हर दिन खुशनुमाहो जिंदगी HAPPY NEW YEAR
सृष्टि चलायमान है और यहाँ सब परिवर्तनशील है। ये सब प्रकृति के नियमानुसार अपने आप हो रहा है। जब किसी बदलाव का दौर शुरु होता है तो उसके नज़ारे प्राणी मात्र को चकित कर देने वाले होते हैं। फुर्सत में इन नज़ारों पर गौर तो करें, जैसे ऋतुओं का बदल-बदल कर आना, सूरज का निकलना, तारों का टिमटिमाना, चांद की दूधिया रोशनी का बरसना, घुप्प अंधेरी रात का होना, निरोल खाली आकाश का मनमौजी नीलापन व धुंध भरे दिन-रात। ये सब प्रकृति के अल्हड़ नज़ारे हैं जो हमारे जीवन को रंगीं-हसीं बना देते हैं। सब बारी-बारी से हमारे जीवन में आते हैं और हमें अपना सब कुछ दे जाते हैं। अब सर्द रूत का दौर है जो अपने शिखर पर है। इसके ठिठुरन भरे नज़ारे बड़े जोरावर हैं।
इसके सामने बड़े-बड़े दुबक कर रह जाते हैं। इसके तीखे प्रहार सह कर भी हर शख्स गर्व महसूस करता है। यही बदलाव का अजब नज़ारा है। इससे इतर जिस बदलाव की चकाचौंध में पूरा जमाना रंगा हुआ है। उसकी अपनी किस्सागोई है, उसके अपने रूतबे हैं। कहे-अनकहे फलस्फे हैं। वो किसी छुपे हुए रूस्तम की तरह है। बूझ-अबूझ पहेलियों जैसा है। बात है वर्ष 2026 की जिसके आगमन की जमाने भर में चहल-पहल है। हर जगह इसके ही चर्चे हैं। इसकी छत्रछाया में जिंदगी के नए सपने सज रहे हैं। अभी 2025 का दौर गुज़रा है। उसको सबने अपने-अपने अंदाज से जिया है। अंदाज यही कि किसी के लिए यह खुशगवार रहा होगा।
किसी के लिए ठीक-ठाक और हो सकता है किसी को इसके विपरीत हालातों से भी गुज़रना पड़ा हो। अपनी खट्टी-मीठी यादों का साया हर किसी के जेहन मेें छोड़ कर गया है। कुछ ऐसे निशान जो उम्र भर मिटते नहीं। कुछ ऐसे मुकाम, उपलब्धियाँ भी हासिल हुई होंगी जो गर्व से दुनिया को बताई जाने वाली हैं। ये सिलसिला साल-दर-साल यूं ही चलता जा रहा है और जीवन रूपी गाड़ी अपनी रफ्तार से चलती रहती है। पता भी नहीं चलता कब एक-एक करके साल निकलते गए और फिर दस्तक देने आ जाता है जिंदगी का नया साल।
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नए तराने-नए सपने:-
जिंदगी के लिए बड़े मायने रखता है आने वाला नया साल। हमने फिर नई तैयारियों के साथ ज़िंदगी को सजाना, संवारना है। नए साल के जो नए सपने हमने बुने हैं, उन्हें पूरा करना है, क्योंकि नया साल हमारी एक प्रेरणा है जिससे हमें नई ऊर्जा मिलती है। जो प्रकृति का एक नया स्वरूप है। प्रकृति हमारे लिए कुछ नया लेकर आ रही है। हर नया साल हमारी चेतना के लिए किसी न किसी मकसद से जुड़ा होता है। हम उठें, हम जागें। जीवन को नई आशा के साथ जीएं। नए शब्दों के साथ, नए अर्थों के साथ इसकी कहानी को गढेंÞ।

