Koundinya Ship

Koundinya Ship अजंता की एक पेंटिंग से बना 2000 साल पुराना जहाज ‘कौंडिन्य’ -न कील, न स्टील सिर्फ रस्सी और लकड़ी के दम पर जिंदा हुई समुद्री विरासत

पांचवीं सदी की प्राचीन सिलाई तकनीक ‘टांका विधि’ से तैयार भारतीय नौसेना के जहाज आईएनएसवी कौंडिन्य ने 18 दिन की यात्रा के बाद अपना पहला पड़ाव पार करते हुए पोरबंदर (गुजरात) से चलकर 14 जनवरी 2026 को ओमान के मस्कट पर लंगर डाल दिया। शीर्ष पर उकेरी शेर की आकृति वाले कौंडिन्य नामक जहाज में न तो इंजन लगा है और न ही धातु की कोई चीज। इसे लकड़ी से निर्मित, नारियल के रेशों से सिलाई और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर तैयार किया गया है जिससे उस युग की याद ताजा हो उठी है जब भारतीय नाविक समुद्र को चुनौती नहीं देते थे।

इसकी पहली सफल यात्रा से 2000 साल पुरानी विरासत फिर से जिंदा हो उठी। यह भारतीय नौसेना के आधुनिक कौशल और प्राचीन शिल्प कौशल का एक दुर्लभ संगम है। यह ऐतिहासिक समुद्री मार्गों के पुनर्मूल्यांकन के लिए डिजाइन किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कौंडिन्य टीम की फोटो एक्स पर शेयर कर जहाज के 16 सदस्यीय दल को बधाई दी।

जहाज के क्रू सदस्य हेमंत ने पोस्ट किया- लैंड अहॉय! मस्कट दिख गया। गुड मॉर्निंग इंडिया, गुड मॉर्निंग ओमान। समुद्री मार्ग से बिना रुके अकेले विश्व का चक्कर लगाने वाले पहले भारतीय, रिटायर्ड नौसेना कमांडर अभिलाष टॉमी ने भी कौंडिन्य की टीम को बधाई दी। दरअसल कौंडिन्य की यह यात्रा कई जोखिमों से भरी थी, लेकिन क्रू टीम ने हिम्मत नहीं हारी। यह जहाज 29 दिसंबर, 2025 को गुजरात के पोरबंदर से ओमान के लिए रवाना हुआ।

खास बात यह भी थी कि जहाज में कोई कमरा नहीं है। क्रू मेंबर्स स्लीपिंग बैग में सोते थे। बिना आधुनिक सुविधाओं वाले इस जहाज पे बिजली की व्यवस्था भी नहीं है। अन्य जहाजों को चेतावनी देने के लिए क्रू के पास सिर्फ हैडलैंप्स थे, जो अपने सिर पर लगाकर रखते थे। टीम सदस्यों के अनुसार, कौंडिन्य की टीम भारत से मटकों में पीने का पानी भरकर साथ ले गई थी। वहीं ताजी सब्जियां भी स्टोर की गई थी, जो शुुरुआती 6 दिनों के बाद ही खत्म हो गई थी। क्रू मेंबर्स ने 18 दिन खिचड़ी और अचार खाकर ही बिताए।

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आखिरकार जहाज 18 दिनों में 1400 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर 14 जनवरी 2026 को गुजरात से ओमान के मस्कट पहुंच गया। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म परस्किपर कमांडर विकास श्योराण और प्रोजेक्ट हेड हेमंत कुमार के साथ तस्वीर पोस्ट करते हुए लिखा- इस पल का आनंद ले रहे हैं, हमने कर दिखाया। संजीव सान्याल ने ही इसकी कल्पना की थी।

आईएनएसवी कौंडिन्य एक सिलाई वाला पहला जहाज है, जो अजंता गुफाओं की पेंटिंग्स में दर्शाए गए 5वीं शताब्दी ईस्वी के जहाज पर आधारित है। दरअसल, यह परियोजना जुलाई 2023 में संस्कृति मंत्रालय, भारतीय नौसेना और मेसर्स होडी इनोवेशन के बीच हस्ताक्षरित एक त्रिपक्षीय समझौते के माध्यम से शुरू की गई थी, जिसमें संस्कृति मंत्रालय द्वारा इसके खर्च की रूपरेखा तैयार की गई।

