खुशी को खुशी मिले,ऐसा कुछ करें
हम सभी खुश रहना चाहते हैं। कभी खुलकर, कभी चुपचाप, कभी किसी की आंखों में चमक बनकर तो कभी अपनी ही धड़कनों में हल्की सी मुस्कान की तरह। लेकिन जीवन की हड़बड़ाहट में अक्सर हम यह भूल जाते हैं कि खुशी खुद चलकर दरवाजे पर नहीं आती, उसे आमंत्रित करना पड़ता है, कभी अपने अंदर की शांति से, कभी किसी और के चेहरे की मुस्कान से और कई बार उन अनकहे गानों से जो दिल को बिना किसी धुन के भी गुनगुनाने पड़ते हैं।
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खुशी खोजने का नहीं, जागने का नाम है:
जिंदगी में कई लोग कहते हैं कि वह खुश नहीं हैं। लेकिन सच यह है कि खुशी गुम नहीं होती, बस सो जाती है। जिस तरह बरसाती मौसम में बादलों के पीछे सूरज छुप जाता है, पर होता वहीं है, ठीक उसी तरह हमारी खुशी भी हमारी थकान, तनाव, अपेक्षाओं और असंतोष के बादलों के पीछे छुप जाती है। खुशी जागती कब है? जब हम उसे अपनी उपस्थिति का अहसास कराते हैं, किसी पुराने दोस्त को अचानक फोन करके, किसी अजनबी की मदद कर के, अपने पौधे में नया पत्ता देखकर या फिर बस अपनी चाय का कप दोनों हाथों में थामकर एक लंबी सांस लेकर। खुशी अक्सर छोटी होती है, पर उसका प्रभाव बहुत बड़ा होता है।
स्वयं को छोटा मत समझिए, आप किसी की खुशी का स्रोत हैं:

एक सहकर्मी आपकी मुस्कान देखकर हर सुबह राहत की सांस लेता है। हम सब अंजाने में कई लोगों की खुशी का हिस्सा होते हैं। बस, हमें उस भूमिका को थोड़ी जागरूकता देनी होती है।
खुशी को खुशी देने का पहला तरीका है, किसी और के लिए रोशनी बनना, जब उन्हें अपने घर में अंधेरा लगे।
उन चीजों को समय दें, जो आपको समय देना चाहती है:
कभी-कभी खुशी बहुत साधारण रूप में हमारे पास आती है, एक किताब, एक गीत, एक फूल, एक दोस्त की हंसी या अपनी ही डायरी के पन्नों पर लिखी कुछ अधूरी बातें लेकर। लेकिन हम व्यस्तता का बहाना बनाकर उन्हें नज़रअंदाज कर देते हैं। ज़रा सोचिए, तीन साल से अधूरी पड़ी किताब, क्या सिर्फ एक किताब है? या फिर आपकी खोई हुई खुशी, जो भूल गई है कि आप उसे कब फिर छुएंगे? खुशी को खुशी दिलाना है तो उन चीजों में फिर से लौटिए, जिन्होंने कभी आपको अपनेपन से भरा था।
रिश्तों को सिर्फ निभाइए मत, उन्हें जी कर देखिए:
हमारे पास रिश्ते तो बहुत हैं, पर उनके लिए हमारे पास कितना समय है? आजकल लोग कहते हैं कि हमें प्यार चाहिए, लेकिन बिना मेहनत के। रिश्ते चाहिए, लेकिन बिना संवाद के। पर सच यह है कि रिश्ते खुशी के सबसे बड़े बगीचे हैं और बगीचे सिर्फ पानी देने से नहीं, लगाव, ध्यान और देखभाल से फूलते हैं। कभी अपनी माँ के पास पांच मिनट बैठ जाइए, कभी अपने पिता से उनकी पसंद का खाना पूछ लीजिए, कभी अपने दोस्त को बिना कारण गले लगा लीजिए और कभी अपने जीवनसाथी से कह दीजिए कि ‘मैं तुम्हें सुनना चाहता हूं।’ रिश्ते जितना हम से लेते नहीं, उससे ज्यादा हमें लौटाते हैं।
अपनी थकान को पहचानिए, उसे अपराध मत मानिए:
हमारी पीढ़ी की एक बड़ी समस्या यह है कि हम थकते हैं, पर मानते नहीं। तनाव महसूस करते हैं, पर बताते नहीं। आंसू आते हैं, पर गिरने नहीं देते। खुद को थोड़ा आराम दीजिए, आधा घंटा बिना मोबाइल के बैठकर एक धीमी चाय के साथ अपने दिल की धड़कनें सुनते हुए या फिर बस चुप रहकर, क्योंकि जो खुद से खुश नहीं है, वह औरों को खुशी कैसे देगा?
