Rakhigarhi Indus Valley

सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा राखीगढ़ी -6 हजार साल पुराने प्राचीन स्थल के मिले पुरातात्विक साक्ष्य Rakhigarhi Indus Valley

हिसार जिले का गाँव राखीगढ़ी केवल हरियाणा या भारत ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के मानचित्र पर अपनी अनूठी पहचान बना रहा है। दिल्ली से लगभग 150 किलोमीटर और हिसार से करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा केंद्र है। अभी तक माना जाता था कि हड़प्पा सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल मोहनजोदड़ो है, लेकिन राखीगढ़ी इस धारणा को बदल रहा है।

राखी नारनौद तहसील के राखी खास और राखी शाहपुर गांवों के साथ-साथ आसपास के खेतों को मिलाकर करीब 550 हेक्टेयर क्षेत्र में पुरातात्विक साक्ष्य मिले हैं। यहाँ सात टीले (आरजीआर-1 से आरजीआर -7) हैं, जो मिलकर हड़प्पा सभ्यता की सबसे बड़ी बस्ती बनाते हैं।

रोचक खोज की कहानी:

1963 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने यहाँ पहली खुदाई की थी। सरस्वती नदी की खोज के दौरान मिले प्रमाणों ने राखीगढ़ी को हड़प्पा सभ्यता का अहम केंद्र घोषित कर दिया।

6000 साल पुराने कंकाल:

अब तक यहाँ से लगभग 56 मानव कंकाल मिले हैं। इनमें से अधिकांश की खोज प्रो. वसंत शिंदे ने की थी। टीला संख्या-7 से दो महिलाओं के करीब 7000 साल पुराने कंकाल मिले। इनका डीएनए अफगानिस्तान सहित भारतीय जनसंख्या से मिलता है।

Also Read:  नवजात शिशु की संभाल और सावधानियां

खुदाई का इतिहास:

  • 1963: पहली बार एएसआई द्वारा खुदाई
  • 1998-2001: डॉ. अमरेंद्र नाथ के नेतृत्व में खुदाई
  • 2013-2016: प्रो. वसंत शिंदे की देखरेख में खुदाई
  • 2022: एएसआई के संयुक्त महानिदेशक संजय कुमार मंजुल के नेतृत्व में खुदाई

मोहनजोदड़ो से भी बड़ा स्थल:

इतिहासकारों के अनुसार राखीगढ़ी की सभ्यता 5000-5500 ई.पू. की है, जबकि मोहनजोदड़ो का समय लगभग 4000 ई.पू. माना जाता है। मोहनजोदड़ो का क्षेत्र 300 हेक्टेयर है, जबकि राखीगढ़ी 550 हेक्टेयर से अधिक में फैला हुआ है। केंद्र सरकार ने इसे पाँच आदर्श पुरातत्व स्थलों में शामिल किया है और यहाँ 25 करोड़ रुपए की लागत से आधुनिक संग्रहालय भी बनाया गया है।

सभ्यता के विकसित जीवन के प्रमाण:

राखीगढ़ी से मिले साक्ष्यों से यहाँ नगर नियोजन, पक्की सड़कें, बहुमंजिला मकान, नालियाँ और कचरा निपटान व्यवस्था जैसी उन्नत जीवनशैली का पता चलता है।

मिली अनमोल धरोहर:

यहां से कांस्य और धातु की वस्तुएं, टेराकोटा की कलाकृतियाँ, मूर्तियाँ, शंख, सोने-चांदी व अर्ध-कीमती पत्थरों से बने आभूषण, कंघी, तांबे की सुइयाँ और अनाज के भंडार भी मिले हैं।

500 करोड़ से संवरेगा हड़प्पाकालीन शहर: सीएम

हरियाणा सरकार राखीगढ़ी के महत्ता को देखते हुए इसे अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन और शोध केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास कर रही है, जिसके लिए 500 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, ताकि इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल कराया जा सके।

26 दिसंबर को राखीगढ़ी में आयोजित ‘दूसरे राज्य स्तरीय राखीगढ़ी महोत्सव’ में पहुंचे मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ऐलान किया कि इस ऐतिहासिक स्थल को विकसित करने के लिए केंद्रीय बजट का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य राखीगढ़ी को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करना है। इस दौरान उन्होंने नवनिर्मित ‘हड़प्पा ज्ञान केंद्र’ का उद्घाटन करते हुए कहा कि राखीगढ़ी सिर्फ हरियाणा ही नहीं, बल्कि भारत की प्राचीनतम और गौरवशाली सभ्यता की साक्षी है। यहाँ 22 करोड़ रुपए की लागत से एक आधुनिक संग्रहालय तैयार किया गया है।

Also Read:  मच्छरों से छुटकारा पाने के कुदरती तरीके

सरकार राखीगढ़ी को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करवाने के लिए ठोस प्रयास कर रही है। एएसआई के अनुसार, हरियाणा में लगभग 100 ऐसे ऐतिहासिक स्थल हैं, जिनमें रोहतक का फरमाणा, भिवानी का मिताथल और फतेहाबाद का बनावाली प्रमुख हैं, जिनके संरक्षण पर काम चल रहा है।

सीएम ने बताया कि खुदाइयों से मिले अवशेष बताते हैं कि हजारों साल पहले राखीगढ़ी एक बड़ा औद्योगिक और व्यापारिक केंद्र था। यहाँ की नगर नियोजन, जल निकासी और स्वच्छता व्यवस्था आज की दुनिया के लिए भी एक मिसाल है। वहीं पर्यटन मंत्री अरविंद शर्मा ने घोषणा की कि इसे युवाओं और महिलाओं के लिए रोजगार का केंद्र बनाया जाएगा। साथ ही कॉलेज व विश्वविद्यालय के छात्रों को शोध कार्य हेतु यहाँ आमंत्रित किया जाएगा।