नए पंखों के साथ उड़ान भरनी होगी ताकि आने वाले नए सालों की बुनियाद मजबूत हो सके। जीवन सार्थक बन सके। हर इम्तिहान को हौंसले के साथ पार करना होगा। मेहनत से दिन-रात एक करना होगा। लगन के साथ आगे बढ़ना होगा। फिर यह नया साल बड़ा मुफीद साबित होगा। फिर इस साल से किसी को शिकायत ना होगी। इसलिए अभी से तगड़ी तैयारियों से चलना होगा। यह साल बेहतर हो, इसके लिए हर दिन का विशेष शेड्यूल बनाएं।
HAPPY NEW YEAR नए कायदे-नए वायदे:-
पिछला साल अच्छा रहा तो भी ठीक, न रहा तो भी ठीक। उस पर ज्यादा न जाएं, क्योंकि जो गया सो गया। बात है आने वाले कल की। ध्यान उस पर देना जरूरी है। आने वाले कल को अच्छा बनाना है। उसको आज ही एक ढंग से सुंदर डिज़ाइन दें। उसकी मीनाकारी दिल के अजीज रिश्ते से हो। याद करें कि पिछले साल आप ने कोई प्रोमिस किया, जिसे पूरा न कर सकें हों, अगर नहीं किया तो इस बार करें। अपने आप में करें या अपने किसी खास से करें। प्रोमिस, वायदा जो भी हम करते हैं, उसे संजीदगी से निभाएं भी। मन में संकल्प लें कि इस साल हमने क्या कुछ करना है, जिससे सबका अच्छा हो। जो सबके लिए फायदेमंद साबित हो। हम मनुष्य हैं और भगवान ने हमें बहुत समझदार बनाया है।
इसलिए हमें समझदारी व सूझबूझ के साथ आगे बढ़ना है। अपने लिए, समाज के लिए कुछ अच्छा करना है। इसके लिए अपने आप से वादा करें और बिना किसी हील-हुज्जत के उसे सिरे भी चढ़ाएं। नए साल के नए कार्य पूरे करें। करने को बहुत कुछ है लेकिन फिर भी ऐसा प्रयास रहे कि समाज हित में भी अपना कुछ योगदान हो जैसे प्रदूषण मुक्त वातावरण बनाएं। पानी का सदुपयोग हो और मिट्टी-पानी को दूषित होने से बचाएं इत्यादि। क्योंकि आज की यही आवश्यकता है। धरा को साफ-सुथरा बनाना हमारा नैतिक कर्तव्य भी है। आपने आस-पास साफ-सफाई रखना भी समाजहित की ओर बढ़ाया गया एक कदम है। याद करें पिछले साल इसके लिए हमने क्या किया, नहीं किया तो अब जाग जाएं। इस साल ऐसा कुछ बेहतर करें जो अपने निजी पेशे से हटकर समाज के लिए भी हो।
किसी की मदद को हाथ बढ़ाएं। मदद भी कई तरीकों से हो सकती है। भले ही पड़ोसी की मदद हो या किसी अनजान व्यक्ति को दी गई मदद। सबसे खास यह है कि अपने हाथों से किया गया श्रमदान सच्चा सुख देने वाला है। अगर धन से मदद करने के योग्य हैं तो यह भी कर सकते हैं। किसी को भोजन करा सकते हैं। कपड़े दे सकते हैं। अपने वो कपड़े जो आपके लिए फालतू की लिस्ट में आ गए हैं, गरीब को दे आएं। उनका भी तन ढक जाएगा और आपके लिए पुण्य का काम हो जाएगा। वहीं पशुओं को चारा इत्यादि भी दें। पेड़-पौधे लगाएं, उनकी संभाल करें।
क्योंकि हमारी जिंदगी की सांसें इन्हीं से बेहतर चलती हैं। पेड़-पौधों का साथ न हो तो हमें जीने के लाले पड़ जाएंगे। इसलिए हमारा भी फर्ज़ है कि हम इनकी संभाल करें। हमने अपने बहुत अन्य शौक पाल रखे हैं तो क्यों न इस साल हमारे लिए पेड़-पौधे लगाने व इन्हें संभालने का शौक भी हमारी नई पहचान बने। नए साल के अवसर पर हमें ऐसे संकल्प खुद भी धारण करने चाहिए और दोस्तों-मित्रों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए। मानवता हित किए गए ऐसे कार्य हमें सुकुन से भर देते हैं। देखा जाए तो दुनिया में बहुत कम ही लोग होंगे जो इस तरह से अपना सहयोग दे रहे हैं।
