Happy Holi: सद्गुणी रंगों से रंग लें जीवन
भारत में तीज त्योहारों का अत्यधिक महत्व है। इसमें चार प्रमुख त्योहार माने गए हैं। फाल्गुन माह में आने वाला होली पर्व भी उन्हीं में से एक है, जिसे एकता, आनंद और परंपराओं के भव्य उत्सव के रूप में लोग मनाते हैं। होली सबसे आनंदमय त्योहारों में से एक है, यही होली सभी के हृदय को उल्लास से भर देती है और गलियों को रंगों से सजा देती है। साथ ही इन रंगों की मस्ती और उल्लासपूर्ण उत्सवों के पीछे एक गहरा आध्यात्मिक संदेश छिपा है, एक ऐसा संदेश जो हमारे जीवन को बदलने की शक्ति रखता है।
होली सिर्फ रंगों से खेलने से ही संबंधित नहीं है, बल्कि हमारे जीवन को सद्गुणों से रंगने के बारे में भी है। यह पर्व सिर्फ होलिका दहन के बारे में ही नहीं, बल्कि हमारे भीतर की बुराइयों को जलाने के बारे में भी है। आइए, होली के गहरे आध्यात्मिक महत्व को समझें कि हम कैसे इस पर्व को इसके सबसे शुद्ध रूप में मना सकते हैं।
होली दो दिनों तक मनाई जाती है। छोटी होली (होलिका दहन) और धुलंडी। छोटी होली की रात होलिका दहन किया जाता है, जो अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है। यह परंपरा राजा हिरण्यकश्यप और उनके पुत्र प्रह्लाद की कथा से जुड़ी हुई है। राजा हिरण्यकश्यप, अहंकार में अंधा हो गया था और अपने पुत्र प्रहलाद की विष्णु देवता के प्रति अटूट भक्ति को समाप्त करना चाहता था। उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठे, क्योंकि उसके पास एक ऐसा वस्त्र था जो उसे आग में जलने से बचाता था।

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होली के सच्चे रंग:
होली के दिन हम रंग लगाने, हँसी और उल्लास में डूब जाते हैं। लेकिन इन बाहरी रंगों से भी गहरा एक आध्यात्मिक अर्थ है कि परमात्मा हमारी आत्मा को गुणों के रंगों से रंगते हैं।
- शांति का रंग: जैसे नीला आकाश सबको शीतलता देता है, वैसे ही परमात्मा का ज्ञान हमें गहन शांति से भर देता है।
- सुख का रंग: ईश्वरीय स्मृति हर दु:ख को मिटाकर जीवन को आनंद से भर देती है। जब हमारा मन परमात्मा से जुड़ता है वही सच्चा उत्सव है।
- शक्ति का रंग: वास्तविक शक्ति आंतरिक पवित्रता से आती है। जब हम कमजोरियों को जलाते हैं, तो हम औरों को भी सशक्त बना सकते हैं।
- प्रेम का रंग: सच्चा प्रेम शर्तों और अपेक्षाओं से मुक्त होता है। जब हम परमात्मा से जुड़ते हैं, तो हमारा प्रेम नि:स्वार्थ और दिव्य बन जाता है।
होली केवल बाहरी रंग लगाने का पर्व नहीं है, बल्कि आध्यात्मिक रंगों में रंगने का भी अवसर है। परमात्मा हमें सिखाते हैं कि सच्चे रंग वे हैं, जो आत्मा को शांति, प्रेम, आनंद और पवित्रता से भर दें। आइए, इस साल सच्चे अर्थों में होली मनाएँ। ऐसी होली जो हमारे जीवन में सच्ची खुशी, पवित्रता और एकता लाए, क्योंकि अंत में हमारे चेहरों के रंग फीके पड़ जाएँगे, लेकिन सद्गुणों के रंग हमेशा बने रहेंगे।
यूँ छुड़ाएं होली के रंग
- होली खेलने से पहले ही अगर अपने चेहरे एवं हाथ-पैरों पर कोई कोल्ड क्र ीम अथवा सरसों या नारियल का तेल अच्छी तरह मल लें तो किसी भी प्रकार का रंग आसानी से निकल जाएगा और रंगों में मिले हानिकारक रसायनों से भी त्वचा सुरक्षित रहेगी।
- शरीर का रंग छुड़ाने से पहले क्लीजिंग-मिल्क से त्वचा को साफ कर लें।
- बालों में कोई भी हेयर आयल अच्छी तरह से लगा लें ताकि रंग छुड़ाने में सुविधा रहे। होली खेलने के बाद बालों को शैम्पू करके रंग निकाल दें।
- रंग निकालने के लिए ठंडे पानी का प्रयोग करें। गर्म पानी का प्रयोग न करें क्योंकि गर्म पानी के संपर्क में आकर रंग और पक्के हो जाते हैं और आसानी से नहीं छूटते।
- रंग निकालने के लिए उबटन का प्रयोग भी सुरक्षित रहता है। एक चम्मच बेसन या आटे में एक चम्मच तेल के अनुपात में उबटन बनाकर इसे रंग लगे स्थानों पर लगाएं। यह क्रि या कई बार करने पर रंग पूरी तरह से छूट जाता है और चेहरे पर चमक आ जाती है।
- रंग निकालने के लिए किसी डिटर्जेंट की बजाय सिर्फ नहाने वाले साबुन का प्रयोग करें। साबुन के झाग को किसी कपड़े में लगाकर पोंछते जाएं ताकि रंग कपड़े पर उतरता जाए।
- यदि त्वचा पर सीधे रंग लगाया गया हो तो इसको हल्का करने के लिए पहले नींबू से रगड़कर साफ कर लें, तत्पश्चात आटे व तेल का उबटन लगाएं।
-रोशनी साहू
रंगों के त्योहार होली को इस तरह से मनाओ कि मन आप पर हावी न हो और आत्मा की आवाज़ बुलंदियों पर जा चढ़े। सेवा-सुमिरन को गहना बनाओ, दीनता-नम्रता को अपनी ज़िंदगी में लाज़मी अपनाओ। इस त्योहार का अपना ही अलग नज़ारा होता है, लेकिन इस दिन लोग नाजायज फायदा भी उठाते हैं, गलत हरकते करते हैं, गलत तरफ ध्यान जाता है। इन सबसे बचकर स्वस्थ होली खेलना ही सही होता है। होली पर जो रंग लगाते हो, वो कैमिकल फ्री होने चाहिए। होली वाले दिन कहीं पर गोबर डाला जाता है, कहीं पर काला तेल डाला जाता है, यह सही नहीं है। सभी धर्मों के त्योहार बुराई पे अच्छाई की जीत के प्रतीक होते हैं। इसलिए खुशी के इस त्योहार को स्वस्थ तरीके से खुशियों के साथ मनाना चाहिए। -पूज्य गुरु संत डॉ. एमएसजी































































