आनन्दित मुद्रा में करें व्यायाम blissful posture
खाना, घूमना, हंसी-ठठ्ठा करना, खेलना व संगीत सुनना जितना मजेदार काम है, कसरत करना उतना ही बोरियत भरा। किंतु शरीर के गठन के लिए, बड़ी उम्र में होने वाली हड्डियों की टूट-फूट के बचाव के लिए, मांसपेशियों को लचीला बनाएं रखने के लिए और दिल के रोग, मधुमेह, उच्च रक्तचाप से बचाव के लिए व्यायाम करना अनिवार्य ही मान लिया गया है।
इन बीमारियों का इलाज करने वाले डॉक्टर भी दवा-पथ्य व परहेज के साथ-साथ व्यायाम या सैर को भी दवा में ही शामिल करते हैं। आजकल चूंकि भौतिक सुख-सुविधाएं ज्यादा हो गई हैं सभी काम बैठे-बैठे ही मशीनों का बटन दबा देने मात्र से संपादित होने लगे हैं। अत: शारीरिक श्रम खत्म ही हो गया है।
खाना व खुराक में ज्यादा अन्तर नहीं पड़ा है पर इस खाने को पचाने के लिए शरीर की चयापचय दर को बढ़ाने के लिए किया जाने वाला श्रम या शारीरिक हरकत बिल्कुल ही खत्म हो गई है। परिणामस्वरूप भोजन खाया तो विभिन्न प्रकार का जाता है व ज्यादा मिर्च मसालेदार व तला-भुना होने पर ज्यादा स्वाद भी देता है पर उसे पचाने का कोई उपक्रम न होने से उससे प्राप्त कैलोरी की खपत नहीं हो पाती। परिणाम होता है चर्बी का बढ़ना, उच्च रक्तचाप, आलस्य अंतत: दिल के रोग, मोटापा, मधुमेह, कब किस गंभीर रोग का शिकार हो जाए, नहीं कहा जा सकता।

इसी तरह सुबह सवेरे की सैर भी दुविधा पैदा करती है जब बिस्तर की गर्माहट व मीठी नींद त्याग कर उठना पड़ता है हालांकि वे लोग जो एक बार नींद का लोभ छोड़ कर सुबह की सैर का आनन्द ले लेते हैं, वे फिर नींद के मोहजाल में नहीं फंसते। पर यह एक बार का यत्न ही बड़ा कठिन है। वैसे यदि घर पर ही व्यायाम करने का नियम बना लिया जाए और व्यायाम को खेलकूद की तरह या तो मस्ती का साधन बना लिया जाए या फिर सामूहिक रूप से किया जाए तो इस हेतु खर्च किए पन्द्रह बीस मिनट पूरे दिन को प्रत्फुल्लता व उमंग से तो भरेंगे ही, पाचन भी ठीक रखेंगे। शरीर की चयापचय दर भी बढ़ाएंगे जिसके कारण भोजन से प्राप्त कैलोरी भस्म होती जाएंगी व शरीर में सुडौलता, गठाव व आकर्षण बढ़ेगा।
व्यायाम को रोचक बनाने के लिए तथा इसको मजबूरी या बोझ न मान आनन्ददायक क्रिया बनाने के लिए कुछ उपाय आजमाए जा सकते हैं:-
- व्यायाम के प्रेरक तत्वों को लेकर खुद से ही कुछ प्रश्न करें जैसे आप व्यायाम क्यों करना चाहते हैं? व्यायाम का परिणाम क्या होगा? इससे वजन घटेगा क्या? हृदय सशक्त होगा क्या? बड़ी उम्र में मांसपेशियों का खिंचाव दूर होगा क्या? हड्डी की टूट-फूट से बचाव हो पाएगा क्या? अब इन प्रश्नों के उत्तर चाहें तो अपने फैमिली डॉक्टर से पूछें, फिर सोचें कि यदि रोज पन्द्रह बीस मिनट डॉक्टर के निर्देश पर किए व्यायाम से ये तमाम लाभ होने वाले हैं तो व्यायाम क्यों न किया जाए?
- अब व्यायाम करने का निर्णय जब कर ही लिया है तो कोई ऐसा क्रिया-कलाप, अपनी रूचि या शौक सोचें जो पसन्द हो व जिसके द्वारा आप खुद को ही भुला पाते हों। कुछ लोगों को टीवी देखना पसन्द आता है तो कुछ संगीत के शौकीन होते हैं, कुछ को खेलों में रूचि होती है। यदि एक बोर काम को एक मनपसन्द काम की तरह किया जाए तो काम भी हो जाता है और मन भी अनमना नहीं होता।
- व्यायाम को भी संगीत या टीवी या किसी खेल से जोड़ दें तो समस्या बड़ी सरलता से हल हो जायेगी। काम भी हो जायेगा, मन भी लगा रहेगा व मन्तव्य भी सिद्घ हो जायेगा।
- एक 50 वर्षीय परिचिता जब व्यायाम करती है तो मोबाइल में भजन लगा लेती है। कब वह हाथ-पांव चलाती है व कब भजन समाप्त हो जाता है, न तो उन्हें पता चलता है, न ही थकावट या ऊब ही होती है। परिणाम यह है कि वे आज भी उतनी ही फुर्तीली हैं जितनी 10 बरस पहले थी, बल्कि उनका तो कहना है कि अगले दस बरस भी उनका कुछ बिगड़ने वाला नहीं है।
- आनन्द और स्फूर्ति का अनुभव करने के लिए व्यायाम करने का मन बना लेना ज्यादा सकारात्मक सोच है। व्यायाम का उद्देश्य वजन घटाना हो या न हो-वक्त के साथ व नियमित व्यायाम करने पर जब शरीर की समस्त चेष्टाएं सक्रिय होंगी, मांसपेशियां लचीली रहेंगी तो वजन घटेगा ही, चर्बी हटेगी व शरीर में सुडौलता आएगी ही, पर यदि यह सोचा जाए कि पन्द्रह दिन के व्यायाम से ही वजन कम हो जाएगा तो भूल है।
- नियमित व्यायाम करने पर खान-पान में भी कटौती करने की जरूरत नहीं है, बल्कि पाचन दुरूस्त होने पर भूख भी खुल कर लगेगी व ज्यादा खाया जाएगा, शरीर स्वस्थ व सुन्दर बनेगा तथा सभी पोषक तत्व भरपूर मिलेंगे।
- अपनी पसन्द का व्यायाम चुनना भी व्यायाम के लिए मन बनाना है। रस्सी कूदना, सीढ़ियां चढ़ना उतरना, पैदल चलना, बाजार या किसी के भी घर पैदल जाना, वाहन पर चढ़ना उतरना कई ऐसे उपाय हैं जो चलने फिरने को उकसाते हैं व पूरे बदन व टोनिंग करते हैं। गठिया व जकड़न से बचाव रखते हैं।
यदि अभी से बुढ़ापे को स्वस्थ व तन्दुरूस्त बना लेने का ख्याल ध्यान में रख लिया जाए व डॉक्टरी दवाओं से निजात पाने का सोच लिया जाए तो व्यायाम करना बड़ा सरल सहज लगेगा। एक व्यायाम से तमाम लाभ जब मिलते हों तो कितनी ही व्यस्तता हो, पन्द्रह- बीस मिनट आनन्द व स्फूर्ति के नाम पर भला कौन न निकालना चाहेगा? -मंजु

































































