Animal Health

Animal Health पशुओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है नई तूड़ी

मार्च महीने में अगेती गेहूँ पककर तैयार हो जाती है, वहीं अप्रैल में कटाई कार्य शुरु हो जाता है। हालांकि गेहूं की कटाई कम्बाइन से करवाने का चलन अब बढ़ चला है, लेकिन फिर भी काफी जगह गेहूं की हाथ से कटाई भी होती है। जैसे कि गेहूं कटाई होती है, साथ ही साथ गेहूं के अवशेष से तूड़ी बनाने का कार्य भी जोरों से शुरु हो जाता है। पशुपालकों को इस समय में थोड़ा सावधान रहने की जरूरत है, क्योंकि नए सीजन की तूड़ी आपके पशुओं को प्रभावित कर सकती है। यदि इस दौरान उचित सावधानी न बरती जाए तो न केवल आपके पशु का स्वास्थ्य खराब हो सकता है,

Animal Healthबल्कि उसकी जान तक भी जा सकती है। इसमें क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और तूड़ी का भंडारण किस तरह उचित ढंग से करना चाहिए, इन तमाम महत्वपूर्ण विषयों पर पशुपालन विभाग सरसा के पूर्व उपनिदेशक डॉ. विद्यासागर बंसल से विशेष बातचीत की गई। डॉ. बंसल ने पशु के बार-बार रिपीट होने, जैर न गिराने, सही तरीके से गर्भाधान करवाने, पशु की नियमित खुराक, गर्मी के मौसम में उचित देखरेख, टीकाकरण के प्रभाव व विभाग द्वारा पशुपालकों के हितार्थ चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं बारे भी काफी महत्वपूर्ण जानकारियां सांझा की।

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सवाल: नई तूड़ी से पशु में बंध पड़ने व अफारा की शिकायतें आती हैं। इसका कारण और उपचार क्या है ?

जवाब: नई तूड़ी को पशु जब ज्यादा खा जाता है तो उसमें बंध या अफारा की शिकायत आ जाती है। तूड़ी के साथ तीखे कण होते हैं वो पशु के पेट में चले जाते हैं जोकि अंदर जख्म भी कर देते हैं। इसके लिए बेहतर ये है कि पशु को खिलाने से पूर्व तूड़ी को हल्के से पानी से भिगो दें। इससे पूर्व उसे छान लेना बेहतर है। साथ में हरे चारे की मात्रा अधिक रखें। ऐसा करने से तूड़ी न केवल नरम पड़ जाएगी, बल्कि पशु को पचाने में भी ज्यादा ऊर्जा नहीं खर्चनी पड़ेगी। बंध के लक्षण दिखने पर पशुपालक अपने स्तर पर उपचार करने की बजाय पशु चिकित्सक से संपर्क करें। बंध ज्यादा समय रहने से पशु की मौत का खतरा बढ़ जाता है।

सवाल: तूड़ी का भंडारण किस तरह से करना चाहिए?

जवाब: तूड़ी का भंडारण एक तो खुष्क जगह करना चाहिए। जहाँ नीचे नमी हो या आसपास पानी का स्त्रोत हो वहाँ भंडारण करने से बचें। हो सके तो तूड़ी डालने से पूर्व नीचे पॉलीथीन बिछा दें। अक्सर देखा जाता है कि किसान जो खेती के लिए पेस्टीसाइड लेकर आते हैं उसका छिड़काव करने के बाद उसे तूड़ी में दबा देते हैं। ऐसे में कई बार दवा की शीशी में लीकेज भी हो जाती है। फिर वही तूड़ी पशु को खिला दी जाती है जिसके चलते कई बार पशु की मौत तक हो जाती है। कीटनाशकों को कभी भी तूड़ी में दबाकर नहीं रखना चाहिए। तूड़ी को नमी व बरसात से बचाकर रखना चाहिए। जब तूड़ी समाप्त होने वाली होती है तो कभी-कभी नीचे नमी वाली तूड़ी बच जाती है जिसमें फंगस आ जाती है। ये तूड़ी पशु में रोग का कारण बन जाती है।

सवाल: गर्म लू में दुधारू पशुओं की किस तरह से देखरेख करें?

जवाब: इस बार गर्म लू का अंदेशा काफी है। ऐसे में पशु विशेषकर दुधारू पशु पर ध्यान देने की आवश्यकता है। पशु को छायादार व खुली हवादार जगह पर रखें। पशु को दिन में कई बार पानी पिलाएं और नहलाएं भी। हो सके तो पानी में थोड़ा नमक मिलाकर पिलाएं। गर्मी की चपेट में आने से पशु दूध की मात्रा कम कर देता है, ऐसे में उसे खनिज तत्व दें।

सवाल: पशु में बार-बार रिपीट होने के क्या कारण हैं और इसके उपचार क्या हैं ?

जवाब: पशु में बार-बार रिपीट होने की समस्या लगभग सभी क्षेत्र में है। इसकी कुछ वजह तो हमारी अज्ञानता है। कारण है कि पशु की हम उचित ढंग से देखरेख नहीं करते। पशु के पैदा होने के बाद से उसकी उचित संभाल रखी जाए, समय-समय पर उसे कृमिनाशक दवा दी जाए व शुरू से ही खनिज लवण दिया जाए तो ये समस्या काफी हद तक हल हो जाती है। कई बार हम अप्रशिक्षित प्रेक्टिसनर से कृत्रिम गर्भाधान करवाते हैं तो जो एआई गन अंदर प्रवेश करवाई जाती है उससे बच्चादानी में जख्म हो जाते हैं। जिसके कारण भी रिपीट होने की दिक्कत आती है। ऐसी स्थिति में निपुण पशु चिकित्सक से इलाज करवाएं।

सवाल: प्राकृतिक व कृत्रिम गर्भाधान में क्या कोई अंतर है?

