Kanishka Chauhan

Kanishka Chauhan पूज्य गुरु जी से सीखी खेल की बारिकियाँ हरफनमौला खिलाड़ी कनिष्क चौहान के लिए बनी कारगर

डॉ. एमएसजी पापा कोच की ‘यॉर्कर’ टेक्नीक से जीता वर्ल्डकप

  • बल्लेबाजी में पसंदीदा शॉट -पुल शॉट
  • गेंदबाजी में पसंदीदा गेंद -यॉर्कर बॉल

‘बेटा, मैच की स्थिति चाहे कैसी भी हो, आत्मबल को कभी डगमगाने मत देना। सेल्फ कांफिडेंस से हर मैदान फतेह किया जा सकता है।’ पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की यह सीख मुझे हर समय प्रेरणा देती रहती है। उस दिन वर्ल्ड कप के फाइनल मैच का वह अहम चरण मैं जीवन में कभी नहीं भूल सकता, जब इंग्लैंड की टीम धुआंधार बल्लेबाजी करते हुए हमारे पहाड़ जैसे लक्ष्य (411 रन) का लगातार पीछा कर रही थी। बेशक उनकी विकेट थोड़े-थोड़े अंतराल पर गिर रही थी, लेकिन रनों की रफ्तार कम नहीं हो रही थी।

मैं पूज्य गुरु जी द्वारा दिए टिप्स को फॉलो कर रहा था कि यदि सामने वाली टीम लगातार रन बना रही हो तो यॉर्कर गेंदबाजी पर फोक्स करो। दूसरी पारी के 41 वें ओवर में इंग्लैंड की अंतिम विकेट बीच मैदान थी। मैंने जैसे ही दूसरी गेंद यॉर्कर डाली तो 115 रन पर खेल रहे कलैब फाक्नर कैच दे बैठे। भारत छठी बार वर्ल्ड कप विजेता बन चुका था। मेरे लिए यह जीत मेरे पापा कोच पूज्य गुरु जी की दया-मेहर का ही कमाल था। यह कहना है अंडर-19 क्रिकेट वर्ल्ड कप विजेता भारतीय टीम के हरफनमौला खिलाड़ी कनिष्क चौहान का।

शाह सतनाम जी क्रिकेट एकेडमी और शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज के उभरते हुए युवा क्रिकेटर कनिष्क चौहान ने बताया कि इस वर्ल्डकप में शानदार खेल का प्रदर्शन सब पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं का ही कमाल है। इंग्लैंड से खिताबी मुकाबले में कनिष्क चौहान ने गेंद और बल्ले दोनों से अपने हुनर का शानदार प्रदर्शन किया। फाइनल मैच में पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम रनों का पहाड़ खड़ा करना चाह रही थी।

ऐसे में कनिष्क चौहान ने मात्र 20 गेंदों में तीन चौकों और एक छक्के की मदद से 37 रनों की तूफानी पारी खेली। आखिरी ओवर में 18 रन बनाए, जिसकी बदौलत भारतीय टीम 400 रनों का आंकड़ा पार कर गई। वहीं गेंदबाजी में भी आॅफ स्पिनर कनिष्क ने कमाल कर दिखाया। कनिष्क ने 8.2 ओवर में 63 रन देकर 2 महत्वपूर्ण विकेट झटके, जिसमें 115 रन बनाने वाले कलैब फाक्नर का शानदार विकेट शामिल है। गौरतलब है कि कनिष्क चौहान वर्तमान समय में शाह सतनाम जी बॉयज कॉलेज, सरसा में बीए तृतीय वर्ष का छात्र है और वह पिछले 10 वर्षों से शाह सतनाम जी क्रिकेट एकेडमी, सरसा में खेल रहा है।

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मेरे पापा कोच पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की बदौलत ही मैं क्रिकेट के इस मुकाम तक पहुंचा हूं। उनका पावन सान्निध्य मुझे प्रेरणा के साथ-साथ गजब का हौंसला देता है जो मैदान में मेरे आत्मविश्वास को हमेशा बढ़ाए रखता है। पूज्य गुरु जी ने मुझे बल्लेबाजी में अकॉर्डिंग-टू-बॉल जाकर खेलने व स्टेट में अधिक शॉट खेलने के बारे में कई अहम टिप्स दिए हैं। जबकि गेंदबाजी में यॉर्कर गेंद डालने का गुर भी बताया है। मैं अकसर खेल में पूज्य गुरु पापा कोच के टिप्स का अनुसरण ही करता हूं, जिसकी बदौलत मेरे प्रदर्शन में दिनोंदिन और निखार आ रहा है। – कनिष्क चौहान, हरफनमौला खिलाड़ी।