छोटी-छोटी सफलताओं को सलाम कीजिए:
हमारी नज़र हमेशा बड़ी सफलता पर टिकी होती है, बड़ी नौकरी, बड़ा घर, बड़ा नाम, पर खुशी? वह तो उन छोटी जीतों में छिपी होती है, जिन्हें हम पहचान ही नहीं पाते। आज आपने किसी को बुरा जवाब नहीं दिया। आज आपने किसी का मन रख लिया। आज आपने खुद को टाला नहीं। आज आपने किसी पुराने घाव को छेड़ा नहीं। यह छोटी-छोटी जीतें भी सलाम की हकदार हैं।
रात को सोते समय खुद को धन्यवाद कहिए:
यह एक अद्भुत अनुभव देता है। दिन भर के संघर्ष, दौड़भाग, रिश्तों की जिम्मेदारियाँ और खुद से होने वाली छोटी-छोटी नाराजगियां, इन सबके बीच भी आप जिए, खुद को संभालें, अपनी मुस्कान बचाए रखें। ऐसी रात को अपने दिल पर हाथ रखकर एक बार कहिए, धन्यवाद मेरे दोस्त, तुमने आज अच्छा काम किया। यह वाकई आपके भीतर सोई हुई खुशी की धड़कनों को फिर से जगाएगा।
किसी की उम्मीद बनें, खुद के भीतर रोशनी लौट आएगी:
कई लोग कहते हैं कि वे खुश नहीं हैं, क्योंकि कोई उन्हें समझता ही नहीं।
लेकिन कब तक हम बस चाहेंगे कि कोई और हमारी खुशी का कारण बने? कभी किसी और की उम्मीद बनकर तो देखिए। आपके भीतर अपने आप रोशनी लौट आएगी। किसी जरूरतमंद को बिना दिखावे के मदद कीजिए। किसी बुजुर्ग का हाल पूछ लीजिए। किसी बच्चे की नन्ही सी खुशी में शामिल हो जाइए। किसी परेशान व्यक्ति को पांच मिनट सुन लीजिए। खुशी को खुशी तब मिलती है, जब वह बांटी जाती है।
प्रकृति को अपनी दवा बनाइए:
प्रकृति एक अनकही दुआ की तरह है। वह बिना आवाज़ के भी हमें भर देती है। सुबह का सूरज, शाम की हल्की हवा, बारिश की बूंदें, पेड़ों का झुकना, पक्षियों का उड़ना, इन सब में खुशी का एक सूक्ष्म संगीत है, जो हमें बिना बताए भी सुनाई देता है, अगर हम सच में सुनना चाहें। हर दिन कम से कम पांच मिनट प्रकृति को दीजिए। आप देखेंगे कि मन धीरे-धीरे हल्का होने लगा है।
दिन में एक काम ऐसा करें, जिससे आपका मन मुस्कुराए:
यह काम बड़ा हो, ऐसा जरूरी नहीं है। बस दिल को हल्का करने वाला होना चाहिए। अपने बचपन की तस्वीर देखें, पसंदीदा गाना सुनें, किसी को धन्यवाद लिखें, अपने कमरे को थोड़ा-सा सजाएं, अपने लिए एक फूल खरीद लाएं, खुशी को खुशी दिलाने का यह सबसे कोमल तरीका है।
जीवन जितना कठिन है, उतना ही सुंदर भी:
हम सब रिसते घावों, टूटे सपनों, उलझी जिम्मेदारियों और अनसुनी इच्छाओं के साथ जीते हैं। हम सोचते हैं कि खुशी कहीं दूर है, पर असल में वह हमारे भीतर छुपी होती है। बस, उसे बाहर आने का मौका चाहिए। कभी जीवन को थामकर उससे कहिए कि मैं तुम्हें समझना चाहता हूं। जीवन शायद जवाब न दे, पर आपको अवश्य महसूस होगा कि उसने आपकी हथेलियों पर कुछ गर्माहट रख दी है।
खुशी मंजिल नहीं, आदत है:
खुशी को खुशी तब मिलती है, जब हम खुद से, अपने लोगों से, अपने हर दिन से और अपने छोटे-छोटे पलों से थोड़ा सा रिश्ता जोड़ लेते हैं।
जीवन हमेशा आसान नहीं होगा:
पर अगर हम चाहें तो हर कठिनाई के भीतर भी एक छोटी सी रोशनी ढूंढ सकते हैं। खुशी को खुशी देने का रास्ता बस यही है कि अपने जीवन को हल्के हाथों से थामना, अपनों को कोमलता से समझना और हर नए दिन का स्वागत एक खुले दिल से करना। -स्नेहा सिंह, नोएडा

































































