Play chess: खेलें शतरंज दिमाग नहीं होगा बुजुर्ग
विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कहता है कि 60 पार की उम्र में हफ्ते में 150 मिनट दिमागी कसरत करनी चाहिए। इसमें शतरंज जैसे गेम बुजुर्गों के लिए दिमागी कसरत का बेहतरीन टॉनिक माना है।
बढ़ती उम्र, बुजुर्गावस्था जिंदगी की ऐसी अवस्था होती है, जहाँ शरीर, मन, दिमाग कमजोर हो जाता है। ऐसे में अवसाद, तनाव, चिड़चिड़ापन आपको घेर लेता है। ऐसे समय में याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक स्थिति को सक्रिय करने की बहुत जरूरत होती है।
इसके लिए यदि समय निकालकर कुछ समय शतरंज खेली जाए तो बुजुर्गों को काफी लाभ हो सकता है। न्यूरोसाइंटिस्ट और इससे जुड़ी कई रिसर्च के अनुसार, यदि रोज़ाना कुछ समय शतरंज जैसे गेम्स खेलें तो दिमाग को वैसी ही चुनौती मिलती है, जैसे शरीर को व्यायाम करने से मिलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन भी कहता है कि 60 पार की उम्र में हफ्ते में 150 मिनट दिमागी कसरत करनी चाहिए। इसमें शतरंज जैसे गेम बुजुर्गों के लिए दिमागी कसरत का बेहतरीन टॉनिक माना है।
डिमेंशिया को लेकर हुई रिसर्च में पाया गया है कि शतरंज खेलने से किसी भी समस्या का हल तेजी से ढूंढा जा सकता है। मोनाश यूनिवर्सिटी के स्कूल आॅफ पब्लिक हेल्थ और प्रिवेंटिव मेडिसिन में हुई ये रिसर्च जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित हुई। शोधकर्ताओं ने 70 साल से ज्यादा के 10318 आॅस्ट्रेलियन लोगों पर शोध किया जिनमें उन्होंने पाया कि मेंटल एक्टिविटीज जैसे एजुकेशन क्लास लेना, क्रॉसवर्ड और शतरंज जैसे खेल खेलने वाले लोगों में 9 से 11 फीसदी तक डिमेंशिया होने का खतरा कम हो सकता है। कंप्यूटर पर शतरंज या फिर क्रॉसवर्ड खेलने से भी इस बीमारी में कमी आ सकती है।
शतरंज खेलने के लाभ:
- अकेलापन दूर होता: बुजुर्गों को अकेलापन हमेशा सताता है। ऐसे में घर के छोटे बच्चों या मित्रों के साथ 30-40 मिनट शतरंज खेलने से बातचीत और हंसी-मजाक चलता है, जोकि अकेलापन दूर करने में सहायक है।
- फैसले लेने की ताकत बढ़ती है: शतरंज खेलने में हर चाल से पहले सोचना पड़ता है, जिससे दिमागी कसरत होती है, याददाश्त मजबूत बनती है और भूलने की आदत घटती है।
- अल्ज़ाइमर का जोखिम घटता: चिकित्सकों के अनुसार शतरंज जैसे मानसिक गेम नियमित खेलने वाले बुजुर्गों में अल्ज़ाइमर का खतरा कम पाया गया।
- धैर्य और संयम: खेल के दौरान शांत रहकर अगली चाल सोचने से जीवन में धैर्य और संयम का विकास होता है।
- रचनात्मकता का विकास: नई और अनोखी रणनीतियाँ बनाने से सोचने का दायरा विस्तृत होता है और रचनात्मकता बढ़ती है।






























































