बेटा! इसका आॅप्रेशन हो गया’ -सत्संगियों के अनुभव -पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपार रहमत
बहन इंद्रो देवी इन्सां पत्नी सचखंडवासी जय राम इन्सां गांव झुट्टी खेड़ा, तहसील डबवाली, जिला सरसा। बहन जी पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपने पर हुई रहमत का वर्णन करते हुए बताती है-
सन् 2007-08 की बात है। उस समय शाह सतनाम जी स्पैशलिटी अस्पताल की नई बिल्डिंग का निर्माण कार्य जोरों पर चल रहा था। उन्हीं दिनों मेरी रीढ़ की हड्डी पर नकसूर फोड़ा निकला हुआ था। इसके इलाज के लिए मैंने देशी व अंग्रेजी दवाइयाँ भी बहुत ली और ले भी रही थी परंतु मुझे ज़रा भी फायदा नहीं हुआ था। डॉक्टरों का कहना था कि इसका इलाज केवल आॅप्रेशन ही है। मैंने एक बहुत ही पुराने बुजुर्ग वैद्य से भी तथा सरकारी अस्पताल के एक माहिर डॉक्टर से भी परामर्श लिया। उन सबका यही कहना था कि आॅप्रेशन के बिना इसका कोई इलाज नहीं है।
लेकिन मुझे आॅप्रेशन करवाने से बहुत डर लगता था। इसलिए मैं अपने सतगुरु पूज्य हजूर पिता जी से यही दिन-रात प्रार्थना करती रही कि पिता जी, मुझे आपजी ने ही ठीक करना है। मैंने आॅप्रेशन नहीं करवाना है जी। उन दिनों में मुझे एक सेवादार बहन ने परामर्श दिया कि बहन जी, सरसा दरबार के अस्पताल में कुछ नए कमरे बन रहे हैं, तो तुम अस्पताल में जाकर एक हफ्ता सेवा करो। मालिक सतगुरु सब ठीक करेगा।
मैं अपने ब्लॉक दारेवाला की संगत के साथ सरसा दरबार में पहुँच गई। मैंने अस्पताल में सेवादार बहनों के साथ साफ-सफाई की सेवा करनी शुरु कर दी। वह सेवा का पांचवां दिन था। लंगर खाने के बाद दोपहर के समय मैं कुछ समय के लिए लेटकर आराम कर रही थी तो वहीं मुझे नींद आ गई। तभी नींद के दौरान मैंने एक बहुत ही सुंदर सपना देखा। सपने में मैंने देखा कि पूज्य गुरु जी मेरे सामने आ गए। पूज्य पिता जी के एक हाथ में रूई थी, जिस पर ब्लड के धब्बे थे।
मैंने पूज्य पिता जी से पूछा कि पिता जी, यह क्या है! पूज्य पिता जी ने अपने पवित्र मुखारबिंद से फरमाया- ‘बेटा, इसका आॅप्रेशन हो गया और यह ठीक हो गया।’ इतने में साथ वाली बहनों ने आवाज़ लगाई कि चाय पी लो और सभी बहनें सेवा में लग जाओ। तब मैं उठकर बैठ गई। उस समय मुझे इतनी खुशी हुई कि मैं वर्णन नहीं कर सकती। वाकई मेरे फोडेÞ का आॅप्रेशन हो गया था। पर हैरानी की बात यह थी कि न तो वहां पर कोई निशान था और न ही कोई जख्म था।
ऐसा आॅप्रेशन कोई डॉक्टर तो कर ही नहीं सकता जिससे कि शरीर पर कोई चीर-फाड़ न हुई हो। परंतु मेरे सतगुरु प्यारे ने उस सपने में जो दिखाया और जो उन्होंने फरमाया था कि बेटा, इसका आप्रेशन तो हो गया है और यह ठीक हो गया। तो वाकई रीढ़ की हड्डी पर उस फोड़े वाली तकलीफ अब तक गायब हो चुकी थी। सच में ही सतगुरु सेवा का मेवा हाथों-हाथ देता है। मेरी तो सभी भाई-बहनों से यही प्रार्थना है कि सभी सेवा में आएं और हाथों-हाथ फल लें।
मेरी अपने सतगुरु दाता पूज्य पिता डॉ. एमएसजी से यही अरदास है कि सेवा-सुमिरन का बल बख्शना जी तथा अपनी दया-मेहर इसी तरह बनाए रखना, अपना दृढ़-विश्वास बख्शना जी।
































