सितंबर 2023 में जहाज का निर्माण केरल के कुशल कारीगरों की एक टीम द्वारा सिलाई की पारंपरिक विधि का उपयोग करके किया गया, जिसका नेतृत्व मास्टर शिपराइट श्री बाबू शंकरन ने किया। कई महीनों तक टीम ने नारियल की रस्सी, नारियल के रेशे और प्राकृतिक राल का उपयोग करके जहाज के पतवार पर लकड़ी के तख्तों को सावधानीपूर्वक सिला और जहाज को फरवरी 2025 में गोवा में लॉन्च कर दिया गया।

ऐसे जहाजों का कोई जीवित ब्लूप्रिंट नहीं था

भारतीय नौसेना ने इस परियोजना में केंद्रीय भूमिका निभाई, डिजाइन, तकनीकी सत्यापन और निर्माण प्रक्रिया की देखरेख की। ऐसे जहाजों के कोई जीवित ब्लूप्रिंट नहीं होने के कारण, डिजाइन को आइकोनोग्राफिक स्रोतों से अनुमानित करना पड़ा। नौसेना ने पतवार के आकार और पारंपरिक रिगिंग को फिर से बनाने के लिए जहाज निर्माता के साथ सहयोग किया, और यह सुनिश्चित किया कि डिजाइन को आईआईटी मद्रास के ओशन इंजीनियरिंग विभाग में हाइड्रोडायनामिक मॉडल परीक्षण और आंतरिक तकनीकी मूल्यांकन के माध्यम से मान्य किया गया था।

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महान भारतीय नाविक के नाम पर हुआ नामकरण

इस जहाज में कई सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण विशेषताएं शामिल हैं। उसके पालों पर गंडभेरुंड और सूर्य के रूपांकन प्रदर्शित हैं, उसके धनुष पर एक तराशा हुआ सिंह याली है, और एक प्रतीकात्मक हड़प्पा शैली का पत्थर का लंगर उसके डेक को सुशोभित करता है, प्रत्येक तत्व प्राचीन भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं को दर्शाता है। कौंडिन्य के नाम पर, जो पहली सदी के एक महान भारतीय नाविक थे, जिन्होंने हिंद महासागर को पार करके दक्षिण पूर्व एशिया की यात्रा की थी, यह जहाज भारत की समुद्री खोज, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की लंबे समय से चली आ रही परंपराओं का एक मूर्त प्रतीक है।

नौसेना को मिला कौंडिन्य

आईएनएसवी कौंडिन्य को फरवरी 2025 में गोवा स्थित होडी शिपयार्ड में लॉन्च किया गया। लंबे समय तक चले निर्माण और तैयारियों के बाद पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग आॅफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल कृष्ण स्वामीनाथन ने भारत में ओमान के राजदूत ईसा सालेह अल शिबनी की उपस्थिति में इस पर ध्वजारोहण किया। भारतीय नौसेना ने 21 मई 2025 को कारवार नौसैनिक अड्डे पर एक समारोह के दौरान केंद्रीय संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की मौजूदगी में इस जहाज को औपचारिक रूप से अपने बेड़े में शामिल किया और इसका नाम भारतीय नौसेना नौकायन पोत (आईएनएसवी) कौंडिन्य रखा। इंडियन नेवल सेलिंग वेसल के तौर पर शामिल किया गया कौंडिन्य जहाज का बेस कर्नाटक के कारवार नौसैनिक अड्डे पर है।

  • अनोखा प्रयास: क्रू मेंबरों ने घड़ों का पानी पीकर, खिचड़ी और अचार खाकर गुजरे 18 दिन
  • पहली सफल यात्रा: नारियल रेशों की सिलाई से बने आईएनएसवी कौंडिन्य जहाज ने नापा 14 सौ किलोमीटर समुंद्र
  • लंबाई/चौड़ाई: 50 टन वजनी, 13 फीट ऊँचा, 22 फीट चौड़ा और 65 फीट लम्बाई
  • यात्रा: यह पूरी तरह हवा के सहारे व कपड़े के जाल से चलता है।
  • डिजाईन: इसका डिजाईन अजंता की गुफाओं पर हुई पेंटिंग से लिया गया है।