इसलिए यह जरूरी है कि हमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ना होगा, क्योंकि लोग अपने हर साल के कुछ नए लक्ष्य, टारगेट तय करते हैं, जैसे किसी का घर बनाने का प्लान, किसी का नौकरी-धंधे का प्लान। मतलब अपने लिए हम सब प्लान कर लेते हैं। लेकिन अपने सिवाय समाज को देने के लिए हमारे पास क्या प्लान है, इस बारे कभी नहीं सोचते। तो आइये, इस साल ज्यादा नहीं, चलो थोड़ा-बहुत ही निजी स्वार्थों से हटकर दूसरों के लिए भी कुछ प्लान हो जाए। देखना जिंदगी कितनी खूबसूरत हो जाएगी।
HAPPY NEW YEAR न्यू सेलिब्रेशन:-
नया साल है तो इसका सेलिब्रेशन लाज़मी हो जाता है। इसका आगमन एक खास मेहमान की तरह है। मेहमान की आव-भगत में हम पूरी तरह से व्यस्त हो जाते हैं। ऐसा ही कुछ नज़ारा नए साल के अवसर पर हो जाता है। नए साल को मनाने का यह नज़ारा पश्चिमी संस्कृति की देन है जो अब हमारे लिए भी खास त्यौहार की तरह हो गया है, क्योंकि इसकी शुरुआत पश्चिमी देशों से हुई है, इसलिए उन देशों में इस सेलिब्रेशन के प्रति दीवानगी का जुनून बेमिसाल है। पूरा महीना भर इसके सेलिब्रेशन में लोग व्यस्त रहते हैं। इसको मनाने के सबके अपने-अपने अंदाज हैं। बड़ी महफिलें जमती हैं। लोग नाइट क्लबों में पूरी-पूरी रात डांस करते हैं, पार्टियाँ करते हैं। शहर के शहर इसके नज़ारों में रंगे हुए नज़र आते हैं।
वेस्टर्न कल्चर में इसकी जो रंग-रौनक है अब पूरी दुनिया में चमक रही है। भारतीय संस्कृति भी अब इस नए दौर के जश्न में रच-बस रही है। भारत में भी इस नए मेहमान के स्वागत में लोग उमड़ कर जश्न मना रहे हैं। नया साल जीवन की नई सवेर लाने वाला है। इसको मनाने की तैयारियाँ भी पहले से शुरु हो जाती हैं। हर कोई इस सेलिब्रेशन को यादगार बनाने को तत्पर रहता है। कोई सुदूर बर्फीली वादियों में तो कोई रेगिस्तान की सुनहरी रेत के धोरों में इसे मनाकर लुत्फ उठाते हैं। बड़े शहरों में युवाओं का क्रेज देखते ही बनता है। नामी-गिरामी कंपनियां भी इस सेलिब्रेशन की मार्केटिंग में बढ़-चढ़कर फायदा ले रही हैं। युवाओं में इस रंग-रंगीले अवसर को मनाना उनका शगल बन चुका है।
