Pea cultivation

Pea cultivation: भरोसेमंद के साथ दोहरी फायदेमंद मटर की खेती

अक्टूबर में सर्दी के मौसम से जुड़ी सब्जियाँ लगाने का उचित समय होता है। ऐसे समय में मटर की खेती दोहरी फायदेमंद साबित हो सकती है क्योंकि अक्तूबर महीने में मटर की बुवाई का सीजन शुरु हो जाता है। मटर की खेती से भरपूर पैदावार लेकर किसान मालामाल हो सकते हैं।

बिजाई कब करें:

किसी भी फसल के बेहतर उत्पादन के लिए उसके बिजाई के वक्त को सबसे अहम माना गया है। मटर की अगर बात करें तो अक्टूबर के दूसरे हफ्ते से ही इसकी बिजाई शुरु हो जाती है। अक्टूबर महीने में ही मटर की बुवाई से वह सही समय पर फल देना शुरु कर देता है जिससे इसकी पैदावार काफी अच्छी होती है और मंडी में मटर की फसल का भाव भी अच्छा मिलता है।

कौन सी किस्मों का करें इस्तेमाल:

हिसार स्थित हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने मटर की कई किस्मों को रिलीज किया है, जो अच्छा उत्पादन देती है। हरियाणा में लगाई जाने वाली किस्में आरकेल, बॉर्नविले, पीएच 1, पंजाब 89 है जो हरियाणा समेत उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्र में आसानी से लगाई जा सकती है और अच्छा उत्पादन देती हैं। हरियाणा समेत उत्तर भारत में कई किसान हाइब्रिड किस्में भी लगा रहे हैं, जिससे अच्छा उत्पादन होता है। मटर की मुख्य किस्म पंत मटर 155 है, जो काफी अच्छा उत्पादन देती है। ये सभी किस्म करीब 60 दिन की होती है।pea

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कैसे करें बिजाई:

पहले किसान सीड ड्रिल के जरिए बिजाई करते थे, जिससे पैदावार पर खासा असर पड़ता था, लेकिन अब मटर प्लांटर मशीन से बुवाई की जाती है, जिससे किसानों को बहुत फायदा होता है। इस मशीन में मटर का बीज और खाद डालकर बुवाई की जाती है। पहले रोटावेटर के साथ खेत को समतल कर लें, उसके बाद मशीन के साथ मटर की बिजाई करनी चाहिए।

बरतें खास सावधानी:

मटर की बिजाई लाइनों में होती है। कृषि विभाग ने इसमें बीज से बीज की दूरी को निर्धारित किया है, जिससे पौधा अंकुरित होकर अच्छे से फलता-फूलता है। साथ ही इससे बीमारियां और कीड़े आने का खतरा भी कम हो जाता है। साथ ही अगर बिजाई करने वाले क्षेत्र में बारिश हो जाती है तो उससे मटर के पौधे खराब होने का खतरा भी कम रहता है।

खाद का इस्तेमाल कैसे करें :

बिजाई करने से पहले खेत में गोबर की देसी खाद डालें और फिर बिजाई करते वक्त एक बैग यूरिया और एक बैग डीएपी खाद का डालें। खरपतवार के लिए समय-समय पर कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर उसका नियंत्रण करें ताकि पैदावार प्रभावित न हो। अगर बिजाई के बाद कोई बीमारी या कीट फसल में लगता है तो वक्त रहते कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर उसका निदान करना चाहिए।

सिंचाई:

फूल और फली बनते समय नमी बहुत जरूरी है। यदि खेत में पर्याप्त नमी न हो, तो बीज बोने से पहले हल्की सिंचाई करें ताकि अंकुरण अच्छा हो। बुवाई के बाद जब पौधे में फूल आने वाले हों, तब पहली सिंचाई करें। यह सबसे जरूरी समय होता है। नमी की कमी से फूल और फलियाँ झड़ सकती हैं। जब मटर की फलियों में दाने भर रहे हों, तब दूसरी या अगली सिंचाई करें। मिट्टी के प्रकार और मौसम के आधार पर पूरी फसल के दौरान 3 से 4 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। ध्यान रखें कि मटर की फसल को बहुत अधिक पानी की जरूरत नहीं होती है। खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए, इसलिए जल निकासी का अच्छा प्रबंध रखें।

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दोहरा फायदा:

हरियाणा में ज्यादातर मटर की 60 दिन वाली वैरायटी बोई जाती है, जिससे इस फसल को शुरुआत से ही फलियाँ लगनी शुरु हो जाती हैं। जिस समय फल आता है, उस समय किसानों को उसका दाम भी अच्छा मिल जाता है। 60 दिन पूरे होने के बाद उसको खेत से उखाड़ कर दूसरी फसल की बिजाई भी कर सकते हैं। ऐसे में किसान दो फसल ले सकते हैं। किसान मटर की खेती के बाद गेहूं की फसल या कोई और सब्जी भी लगा सकते हैं। -डेस्क

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