी सुंदर मुखड़े के दर्श-दीदार पाके हर कोई नत्मस्तक हो जाता। आप जी खेत में अनथक किसान, पंचायत में प्रधान, बीमारों के लिए वैद्य लुकमान ( वैद्य, डॉक्टर, सर्जन), दीन-दुखियों के मसीहा, बेसहारों का सहारा, सच्चे हमदर्द, विशेषज्ञ, महान साहित्यकार, उस्तादों के उस्ताद, रूहानियत के सच्चे रहबर, दया-रहम के पुंज थे।

आप जी का समूचा जीवन बचपन से ही पाक-पवित्र व अलौकिक परोपकारों से भरपूर था। अति सुंदर सुडौल व स्वस्थ आकर्षक काया, ऊंचा-लंबा कद, चौड़ा नूरी ललाट, वात्सल्य भरपूर नूरी नेत्र, नुरानी सुंदर मतवाली चाल, ईलाही नूरी जलाल से चमकता नूरानी चेहरा, सब गम फिक्रों को काफूर कर देने वाली आप जी की अति प्यारी ईलाही मुस्कान, आप जी की पवित्र मुखवाणी जो कुटिल-कठोर हृदयों की भी मोम बना देती, जो भी सुनता मंत्रमुग्ध होकर अपने-आप से बेखबर हो जाता और अपने आपको साध-संगत की सेवा में समर्पित कर देता। आप जी की पवित्र रसना, अमृतवाणी, ईलाही पवित्र स्वरूप, भाव आप जी की हर नूरानी अदा में इतनी कशिश थी कि लोग कोसों से भंवरों की तरफ खिंचे चले आते। इस प्रकार लाखों लोग आप जी के द्वारा राम-नाम से जुड़कर दीन-दुखियों में मालामाल हुए हैं। आप जी की पवित्र याद आज देश-विदेश के करोड़ों लोगों के दिलों में समाई हुई है।

आप जी ने 18 अप्रैल 1963 से 26 अगस्त 1990 तक इन 27-28 वर्षों के दौरान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों के हजारों गांवों, शहरों, कस्बों में अपने हजारों रूहानी सत्संगों के माध्यम से 11 लाख से भी अधिक लोगों को नाम-शब्द, गुरुमंत्र देकर मांस, अंडा, शराब आदि हर तरह की बुराइयां छुड़वाकर उनका भवसागर से पार उतारा किया।

आप जी द्वारा डेरा सच्चा सौदा में शुरू की गई मानवता भलाई तथा समाज सुधार कार्यों की लड़ी को गति देते हुए पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने उन नेक-पवित्र कार्यों का पूरे विश्व तक विस्तार किया। डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए मानवता भलाई के सभी 159 कार्य आज देश-विदेश की साढ़े छह करोड़ से भी ज्यादा साध-संगत तन-मन-धन से कर रही है। भाव पूज्य गुरु जी की पावन प्रेरणाओं पर चलते हुए डेरा सच्चा सौदा व साध-संगत तन-मन-धन से नेकी-भलाई के इन कार्यों में लगे हुए हैं। पूज्य गुरु जी के मानवता भलाई के इन कार्यों की विदेशों में भी धूम है। भूखे को भोजन, प्यासों को पानी, गरीब-बीमारों को डॉक्टरी सहायता (मुफ्त ईलाज करवाना), बेघरों को पूरे-पूरे घर (मकान) बनाकर देना, जरूरतमंदों के लिए रक्तदान करना, लोगों के नशे छुड़वाना इत्यादि सभी 159 मानवता भलाई कार्यों में साध-संगत, अपने पूज्य सतगुरु के वचनों पर चलते हुए लगी हुई है।

महा-कल्याणकारी कार्य (अंधता निवारण कैंप):

पूज्य हजूर पिता जी ने अपने सच्चे मुर्शिदे-कामिल पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी महाराज को समर्पित याद-ए-मुर्शिद फ्री आई कैंपों की लड़ी 1992 से शुरू की है। पूज्य हजूर पिता जी की पावन प्रेरणा से हर साल 12 से 15 दिसम्बर तक ‘पूजनीय परमपिता शाह सतनाम जी याद-ए-मुर्शिद फ्री आई कैंप’ (अंधता निवारण कैंप) डेरा सच्चा सौदा में साल 1992 से निरंतर लगाए जा रहे हैं। यह पवित्र कार्य भी डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए 159 मानवता भलाई कार्यों में शामिल है।

इन अति परोपकारी कैंपों में जहां हर साल हजारों लोगों की आंखों की हर बीमारी की मुफ्त जांच की जाती है, वहीं जरूरतानुसार दवाईयां भी बिल्कुल मुफ्त दी जाती हैं। आॅप्रेशन योग्य सभी मरीजों के आॅप्रेशन डेरा सच्चा सौदा के शाह सतनाम जी स्पैशलिटी अस्पताल सरसा के अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त आॅप्रेशन थिएटरों में बिल्कुल फ्री में किए जाते हैं तथा अन्य भी हर तरह की सुविधाएं मरीजों को बिल्कुल फ्री (एनकें, दवाईयां, रहन-सहन व खान-पान आदि) मुहैया करवाई जाती हैं तथा मरीजों के साथ आए उनके हैल्परों को भी रहने, खाने-पीने की सुविधा दी जाती है।

सन् 1992 से हर साल डेरा सच्चा सौदा में आयोजित इन अति परोपकारी कैम्पों में आंखों के माहिर स्पेशलिस्ट व सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर साहिबान व हॉस्पिटल के पैरामेडिकल स्टाफ के मैम्बर अपनी प्रशंसायोग्य सेवाएं बिल्कुल मुफ्त प्रदान करते हैं। इस प्रकार सन् 1992 से वर्ष 2022 तक डेरा सच्चा सौदा में ऐसे 31 कैंपों का आयोजन किया जा चुका है। इन परोपकारी कैंपों के द्वारा इन सालों में अब तक 28115 आॅप्रेशन किए जा चुके हैं और उन्हें नई रोशनी मिली है। 13-14-15 दिसम्बर के यह पवित्र दिन डेरा सच्चा सौदा के इतिहास में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।

रूहानियत के सच्चे रहबर पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज को लख-लख सजदा जी।

याद-ए-मुर्शिद फ्री नेत्र जांच शिविर में हजारों लोगों को मिल चुकी है नई रोशनी

वर्ष आप्रेशन
1992 485
1993 590
1994 720
1995 840
1996 925
1997 960
1998 1050
1999 983
2000 1085
2001 1078
2002 646
2003 665
2004 1038
2005 1002
2006 753
2007 720
2008 1136
2009 1663
2010 1881
2011 1671
2012 1515
2013 2378
2014 1174
2015 996
2016 800
2017 140
2018 132
2019 267
2020 118
2021 287
2022 417
कुल 28115

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