Bitter gourd cultivation

Bitter gourd cultivation: करेले की खेती कर किसान कमा रहे मुनाफा

सब्जियों की खेती करने के लिए कई राज्य सरकारें किसानों को अनुदान भी उपलब्ध करा रही हैं। सब्जियों की खेती को प्रोत्साहित करने के मुख्य कारण ये हैं कि सब्जियों की फसल कम समय में तैयार हो जाती है जिसे बेचकर किसान जल्द पैसा प्राप्त कर सकता है। इसलिए किसानों को रबी की मुख्य फसलों के साथ ही सब्जियों की खेती के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है। ऐसी कई सब्जियां हैं जिनसे कम समय में अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है।

लेकिन इनमें से करेला एक खास ऐसी सब्जी है जो सदा बहार चलता है और भाव बाजार में भी काफी अच्छा मिल जाता है। किसान करेले की खेती से बहुत कम लागत में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं। माना जाता है कि एक एकड़ खेत में करेले की खेती करने पर लगभग 30 हजार रुपए तक की लागत आती है। जबकि मुनाफा करीब 3 लाख रुपए प्रति एकड़ तक होता है। इस तरह इसकी खेती लागत से 10 गुना तक कमाई दे सकती है।

करेले की खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देने वाली फसल है। समय पर देखभाल करें और उत्तम उत्पादन पाएं।

करेले की बुवाई के लिए उन्नत किस्में

करेले की बुवाई के लिए कई उन्नत किस्में उपलब्ध हैं। किसान अपने क्षेत्र के अनुसार इसका चयन कर सकते हैं। करेले की जो उन्नत किस्में ज्यादा प्रचलन में हैं उनमें कल्याणपुर बारहमासी, पूसा विशेष, हिसार सलेक्शन, कोयम्बटूर लौंग, अर्का हरित, पूसा हाइब्रिड-2, पूसा औषधि, पूसा दो मौसमी, पंजाब करेला-1, पंजाब-14, सोलन हरा और सोलन सफेद, प्रिया को-1, एस डी यू- 1, कल्याणपुर सोना, पूसा शंकर-1 आदि उन्नत किस्में शामिल हैं।Bitter gourd cultivation 1

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करेले की बुवाई का उचित समय

वैसे तो करेले की खेती बारह मास की जा सकती है। क्योंकि वैज्ञानिकों ने करेले की ऐसी हाईब्रिड किस्में विकसित कर दी हैं, जिससे आप करेले की खेती साल भर कर सकते हैं। इसकी बुवाई को हम तीन तरह से विभाजित कर सकते हैं। गर्मी के मौसम की फसल के लिए जनवरी से मार्च तक इसकी बुआई की जा सकती है। मैदानी इलाकों में बारिश के मौसम इसकी बुवाई अगस्त तक की जाती है। और तीसरे चरण में आप कभी भी अपनी सुविधा के अनुसार करेले की बुआई कर सकते हैं।

बेल को दें सहारा, फल रहेंगे सुरक्षित

करेला लत्ती यानि झाड़ के रूप में बढ़ता है। यदि इसे सहारा नहीं दिया जाए तो इससे सारी फसल खराब होने का डर रहता है। जब करेले का पौधा थोड़ा ही बड़ा हो जाए तो इसे लकड़ी, बांस, लोहे की छड़ आदि का सहारा देना चाहिए ताकि वे एक निश्चित दिशा में बढ़ सके।

करेले की खेती में सिंचाई की आवश्यकता

वैसे तो करेले की फसल में कम ही सिंचाई की जरूरत होती है, बस खेत में नमी बनी रहनी चाहिए। इसके लिए इसकी हल्की सिंचाई की जा सकती है। फूल व फल बनने की अवस्था में इसकी हल्की सिंचाई करनी चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि खेत में पानी का ठहराव नहीं होना चाहिए। इसलिए खेत में जल निकासी का प्रबंध जरूर करें ताकि फसल खराब न हो।

कब करें निराई-गुडाई

करेले की फसल के शुरूआती दौर में ही इसके पौधे के साथ ही कई अनावश्यक दूसरे पौधे उग आते हैैं। इसके लिए खेत की निराई-गुडाई करके इन खरपतवार वाले पौधों को हटा कर खेत से दूर फेंक देना चाहिए। शुरूआती दौर में खेत को खरपतवारों से मुक्त रखने पर करेले की अच्छी फसल प्राप्त होती है। -राजेश कुमार

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