World Cancer Day हर फिक्र को धुएँ में उड़ाया तो कैंसर रोग लगा बैठोगे
कैंसर रोगी के जीवन में अनेक तरह की भावनाएं इकट्ठी हो जाती हैं। इनमें पीड़ा, शोक, इलाज, दृढ़ता, प्रेम के साथ और भी बहुत कुछ। अगर कैंसर पीड़ित व्यक्ति उपचार के साथ खुद के ठीक होने के प्रति आश्वस्त और सकारात्मक रहे तो भी उपचार में काफी सफलता मिल सकती है।
मैं जिन्दगी का साथ निभाता चला गया, हर फिक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया…। ‘हम दोनों’ फिल्म के इस गीत के बोल-जिन्दगी का साथ निभाना तक तो सही है, लेकिन फिक्र को धुएँ में उड़ाना सही नहीं। अगर ऐसा किया तो यह हमारे जीवन के लिए सही नहीं होगा। फिक्र को धुएँ में उड़ाया तो हम कैंसर का रोग लगा बैठेंगे। इस जानलेवा बीमारी को न्यौता दे बैठेंगे। इसलिए तंबाकू के सेवन से दूर रहें। अगर सेवन करते हैं तो इससे जल्द ही तौबा कर दें।

कैंसर एवं लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. एस.पी. भनोट कहते हैं कि कैंसर होने के अनेक कारण हैं और लाखों लोगों के जीवन को यह बीमारी प्रभावित करती है। समाज के स्तर पर हम देखें तो कैंसर सिर्फ एक चिकित्सीय निदान से कहीं अधिक व्यक्तिगत मामला है। कैंसर रोगी के जीवन में अनेक तरह की भावनाएं इकट्ठी हो जाती हैं। इनमें पीड़ा, शोक, इलाज, दृढ़ता, प्रेम के साथ और भी बहुत कुछ। अगर कैंसर पीड़ित व्यक्ति उपचार के साथ खुद के ठीक होने के प्रति आश्वस्त और सकारात्मक रहे तो भी उपचार में काफी सफलता मिल सकती है। उनका कहना है कि कैंसर से लड़ने के लिए अच्छी मेंटल हेल्थ जरूरी है। मरीज को कई सर्जरी, कॉम्प्लीकेशंस, कीमोथेरेपी, रेडिएशन से गुज़रना पड़ता है। इसलिए मजबूत लोग इसे बेहतर तरीके से लेते हैं।
डा. भनोट के अनुसार, विश्व कैंसर दिवस का महत्व इसलिए जरूरी हो जाता है कि यह एक ऐसी बीमारी है जो दुनिया में लाखों लोगों की जान ले रही है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़े देखें तो कैंसर दुनिया में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। इस बीमारी के कारण हर साल लाखों लोगों का जीवन खत्म हो जाता है। यह भी हकीकत है कि कैंसर के रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञ इसके पीछे के कई कारण मानते हैं।
हमारा लाईफस्टाइल भी काफी बदल गया है। इसके साथ ही प्रदूषण, तंबाकू, शराब, अनहेल्दी खाना और शारीरिक अभ्यास की कमी भी कैंसर के लिए जिम्मेदार है। कैंसर अगर शुरूआत स्टेज में पकड़ में आ जाए तो रोगी के ठीक होने की संभावना काफी होती है। इसलिए चिकित्सक कैंसर के प्रति जागरुकता बढ़ाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं।
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कैंसर से बचने के लिए क्या करें और क्या ना करें:
डॉ. एस.पी. भनोट ने कैंसर से बचाव करने के लिए कुछ जरूरी सावधानी और खान-पान पर ध्यान देने की बात कही। उनका कहना है कि अगर आपको कैंसर से बचना है तो तंबाकू और शराब का सेवन ना करें, क्योंकि यह कैंसर के प्रमुख कारणों में से एक है। इनसे दूर रहकर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- खुद को स्वस्थ और फिट रखने के लिए फल, सब्जियाँ, साबुत अनाज खाकर भरपूर आहार लें।
- शारीरिक रूप से भी फिट रहना जरूरी है। इसके लिए अपनी फिजिकल एक्टिविटी को बढ़ाएं। नियमित तौर पर व्यायाम करके कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं।
- नियमित रूप से अपनी स्वास्थ्य जांच भी करवाते रहना चाहिए। वे लोग जांच जरूर कराएं, जिनके परिवार में कैंसर का इतिहास हो यानि जिनके परिवार में कोई कैंसर से ग्रसित रहा हो।
- कैंसर पीड़ित को सूर्य की किरणों से खुद का बचाव करना चाहिए।
- स्किन कैंसर से बचने के लिए धूप में निकलना जरूरी हो तो सनस्क्रीन का इस्तेमाल जरूर करें।
- हर रोज आधा घंटा सुबह, आधा घंटा शाम को प्रभु के नाम का सुमिरन जरूर करें।
पेरिस में हुई थी कैंसर दिवस की शुरूआत:
विश्व कैंसर दिवस मनाने की शुरूआत 4 फरवरी 2000 को पेरिस में आयोजित नव सहस्राब्दी के लिए कैंसर के खिलाफ विश्व कैंसर शिखर सम्मेलन में की गई थी। कैंसर के खिलाफ पेरिस चार्टर को अनुसंधान को बढ़ावा देने, कैंसर की रोकथाम करने, रोगी सेवाओं में सुधार करने के लिए बनाया गया था। कैंसर एक महत्वपूर्ण आर्थिक और सामाजिक बोझ भी है। विशेष रूप से निम्न और मध्यम आय वाले देशों में जहाँ कैंसर से अधिकांश मौतें होती हैं। सामाजिक और आर्थिक असमानता को दूर करने और सतत् विकास हासिल करने के लिए इस बोझ को कम करना भी जरूरी है।
जागरुकता बढ़ानी होगी:
विश्व कैंसर दिवस का उद्देश्य कैंसर के बारे में जागरुकता बढ़ाना, इसकी रोकथाम, रोग की शीघ्र पहचान तथा उपचार को बढ़ावा देना है। यह दिन अंतर्राष्ट्रीय कैंसर नियंत्रण संघ (यूआईसीसी) के नेतृत्व में मनाया जाता है। यह दिन हमें कैंसर के खिलाफ लड़ाई में एकजुट होने और व्यक्तियों, समुदायों, सरकारों को रोकथाम और बेहतर देखभाल के लिए प्रेरित भी करता है। इस विश्व कैंसर दिवस पर आपको बता दें कि विश्व कैंसर दिवस अभियान 2025-27 यूनाइटेड बाय यूनिक लोगों को देखभाल के केंद्र में रखते हुए बदलाव लाने के नए तौर-तरीकों की खोज कर रहा है। जागरुकता बढ़ाने पर भी यह काम कर रहा है।
कैंसर से जुड़ा हर अनुभव हमें कुछ ना कुछ सिखाता है। कैंसर किसी को भी हो सकता है। ऐसे में जरूरी है कि हम सब एकजुट होकर एक ऐसी दुनिया बनाएं, जहाँ हम बीमारी से दूर जाकर रोग से पहले व्यक्ति को महत्वपूर्ण मानें।

































































