Overthinking

ओवरथिकिंग से खराब होती सेहत

धर्मों के कहा गया है कि चिंता चिता के समान है। मतलब कि चिंता में डूबा व्यक्ति किसी मृत व्यक्ति की जलती चिता के समान जलता रहता है। वहीं दूसरी तरफ चिंता करना, किसी बात के बारे में ज्यादा सोचना स्वास्थ्य की दृष्टि से भी खतरनाक है। एक्सपर्ट्स की मानें तो ज्यादा सोचना, मतलब ओवरथिकिंग करना आपकी पाचन शक्ति को खराब करता है, जिससे एसिडिटी, कभी गैस, कभी पेट दर्द तो कभी भूख न लगना ये समस्याएं आज के समय में बहुत आम हो गई हैं।

मेडिकल साइंस और आयुर्वेद दोनों मानते हैं कि दिमाग और पेट का रिश्ता बहुत गहरा है, इसे ही ब्रेन-गट कनेक्शन कहा जाता है। इसका मतलब है कि हमारा दिमाग और पाचन तंत्र लगातार एक-दूसरे से संवाद करते रहते हैं। जब हम शांत रहते हैं, तो पाचन प्रक्रिया सामान्य रहती है, लेकिन जैसे ही हम जरूरत से ज्यादा सोचने लगते हैं, यह संतुलन बिगड़ने लगता है।

आज के समय में ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचना लगभग हर व्यक्ति की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। छोटी-सी बात हो या बड़ा फैसला, दिमाग बार-बार उसी पर अटक जाता है। अक्सर आपने देखा होगा कि परीक्षा, इंटरव्यू, आॅफिस प्रेजेंटेशन या किसी इमोशनल टेंशन के दौरान पेट में गड़बड़ी होने लगती है।

कुछ लोगों को बार-बार टॉयलेट जाना पड़ता है, तो कुछ का पेट बिलकुल जकड़ जाता है। यह सब ओवरथिकिंग के कारण होता है। दरअसल ज्यादा सोचने पर शरीर में कॉर्टिसोल और एड्रेनालाईन जैसे स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होते हैं। ये हार्मोन शरीर को खतरे से निपटने के लिए तैयार करते हैं, लेकिन पाचन को प्राथमिकता नहीं देते।

पाचन पर ओवरथिंकिंग का असर:

ओवरथिंकिंग और मानसिक तनाव का असर सिर्फ पेट के मूवमेंट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह गट बैक्टीरिया को भी प्रभावित करता है। आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया पाचन और इम्यूनिटी के लिए बेहद जरूरी होते हैं। लंबे समय तक तनाव में रहने से इन बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ सकता है, जिससे पाचन कमजोर हो जाता है, इम्यूनिटी पर असर पड़ता है और पेट से जुड़ी समस्याएं बार-बार होने लगती हैं।

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ब्लड फ्लो पर असल:

तनाव की स्थिति में शरीर फाइट या फ्लाइट मोड में चला जाता है, जिससे दिमाग और मांसपेशियों को ज्यादा खून मिलने लगता है तथा पेट और आंतों को कम, इससे पाचन क्रिया कमजोर हो जाती है और भारीपन महसूस होता है।

नींद पर असर:

ओवरथिंकिंग करने वाले लोग अक्सर देर तक जागते रहते हैं और नींद पूरी नहीं ले पाते। नींद की कमी से पाचन एंजाइम्स का बैलेंस बिगड़ता है, जिससे अगला दिन पेट के लिए और भी मुश्किल हो जाता है।

ओवरथिंकिंग क्या होती है?

ओवरथिंकिंग, ज्यादा सोचना यानी किसी बात को बार-बार दिमाग में दोहराना, भविष्य की चिंता करना, हर स्थिति के नेगेटिव पहलू पर फोकस करना। ऐसे लोग जल्दी तनाव में आ जाते हैं, मन कभी शांत नहीं रहता, दिमाग लगातार एक्टिव मोड में रहता है। ओवरथिंकिंग वह स्थिति है, जिसमें व्यक्ति किसी बात पर जरूरत से ज्यादा और बार-बार सोचता रहता है, जिससे मानसिक तनाव बढ़ता है।

पाचन सुधारने के लिए सोच पर कैसे लगाएं लगाम:

  • मेडिटेशन व योगा को दिनचर्या में शामिल करें।
  • खाना खाते समय मोबाइल और टेंशन से दूर रहें।
  • रोज 10-15 मिनट गहरी सांस या ध्यान करें।
  • हल्की एक्सरसाइज या सुबह की सैर को नियमित अपनाएं।
  • समय पर सोने की आदत डालें और गहरी नींद लें।
  • बहुत मसालेदार और तला-भुना भोजन कम करें।
  • अपनी चिंता किसी से शेयर करना सीखें।

डॉक्टर से कब मिलें:

अगर ओवरथिंकिंग के साथ पेट की समस्या लंबे समय तक बनी रहे, वजन तेजी से घटे, लगातार उल्टी, खून आना या तेज दर्द हो, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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