Exercise for children: शिशु की मसाज के बाद करें ये एक्सरसाइज
नवजात शिशु की मालिश न केवल उनके शरीर को आराम देती है बल्कि उनके शारीरिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मसाज के बाद कुछ खास एक्सरसाइज करने से शिशु के मांसपेशियों का विकास होता है और उनकी संवेदनाएं भी बढ़ती हैं।
- पैरों को हिलाना: शिशु के पैरों को पकड़कर धीरे-धीरे ऊपर नीचे करें और एक तरफ से दूसरी तरफ घुमाएं। यह एक्सरसाइज उनके पैरों की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
- हाथों को हिलाना: शिशु के हाथों को पकड़कर धीरे-धीरे ऊपर नीचे करें और एक तरफ से दूसरी तरफ घुमाएं। यह एक्सरसाइज उनके हाथों की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
- साइकिल चलाना: शिशु को अपनी पीठ के बल लिटाकर उनके पैरों को साइकिल चलाने की तरह हिलाएं। यह एक्सरसाइज उनके पैरों और कमर की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
- तितली की मुद्रा: शिशु के पैरों को मोड़कर घुटनों को मिलाएं और धीरे-धीरे नीचे की ओर दबाएं। यह एक्सरसाइज उनके कूल्हों और जांघों की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
- पेट के बल लिटाना: शिशु को पेट के बल लिटाकर कुछ देर के लिए छोड़ दें। यह एक्सरसाइज उनके गर्दन और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
- बांहों को ऊपर उठाना: शिशु को पेट के बल लिटाकर उनके हाथों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। यह एक्सरसाइज उनके बांहों और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
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शिशु की मालिश करने के फायदे:
जर्नल आॅफ पब्लिक हेल्थ रिसर्च के शोध निष्कर्ष के अनुसार, नियमित रूप से लगभग 30 मिनट शिशु की मालिश करने से बच्चे के लगाव, प्यार और विश्वास की भावना को बढ़ाने में मदद मिलती है। शिशु की मालिश पाचन, प्रतिरक्षा, हार्मोनल प्रणाली, मांसपेशियों और जोड़ों सहित शरीर की सभी प्रणालियों को उत्तेजित करती है। इसके अलावा मालिश गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्याओं जैसे पेट का दर्द और कब्ज, दांत निकलते समय होने वाली परेशानी और बढ़ते दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकती है।
कुछ महत्वपूर्ण बातें:
- धीरे-धीरे करें: इन एक्सरसाइज को बहुत धीरे-धीरे और हल्के हाथों से करें।
- शिशु के संकेतों पर ध्यान दें: यदि शिशु रोने लगता है या परेशान होता है तो एक्सरसाइज बंद कर दें।
- डॉक्टर की सलाह लें: किसी भी नए एक्सरसाइज को शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।



































































