Experiences of Satsangis: बेटा, ऑपरेशन नहीं होगा!’’ -सत्संगियों के अनुभव -पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपार रहमत
बहन राज रानी इन्सां पत्नी प्रेमी गणेश कुमार इन्सां पुत्र श्री बचना राम, निवासी गाँव डिख, जिला भटिंडा (पंजाब) से पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपने पर हुई रहमत का वर्णन करती हैं:-
सन् 2016 की बात है। मेरे सिर में दर्द रहने लगा था। मैंने पहले गाँव से और फिर शहर के डॉक्टर से दवाई ली परंतु कोई आराम नहीं मिला। मैंने डेरा सच्चा सौदा सलाबतपुरा (पंजाब) में डॉ. शशिकांत को अपनी समस्या बताई। उन्होंने मुझे एमआरआई करवाने के लिए कहा।
मैंने 5 सितंबर को आदेश अस्पताल भटिंडा से एमआरआई करवाई, जिसमें दो गांठें आई, जो 27 व 16 एमएम की थी। वहाँ डॉक्टर ने मुझे दवाई तो दे दी परंतु यह भी कहा कि इनका आॅप्रेशन करवाना पड़ेगा। इसके बाद मैंने और भी कई बड़े-बड़े डॉक्टरों को वो रिपोर्ट दिखाई, तो सभी ने एक मत से कहा कि इनका ईलाज केवल आॅप्रेशन ही है।
मुझे अपने सतगुरु पर विश्वास था कि डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु जी की कृपा एवं दया-दृष्टि से लोगों की बीमारियाँ दूर हो जाती हैं। मैं भी डेरा सच्चा सौदा की श्रद्धालु हूँ, सेवा-सुमिरन करती हूँ। मेरी बीमारी क्यों नहीं टूटेगी! यह सोचकर मैं अपने पति के साथ डेरा सच्चा सौदा सरसा दरबार में पहुँच गई। वहाँ पर हम संबंधित डॉक्टर से मिले। डॉक्टर ने हमें सिटी स्कैन करवाने के लिए कहा।
रिपोर्ट देखकर डॉक्टर ने कहा कि पाँच दिन के अंदर-अंदर आॅप्रेशन करवा लो। एक गाँठ माथे पर दूसरी गाल पर निकल आई है। जब मेरे पति ने डॉक्टर से पूछा कि आप गारंटी देंगे कि ये ठीक हो जाएगी तो उन्होंने कहा कि इस आॅप्रेशन की कोई गारंटी नहीं है। जान जा सकती है या पागल भी हो सकती है। डॉक्टर ने हमें 23 सितंबर आॅप्रेशन की तारीख दे दी।
हम अस्पताल से डेरा सच्चा सौदा दरबार में आ गए। वहाँ पर हमने पूज्य हजूर पिता जी द्वारा बीमारों के लिए बख्शा प्रशाद ले लिया। प्रशाद के बारे में पूज्य हजूर पिता जी ने वचन फरमाए हुए हैं कि पहले आधा-पौना घंटा सुमिरन करके दवाई लेनी है। जो दृढ़ विश्वास करते हैं, नाम जपते हैं, उनके भयानक से भयानक रोग कट जाते हैं। मैंने ठीक इसी प्रकार आधा घंटा सुमिरन करने के बाद वह प्रशाद खाया और दवाई भी ली।
इसके बाद 19 सितंबर को हम वापिस अपने घर लौट आए। मेरे बच्चों ने मुझसे पूछा कि आप आॅप्रेशन करवा आए? मैंने उनको बताया कि हाँ पुत्र! मैं आॅप्रेशन करवा आई। मेरे पति कहने लगे कि ये वैसे ही पागलों की तरह बोल रही है। अभी आॅप्रेशन नहीं हुआ। उन्होंने मुझे दवाई लेने के लिए कहा तो मैंने कहा कि मैंने दवाई नहीं लेनी, मैं बिल्कुल ठीक हूँ। पिता जी ने मुझे ठीक कर दिया है।
वास्तव में बात यह थी कि एक रात को मैंने तड़प-तड़पकर व रो-रोकर पूज्य हजूर पिता जी से सुमिरन के दौरान अरदास की कि पिता जी, मैंने आॅप्रेशन नहीं करवाना, चाहे कुछ भी हो जाए। पिता जी आप मुझे बिना आॅप्रेशन के ठीक कर दो जी। सुमिरन के दौरान मुझे पिता जी ने दर्शन दिए और वचन फरमाए कि बेटा, आॅप्रेशन नहीं होगा।
मैंने अपने परिवार में कह दिया कि मैंने अब न तो आॅप्रेशन करवाना है, न ही दवाई लेनी है। मैं बिल्कुल ठीक हूँ। पिता जी ने मुझे ठीक कर दिया है। मेरे पति मुझे कहने लगे कि अगर तुझे कुछ हो गया तो रिश्तेदार मेरे को उलाहना देंगे कि तुमने इलाज नहीं करवाया। उनकी बातों को अनसुना करते हुए मैं अपनी बात पर पक्की रही और मैंने दवाई खाना बंद कर दिया परंतु घर वाले मेरी बात कहाँ मानने वाले थे! वे मुझे दवाई खाने और ऑपरेशन करवाने का जोर डालने लगे। तब फिर मैंने कहा कि मैंने एमआरआई दोबारा करवानी है।
हम 22 सितंबर को दोबारा आदेश अस्पताल भटिंडा में एमआरआई करवाने गए तो रिपोर्ट नेगेटिव आई। यह देख वहाँ सभी डॉक्टर्स हैरान रह गए कि रिपोर्ट कैसे बदल गई! वह भी बिना आप्रेशन के! मेरी खुशी का कोई ठिकाना न रहा। हम अगले दिन 23 सितंबर को गुरुगद्दी दिवस के भंडारे पर सरसा दरबार गए और वहाँ अस्पताल में डॉक्टर ने मेरी रिपोर्ट देखी, तो अचंभित होकर कहने लगे कि ये तो चमत्कार हो गया! इसके बाद 25 जनवरी 2017 के भंडारे से पहले 22 जनवरी को सरसा दरबार में पंजाब का सत्संग भंडारा था।
उस समय मैंने पूज्य हजूर पिता जी का धन्यवाद करने के लिए इस बीमारी से ठीक होने वाला चमत्कार पर्ची पर लिखकर भेजा तो पूज्य हजूर पिता जी ने फरमाया, ‘बेटा, तुम्हें दोबारा जन्म मिला है। इसमें अच्छे-भले कर्म करना। भगवान आपको तंदुरूस्त रखे, बहुत-बहुत आशीर्वाद!’ पूज्य पिता जी से मेरी यही अरदास है कि सेवा-सुमिरन का बल बख्शना जी तथा इसी तरह दया-मेहर बनाए रखना जी।




























































