Millennium City

Millennium City मिलेनियम सिटी की शान कबाड़ से बनीं कलाकृतियाँ

मिलेनियम सिटी… गुरुग्राम को यह उपनाम मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर, तेजी से बढ़े कॉर्पोरेट सेक्टर और मल्टीनैशनल कंपनियों की मौजूदगी से मिला। विकसित होने के साथ-साथ पौराणिकता को भी इस शहर ने अपने आँचल में समेट कर रखा है। भले ही यह शहर आईटी हब के रूप में बड़ी पहचान रखता हो, लेकिन यहाँ पौराणिकता को भी बड़ा महत्व दिया जाता है। कबाड़ से कलाकृतियाँ यहाँ के पार्क व चौक-चौराहों पर स्थापित की गई हैं, जो हमें खास संदेश देती हैं।

गुरुग्राम में अगर आप भ्रमण करेंगें तो अनेक चौक-चौराहों पर वेस्ट टू वंडर यानि खराब, कबाड़ हुई वस्तुओं से कलाकृतियाँ नज़र आएंगीं। चौक-चौराहों के अलावा यहाँ एक ऐसा पार्क भी है, जहाँ पर दर्जनों कलाकृतियाँ स्थापित की गई हैं। उनसे सिर्फ मनोरंजन ही नहीं ज्ञान का वर्धन भी हो रहा है। शहर के पॉश क्षेत्र सेक्टर-14 में बने सुभाष चंद्र पार्क में ये वेस्ट टू वंडर कलाकृतियाँ लगाई गई हैं।

बात करें पार्क के मुख्य द्वार की तो इसे कबाड़ के लोहे से बड़े टायर, छोटे टायर, बाइक को दौड़ाता बाइकर, हवाई जहाज से भव्य बनाया गया है। पार्क में अंदर प्रवेश करते ही सामने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कबाड़ के लोहे से ही आदमकद प्रतिमा बनाई गई है। यह प्रतिमा भी एक तरह से जीवंत नज़र आती है। हरे-भरे पेड़ों के बीच यहाँ का नजारा खास दिखाई देता है।

पार्क में पक्के फाउंडेशन बनाकर उन पर कबाड़ से बनाई गई कलाकृतियों को स्थापित किया गया है। नेताजी की प्रतिमा के अलावा यहाँ अलग-अलग मॉडल के हवाई जहाज, पैरा गलाइडर, समुंद्री जहाज, मोटरसाइकिल, बड़ी-बड़ी साइकिल, रेल गाड़ी, गाड़ियाँ, मिसाइल, पुराने रेल के इंजन, पुरानी जेसीबी, टैंक आदि अनेक कलाकृतियाँ पार्क को पर्यटन केंद्र का हब दर्शा रही हैं।

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यानि यह पार्क सिर्फ सुबह-शाम भ्रमण करके ताजी हवा और हरियाली में खुद को तरोताजा रखने के साथ शिक्षाप्रद भी है। यहाँ घूमने के साथ इन कलाकृतियाँ का ज्ञान भी मिलता है। स्कूली बच्चों के यहाँ पर टूर भी लाए जाते हैं, ताकि बच्चों का मनोरंजन के साथ ज्ञानवर्धन भी हो सके। इन कलाकृतियों को बनाने में भूमिका निभाने वाले कलाकार नितेंद्र कुमार, मनोज कुमार का कहना है कि कबाड़ के लोहे से यह सब चीजें बनाई गई हैं। लोगों को पार्क में आकर कुछ अलग और नया दिखे, यही प्रयास किया गया है।

पार्क में आने का समय भी किया गया है तय

गुरुग्राम नगर निगम की ओर से पार्क का समय तय किया गया है, यह पार्क गर्मियों में एक अप्रैल से 30 अक्टूबर तक सुबह चार से 10 बजे तक और शाम को चार से 10 बजे तक खुलता है। दिन में यहाँ सफाई कर्मचारी व अन्य लोग रखरखाव का काम करते हैं। सर्दियों में पार्क के खुलने का समय एक नवंबर से 31 मार्च तक सुबह चार से 11 बजे तक और शाम को तीन बजे से नौ बजे तक का तय किया गया है।

चौक-चौराहों पर भी स्थापित हैं विशालकाय कलाकृतियाँ

पार्क के अलावा शहर के चौक-चौराहों पर भी मुँह बोलती कलाकृतियाँ स्थापित की गई हैं। इनसे शहर की सुंदरता में चार चांद लगे हैं। इफको चौक पर विशालकाय हरियाणवी ताऊ की लोहे के कबाड़ से बनी प्रतिमा है तो इससे थोड़ा आगे ही लोहे के कबाड़ से मधुमक्खी व शहद का छत्ता बनाया गया है। एमजी रोड गुरुग्राम-दिल्ली बॉर्डर पर बायोडायवर्सिटी पार्क के मेन गेट पर विशाल बाज बनाया है। फरीदाबाद रोड पर चौराहे पर हाथ पर बैठी तितली बनाकर और एक तरफ विशाल चिड़िया बनाकर तितली व चिड़ियों को बचाने का संदेश दिया गया है।

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मिलेनियम सिटी मेट्रो स्टेशन के सामने दोनों हाथों को जोड़कर नमस्ते करने की मुद्रा बनाई गई है। शहर में कई जगह पर विशेष कलाकृतियाँ भी स्थापित की गई हैं। राजीव चौक पर विशेष मैटीरियल से बनीं विशालकाय रथ पर अर्जुन को गीता का संदेश देते भगवान श्रीकृष्ण की भव्य प्रतिमा स्थापित है। इसी तरह से एसपीआर रोड पर महापुरुषों की प्रतिमाएं लगाई हैं।