अपने दिल की सुनें, उसे समझें -प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट तक तेज चलें, दौड़ें, साइक्लिंग करें या योग करें। इससे दिल मजबूत होता है और रक्तचाप नियंत्रित रहता है।
‘दिल तो है दिल, दिल का ऐतवार क्या कीजिए…!’ स्वर कोकिला लता मंगेशकर के गीत की यह पंक्तियां मानवीय स्वास्थ्य की कटु सच्चाई से भी रूबरू करवाती हैं क्योंकि यदि आपका दिल हृस्ट-पुष्ट है तो उसका एक मिनट में 72 बार धड़कना आवश्यक है। गर दिल की धड़कन गड़बड़ाई हुई है
तो उस पर एतबार मत करें, अन्यथा यह आपके जीवन पर भारी पड़ सकता है। स्वस्थ एवं सुखी जीवन के लिए एक स्वस्थ हृदय का होना नितांत जरूरीहै क्योंकि दिल हमारे शरीर का सबसे अहम अंग है जो एक पंप की तरह काम करता है और पूरे शरीर में खून और आॅक्सीजन पहुँचाता है।
अगर दिल ठीक से काम नहीं करता, तो हमारा शरीर सुचारू रूप से काम नहीं कर पाएगा। हालांकि कई बार लाइफस्टाइल और खानपान के कारण भी हृदय रोग का खतरा काफी बढ़ जाता है। विशेषज्ञोें का कहना है कि हार्ट रोगों का खतरा पहले बड़ी आयु के लोगों को माना जाता था, लेकिन आज कम उम्र के बच्चों में भी ऐसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों की मानें तो हर साल करीब 1 करोड़ 80 लाख लोग दिल से जुड़ी किसी न किसी समस्या से चलते मौत का शिकार हो जाते हैं।
सामान्य भाषा में हृदय स्पंदन (धड़कन) को महसूस किया जा सकता है। यह सामान्य अथवा असामान्य दोनों तरह की हो सकती है। सामान्य तौर पर जीवनकाल में कई बार धड़कन सामान्य तौर पर भी बढ़ती है, जैसा कि चिंताग्रस्त होने पर, अवसाद के समय, घबराहट होने पर, प्रेग्नेंसी के दौरान, अत्यधिक चाय/कॉफी के सेवन से तथा किसी भी तरह के उत्तेजक दवा/नशों के सेवन से। परिस्थितिवश बढ़ने वाली धड़कन कम समय के लिए बढ़ती है
एवं सामान्यत: स्वत: ही अथवा अंतर्निहित कारण के निवारण के साथ पुन: सामान्य हो सकती है। इस विश्व हृदय दिवस पर आओ संकल्प लें कि हम अपने दिल का ख्याल रखेंगे, नियमित व्यायाम करेंगे, सही खानपान अपनाएंगे और तनाव से दूर रहेंगे। इस छोटे से प्रयास से आप अपने दिल को मजबूत और सेहतमंद बना सकते हैं।
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शुरूआती लक्षणों को अनदेखा न करें
यदि आपको हमेशा थकावट महसूस होती है या फिर आप लगातार तनाव में रहते हैं और आपकी धड़कन अनियमित है? तो संभव है कि आप दिल की बीमारी के शुरूआती लक्षणों का सामना कर रहे हैं। आजकल, 40 साल से अधिक उम्र के बहुत से लोगों को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याएं आम देखने को मिलती हैं, जो हार्ट रोग का खतरा बढ़ाती हैं। यदि आपको ये लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत अपने नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
ये कारण हैं बड़े उत्तरदायी:-
अस्वास्थ्यकर कोलेस्ट्रॉल का स्तर, धूम्रपान, मोटापा, उच्च रक्तचाप, शारीरिक गतिविधि का अभाव, मधुमेह, तनाव, अवसाद और क्रोध, नींद की कमी, खराब आहार का सेवन, शराब का सेवन इत्यादि।
हृदय रोग से बचाव के उपाय
आजकल की भागदौड़ भरी ज़िंदगी, तनाव, गलत खानपान और कम शारीरिक सक्रियता के चलते हृदय रोगों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम अपने दिल की सेहत का ख्याल रखें, ताकि सेहतमंद जिंदगी जी सकें।
- संतुलित आहार लें: हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और कम वसा वाले डेयरी उत्पाद अपने आहार में शामिल करें। नमक, चीनी और सैचुरेटेड फैट की मात्रा कम रखें।
- तनाव कम करें: सुमिरन (मेडिटेशन)और योग का सहारा लेकर मानसिक शांति बनाए रखें। भजन या अच्छा म्यूजिक सुनें और नींद पूरी लें।
- धूम्रपान और शराब से बचें: अगर आप धूम्रपान और मद्यपान करते हैं, तो इसे जल्द से जल्द छोड़ें। धूम्रपान एवं मद्यपान न केवल आपके दिल बल्कि आपके पूरे शरीर के लिए हानिकारक है।
- नियमित स्वास्थ्य जांच कराएं: ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं। अगर कोई समस्या हो, तो डॉक्टर की सलाह अनुसार उपचार लें।






























