कनिष्क चौहान सही मायने में देश की उम्मीदों पर खरे उतरे हैं और अपने बेहतर प्रदर्शन से सिरसा का नाम देश में ही नहीं, बल्कि विदेश में भी रोशन किया है।

आने वाले समय में सिरसा का यह बेटा कनिष्क चौहान भारतीय टीम का भी सदस्य होगा और भारत के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगा।

– डॉ. वेद बेनीवाल, सचिव सरसा क्रिकेट एसोसिएशन।

हर मैदान फतेह

कनिष्क ने अंडर-19 विश्वकप में लीग, सुपर सिक्स, सेमीफाइनल और फाइनल में शानदार प्रदर्शन किया है।

वहीं चिरप्रतिद्वंदी पाकिस्तान के खिलाफ दमदार प्रदर्शन करते हुए 29 गेंदों में चार चौकों और एक छक्के की मदद से 35 रन और गेंदबाजी में 10 ओवर में 30 रन देकर एक अहम विकेट झटका।

जिसकी बदौलत उन्हें प्लेयर आॅफ द् मैच पुरस्कार भी मिला है। वर्ष 2024 में इंग्लैंड के खिलाफ डेब्यू करने वाले कनिष्क बेस्ट आलराउंडर आॅफ द् सीरीज भी रह चुके हैं।

उन्होंने एशिया कप और अंडर-19 विश्वकप में शानदार प्रदर्शन किया था, जहां वे लगातार दो बार मैन आफ द् मैच बने।

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बता दें कि कनिष्क की इसी सफलता को देखते हुए रायल चैलेंजर्स बेंगलुरु (आरसीबी) ने उन्हें 30 लाख रुपए के बेस प्राइस पर अपनी टीम में शामिल किया है।

कठिन प्रक्रिया

क्रिकेट कोच जसकरण सिंह ने बताया कि वर्ल्डकप के लिए भारत की अंडर-19 टीम में चयनित होने से पहले कनिष्क चौहान को परीक्षाओं के कई दौर से होकर गुजरना पड़ा। उन्होंने बताया कि क्रिकेट एसोसिएशन की स्टेट वाइज 34 टीमें थी, जिसमें से 11 खिलाड़ियों का चयन होना था। पहला कैंप राजकोट में लगा। इसी तरह इंडिया में छह अलग-अलग जगह पर कैंप लगाए गए थे जिनमें 150 खिलाड़ी भाग ले रहे थे। हर स्टेशन से 25 में से 15 खिलाड़ी चुने गए। जिसके बाद 11 सदस्यीय टीम बनी। कनिष्क ने हर मुश्किल दौर में शानदार प्रदर्शन करते हुए खुद की काबिलियत को साबित किया।

पापा कोच के रूप में पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने कनिष्क चौहान को खेल की बहुत सी बारीकियां सिखाई हैं। एशिया कप में खेलने से पहले अगस्त 2025 में कनिष्क चौहान की पूज्य पिता जी से बात हुई थी, तब पूज्य गुुरु जी ने उसे गेंदबाजी में यॉर्कर बॉल का टिप्स देते हुए समझाया था कि ‘जब दूसरी टीम के बल्लेबाज ज्यादा रन बना रहे हों तो अधिकतर गेंद यॉर्कर डालने का प्रयास करना चाहिए। बेटा! ये यॉर्कर बॉल काफी काम आने वाली है।

शायद पूज्य गुरु जी आने वाले किसी समय की ओर इशारा कर रहे थे, किंतु हमें यह बात तब समझ में आई, जब वर्ल्डकप के फाइनल मुकाबले में यॉर्कर गेंदबाजी करते हुए कनिष्क ने सबसे कम रन देकर मैच में अहम विकेट झटके और भारत को विजेता बनाने में अहम रोल अदा किया। वर्ल्डकप जीतकर लौटने के बाद भी जब कनिष्क को पूज्य गुरु जी से मिलने का सौभाग्य मिला तो इस दौरान भी पूज्य गुरु जी ने कनिष्क के साथ खेल के उन्हीं टिप्स पर फिर से चर्चा की जो पहले बताए गए थे, और कुछ नई बातें भी सिखाई। इस दौरान पूज्य गुरु जी ने कनिष्क को टी-ट्वंटी खेल के बारे में भी कई अहम टिप्स दिए। -जसकरण सिंह सिद्धू, कोच शाह सतनाम जी क्रिकेट एकेडमी सरसा।

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