exam

परीक्षा के लिए स्वयं को व्यवस्थित करें

परीक्षा का डर शायद बहुत पुराना डर है। विद्यार्थी परीक्षा के नाम से ही डरने लगते हैं। ऐसा ठीक नहीं है। यदि हम व्यवस्थित रूप से चलें तो परीक्षा कोई हऊआ नहीं। फाइनल एग्ज़ाम या बोर्ड एग्जाम साधारण लगेंगे पर बहुत कम बच्चे होते हैं जो आरम्भ से व्यवस्थित चलते हैं। अभी भी आप व्यवस्थित होकर अपनी परीक्षा को कुछ आसान तो बना सकते हैं।

समय योजना बनाएं:-

परीक्षा में कितने दिन बचे हैं और सलेबस कितना है, कितने विषय हैं, उसी अनुसार स्वयं को व्यवस्थित करें। यदि समय कम है तो एनसीईआरटी की किताबों से अपना सलेबस पूरा करें। एक्स्ट्रा किताबों की ओर से ध्यान हटा लें ताकि एक ही बुक से पूरी तैयारी कर सकें। आखिरी सप्ताह को रिवीज न सप्ताह रखें। पढ़ाई के लिए अधिक समय डिवोट करें। हर दिन आपके लिए महत्त्वपूर्ण है। इसका अच्छी तरह से लाभ उठाएं। हर दिन के लिए योजना बनाएं और अमल करें। आपको लगेगा कि आपकी योजना प्रभावपूर्ण रही है।

प्रभाव वाला समय:-

आप सोचें कि किस समय आप अच्छी तरह से याद कर सकते हैं। उस समय में मुश्किल विषय चुनें जब आपको लगे कि इस समय अधिक ध्यान देना मुश्किल है। उस समय आसान विषय देखें। इसलिए यह देखकर योजना बनाएं कि कौन सा समय ऊर्जावान है। उस समय उसका पूरा लाभ उठाएं। कम ऊर्जा के समय विषयों को दोहरा सकते हैं। अपनी क्षमता को देखते हुए उपलब्ध समय का पूरा लाभ उठाएं।

Also Read:  ...जब रूहानी स्पर्श से महक उठा सतपुरा धाम | डेरा सच्चा सौदा सतपुरा धाम करंडी, मानसा ( पंजाब )

सोच को सही दिशा दें:-

अपनी सोच सकारात्मक रखें। जो विषय मुश्किल लगें, उन्हें यह सोचकर मत छोड़ें कि मैं नहीं कर सकता। बाद में देख लूंगा। यह सोचें कि मैं कर सकता हूँ और उस काम को करने में लग जाएं। बार-बार स्वयं को याद दिलाएं कि मैं यह कर सकता हूँ।

चिंता दूर रखें:-

जो समय बीत चुका है उसके बारे में सोचकर समय नष्ट न करें। सोच के कीटाणु को अपने से दूर रखें। पढ़ाई करते समय बीच-बीच में गहरी सांस लें और धीरे-धीरे उसे छोड़ें, कुछ पल रूके। अपना भविष्य संवारने के लिए नई सोच पैदा करें।

एकाग्रचित रहें:-

जो विषय पढ़ें, एकाग्रचित्त होकर पढ़ें ताकि अधिक लाभ उठा सकें। रिवीजÞन हेतु कुछ प्वाइंट नोट कर लें और अंत में उन्हें दोहरा लें। जब आप एक विषय को पढ़ रहे हों तो उसी विषय पर सोचें। अन्य विषयों को भूल जाएं। एकाग्र मन से पढ़ने पर कम समय में अधिक पढ़ाई की जा सकती है। -नीतू गुप्ता