बड़े-बड़े कल्चरल प्रोग्राम व स्टेज शो आयोजित करके अपने ब्रांडस को लोकप्रिय बनाने का माध्यम भी, यह सेलिब्रेशन बन चुका है। नए साल के आगमन का यह क्रेज हर साल रंगीन होता जा रहा है। खासकर युवा पीढ़ी के लिए यह एक पंसदीदा पैशन हो गया है। खुशी भरे इस अवसर को मनाना बुरी बात नहीं है। बल्कि सबको मनाना चाहिए। भूले-बिसरे व नकारात्मक चीज़ों को दूर करके इस सेलिब्रेशन का हिस्सा बनना मूड को अच्छा करता है। खुशी कोई भी हो उसे मनाएं। मौज-मस्ती करें। बेफिक्री से जीएं। कल होगा जो होगा, आज को मजेदार बनाएं। यह जिंदगी है, इसे कलात्मक बनाएं। जितना हो सके, इसको खुशियों से भरें। अपनी खुशियाँ सब में बांटें। नाचें, थिरकें, गाएं, बजाएं। जीअ भर कर इंजाय करें। लेकिन याद रखें हमारी भारतीय संस्कृति ऋषि-मुनियों की गौरवमयी संस्कृति है। अपनी मौज-मस्ती की आड़ में
इसकी गरिमा को ठेस न पहुंचने पाए। त्यौहारों का मनाना, नाचना-गाना एक स्वस्थ परम्परा है। इसमें फूहड़पन, खुलापन, कोई नशा या व्यसन का प्रचलन सही नहीं है। इससे बचना चाहिए। इससे बचने के लिए युवाओं को चाहिए कि वो अपनी सोहबत को सही दिशा में लेकर जाएं। अपने आप को धर्म-कर्म की ओर मोड़ें। सज्जन पुरूषों के साथ अपना संग जोड़ें। फूहड़पन से भरे सेलिब्रेशन को त्याग, कहीं आध्यात्मिक सुरों से सजी महफिलों का हिस्सा बनें। भजन-वाणी की रमणीय मंडलियों में जाएं। लोक-वाणी, लोक संगीत, शब्द-कीर्तन या कोई धर्म समागम आस-पास हो रहा है तो उसमें शिरकत करें, क्योंकि आजकल ये भी सेलिब्रेशन का अंग बन चुके हैं। जोकि वक्त के अनुसार एक जरूरत भी है ताकि युवा पीढ़ी को एक सही मार्गदर्शन मिल सके। इसलिए अगर हम नए साल के सेलिब्रेशन का हिस्सा बनना चाहते हैं तो जरूर बनें। लेकिन किस प्रकार के सेलिब्रेशन का हिस्सा बनना है वो अपने विवेक से काम लें।
समृद्ध सेलिब्रेशन:-
जहाँ देश-दुनिया में सेलिब्रेशन का यह दौर है, वहीं डेरा सच्चा सौदा भी नए साल के आगमन पर अपनी रूहानी छटा से दुनिया को मंत्रमुग्ध बना रहा है। नए साल का यह जश्न जो डेरा सच्चा सौदा में मनाया जाता है वो दुनिया के लिए एक अनूठा उदाहरण है। नए साल की पूर्व संध्या पर सजी रूहानी महफिलें पूरा जनवरी महीना अपनी रौनक से लबरेज किए रखती है। शुभ जनवरी महीने की खुशी में साध-संगत नाचती है, गाती है और पूरी धूमधाम से इसका स्वागत करती है। इसी के साथ नेक-भलाई के कार्य करके दुनिया को संदेश दिया जाता है कि आओ सब मिलजुल कर खुशियाँ मनाएं।
वंचितों, असहायों को भी इन खुशियों का हिस्सा बनाएं। इसके लिए उन्हें रोटी, कपड़े, अनाज इत्यादि जिसकी भी उन्हें जरूरत है वो दें। साध-संगत अपने आस-पास बढ़-चढ़कर इस पुनीत कार्य को करके इस खुशी के अवसर को मनाती है। गाँव-शहर रूहानी सुरों की महफिल चलती हैं, जिसे नामचर्चा के नाम से जाना जाता है। वहीं घर-घर में अपने तौर-तरीके से इस पावन त्यौहार को मनाया जाता है। लोग केक काटते हैं, मिठाइयाँ बांटते हैं और अपने सतगुरु का लाखों बार शुक्रिया अदा करते हैं, जिनकी पावन शिक्षा से वो इस महान सेलिब्रेशन का हिस्सा बन सके हैं, जो समाज के लिए एक स्वस्थ व समृद्ध परंपरा है।

































































