इन्सान का दिमाग 55 साल की उम्र में चलता है सबसे तेज
यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की नई स्टडी में दावा
कहते हैं कि इन्सान में युवावस्था के दौरान अधिक जोश और सोचने-समझने की शक्ति होती है। किंतु इन्सान की मध्य प्रौढ़ावस्था जीवन का अहम पड़ाव होता है। एक रिसर्च मेें सामने आया है कि इंसान का दिमाग असल में 55 से 60 साल की उम्र में अपने बेहतरीन परफॉर्मेंस पर पहुँचता है। जैसे उम्र बढ़ती है ब्रेन बेहतर परफॉर्म करता है।
दरअसल, यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया की नई स्टडी के मुताबिक, जवानी में हमारी सीखने और प्रतिक्रिया देने की गति तेज होती है, लेकिन 40 के बाद निर्णय और विश्लेषण की सटीकता बढ़ती है। 55 से 60 की उम्र में इंसान की मानसिक क्षमता अपने चरम पर होती है। यही वह दौर है जब तार्किकता, अनुभव और विवेक तीनों आपसी संतुलन स्थापित करते हैं। हालांकि 65 से 75 की उम्र में भावनात्मक स्थिरता बढ़ती है, 75 के बाद भी सही और गलत की पहचान बरकरार रहती है।

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सोते व उठते समय मोबाइल से रखें दूरी
अक्सर लोगों का दिन मोबाइल से शुरू होकर रात्रि उसी पर खत्म हो जाती है। आजकल तो मोबाइल हर चीज से महत्वपूर्ण हो गया है, तभी तो हर वक्त हाथ में फोन रहता है और इन्सान उसी में खोया रहता है। सुबह उठते ही सबसे पहले फोन को ही तलाशा जाता है और रात्रि को सोने के वक्त भी हाथ में फोन की स्क्रीन पर उंगलियाँ चल रही होती हैं। लेकिन मोबाइल का इतना इस्तेमाल सेहत के लिए बहुत ही नुकसानदेह साबित हो सकता है। एक रिसर्च बताती है कि सोने से पहले और उठने के बाद सबसे पहले फोन नहीं उठाना चाहिए, बल्कि ध्यान, प्रभु के नाम का सुमिरन करना चाहिए।
सुबह-शाम ध्यान के ये फायदे
यदि आप सुबह उठते ही सुमिरन के द्वारा दिन की शुरुआत करते हो तो आपका दिमाग तरोताजा महसूस करता है। रिसर्च बताती है कि जागने के बाद पहले 15 मिनट फोन की जगह मेडिटेशन करने वाले लोगों में तनाव के हार्मोन का स्तर दिनभर कम रहता है। वहीं दिन की शुरूआत स्क्रीन से करने वाले लोग औसतन 30 प्रतिशत अधिक तनावग्रस्त रहते हैं। रात को सोने से पहले मेडिटेशन करने से ब्लड प्रेशर और रेस्टिंग हार्ट रेट दोनों में गिरावट दर्ज होती है। इसके अलावा मेडिटेशन ब्रेन वेव्स को अल्फा स्टेट में लाता है, जो ड्रीमिंग और सेल रिपेयर के लिए बेहद आवश्यक है।
हर इन्सान को सतगुरु-परमात्मा का ध्यान करना चाहिए, सुमिरन करना चाहिए। आप उम्र के किसी भी पड़ाव पर हों, सुमिरन करने से आत्मबल मिलता है और आत्मबल से हर अच्छे-नेक कार्य में सफलता अवश्य मिलती है। बच्चे सुमिरन करके पढ़ाई करें, तो पढ़ाई में मन लगता है और पेपरों में अच्छे नम्बर आते हैं। कोई बिजनेस, व्यापार, नौकरी-पेशा है, तो सुमिरन करके अपना दिन शुरु करे, तो सफलता मिलती है और बुजुर्ग लोग तो अपना काम-धंधा अपने बच्चों को सौंप कर लगातार सुमिरन, सेवा की राह पर चलें, तो खुद को भी फायदा होता है और पीछे घर-परिवार में भी खुशियाँ बनी रहती हैं।
-पूज्य गुरु संत डॉ. एमएसजी


































