जवाब: कृत्रिम गर्भाधान की शुरूआत इसलिए हुई ताकि अच्छी नस्ल के बच्चे पैदा हो सकें। कई बार मेल पशु के चोट लग जाती है तो वह क्रॉस करने की स्थिति में नहीं होता। ऐसे पशु का सीमन लेकर हम काफी मात्रा में बच्चे पैदा कर सकते हैं। लेकिन मेल पशु का अच्छा रिकॉर्ड भी होना चाहिए। पशुपालन विभाग द्वारा उच्च क्वालिटी के सीमन अति कम शुल्क पर मुहैया करवाए जा रहे हैं।

सवाल: पशु के ब्याने के बाद अगर जैर नहीं गिरती तो क्या हाथ से निकलवाना सही है ?

जवाब: अमूमन पशु ब्याने के कुछ घंटों बाद ही जैर गिरा देता है। कई बार पशु निर्धारित समय में ऐसा नहीं करता तो 24 घंटे तक इंतजार अवश्य करें। फिर भी अगर जैर नहीं गिरती तो निपुण पशु चिकित्सक से पहले सलाह व इलाज अवश्य लें। अधिकतर केसों में हम पशु में दवाई वगैरा रख देते हैं जिससे जैर अपने आप ही निकल जाती है। याद रहे हाथ से जैर निकलवाना अंतिम विकल्प है। इस प्रक्रिया में सावधानी बरतें और पशु के गर्भ में हाथ डालते समय सफाई का विशेष ध्यान रखें। जरा सी भी लापरवाही पशु के लिए हानिकारक साबित हो सकती है। जैर अगर पशु के अंदर पड़ी है तो कोई दिक्कत नहीं, वो धीरे-धीरे अपने आप बाहर आ जाती है। लेकिन जब बाहर लटकती है तो पशु के बैठने पर जैर पर मिट्टी या गोबर वगैरा लग जाता है। फिर जब पशु खड़ा होता है तो जैर अंदर जाने पर गर्भ में संक्रमण हो जाता है।

सवाल: एक दुधारू पशु का नियमित आहार कैसा और कितना होना चाहिए ?

जवाब: पशु के आहार की मात्रा उसके शरीर के वजन पर निर्भर करती है। बच्चे, दुधारू पशु व गाभिन पशु की अलग-अलग खुराक होती है। ऐसा नहीं है कि अधिक आहार देने से पशु अधिक दूध देगा। हमें उचित आहार के साथ-साथ पशु चिकित्सकों से परामर्श लेकर पशु को खनिज लवण भी देते रहना चाहिए।

सवाल: क्या टीकाकारण से पशु की दुग्ध क्षमता व स्वास्थ्य पर कोई प्रभाव पड़ता है ? क्या इससे गर्भपात भी हो सकता है?

जवाब: विभाग की ओर से साल में 2 बार पशुओं का मुंहखुर व गलघोटू का नि:शुल्क टीकाकरण किया जाता है। हाँ, ऐसा होता है कि लोग पशुओं का टीकाकरण करवाने से बचते हैं। उनका कहना होता है कि पशु के दुग्ध उत्पादन पर असर पड़ेगा व गाभिन पशु का गर्भपात हो जाएगा। जहाँ तक गर्भपात का सवाल है विभाग इस पर पहले ही सजग है। बाकायदा हिदायत भी है कि अगर कोई पशु 7 माह से ऊपर का गाभिन है तो उसका टीकाकरण नहीं किया जाता। कई बार पशु में टीकाकरण से बुखार आ जाता है जिसकी वजह से वह खाना-पीना कम कर देता है जिससे दुग्ध उत्पादन पर कुछ असर पड़ जाता है। ऐसी स्थिति में चिकित्सीय परामर्श लेकर पशु को बुखार व भूख बढ़ाने की दवा दें। जिससे दुग्ध उत्पादन फिर से सामान्य हो जाएगा।

सवाल: नस्ल सुधार क्या है और इसकी पूरी प्रक्रिया क्या है?

जवाब: नस्ल सुधार एक निरंतर प्रक्रिया है। जब हम देसी गाय को मेल पशु का सीमन लगाते हैं तो प्रथम बार 50 प्रतिशत, दूसरी बार 75 प्रतिशत व तीसरी बार 87 प्रतिशत ऐसे एक निरंतर प्रक्रिया है। पशु जब पहली बार ब्याता है तो मान लो उसे बछड़ी हुई। बछड़ी जब गाभिन हुई तो उसको जब टीका लगाया जाता है तो तब वह 75 प्रतिशत बढ़ेगी। आगे उसकी बछड़ी को टीका लगाया जाता है तो फिर वह 87 प्रतिशत बढ़ेगी। ये एक अच्छी प्रक्रिया है। पशुपालक को चाहिए कि वह इंतजार भी करे। -राजू, ओढ़ां

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