सड़क दुर्घटना होने पर क्या करें, क्या नहीं Road Accident
सड़क दुर्घटनाएँ चेतावनी के साथ नहीं आती हैं। आज की तेज रफ़्तार दुनिया में हमारी सड़कें पहले से कहीं ज्यादा भीड़भाड़ वाली हो गई हैं। कारों, बसों, बाइकों, पैदल यात्रियों और अब लगभग खामोश इलेक्ट्रिक वाहनों से भरी हुई हैं, जिन्हें आसानी से अनदेखा किया जा सकता है। एक साथ इतना कुछ होने के कारण, दुर्घटना का जोखिम एक दुर्भाग्यपूर्ण दैनिक वास्तविकता बन गया है। एक पल आप काम पर जा रहे हैं, स्कूल जा रहे हैं, या परिवार के साथ सवारी का आनंद ले रहे हैं और अगले ही पल, सब कुछ बदल सकता है।
बीते महीने अमन अपनी कार से आगरा जा रहा था। अचानक सामने से आती तेज रफ्तार कार के साथ उसकी कार की टक्कर हो गई। पहले तो अमन घबरा गया, लेकिन अपनी सूझबूझ से न सिर्फ उसने अपनी बल्कि तेज स्पीड में आती कार सवार लोगों की भी जान बचा ली। उसने बहसबाजी में न फंसकर पहले तो कार में रखे फर्स्ट ऐड बॉक्स को निकाला और खुद की चोट पर डिटॉल लगाने लगा व फोन कर दुर्घटनाग्रस्त जगह पर ऐंबुलेंस को बुला लिया। इससे उसने अपने साथ-साथ दूसरी कार में सवार लोगों की जान भी बचा ली।
दुर्घटना की अराजकता के बीच, पहले कुछ मिनटों में आपके द्वारा की गई हरकतें बहुत बड़ा अंतर ला सकती हैं। मदद करने के लिए आपको डॉक्टर होने की जरूरत नहीं है – बस कुछ बुनियादी कदम जानने से जान बच सकती है, चोट कम हो सकती है और आपातकालीन सेवाओं के आने तक महत्वपूर्ण सहायता मिल सकती है। दुर्घटना होने के बाद के पहले एक घंटे को गोल्डन आवर कहा जाता है। अगर इस समय घायल को उचित मदद मिल जाती है तो उसके जीवित रहने की संभावना काफी बढ़ जाती है, इसलिए घायल को जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल पहुंचाना जरूरी होता है। वहीं, हादसे के बाद के पहले 10 मिनटों को प्लैटिनम-10 मिनट कहा जाता है। यह समय घायल को अस्पताल ले जाने और इलाज शुरू करने के लिहाज से काफी जरूरी होता है।
आजकल सड़क पर बढ़ता ट्रैफिक लोगों के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है। आए दिन सड़क दुर्घटनाओं की घटनाएं सामने आती रहती हैं, लेकिन ऐसी परिस्थितियों में घबराने के बजाय सूझबूझ और संयम से काम लेना चाहिए। यदि आप कम चोटिल हुए हैं, तो सही कदम तुरंत उठाकर न केवल अपनी बल्कि दूसरों की जान भी बचा सकते हैं। इसके अलावा कुछ ऐसी महत्त्वपूर्ण बातें हैं, जो सड़क दुर्घटना होने पर आपको हमेशा ध्यान में रखनी चाहिए।
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तो आइए जानते हैं ऐसे ही तमाम महत्वपूर्ण टिप्स:-Road Accident
दुर्घटना के बाद क्या करें:
अपने वाहन में फर्स्ट ऐड बॉक्स जरूर रखें, जिसमें प्राथमिक उपचार में काम आने वाली चीजें हों। जैसे स्टरलाइज्ड गॉजपैड और रोल, ऐंटीसैप्टिक सोल्यूशन (जैसे डेटॉल, सेवलॉन), बैंडऐड और मैडिकल टेप, दर्द कम करने की दवा (पैरासिटामोल), बर्न ओइटमैंट (बरनोल), रुई, साफ दस्ताने वगैरह।
- एक एमरजैंसी नंबर जरूर रखें, ताकि यदि कोई घटना घट जाए तो घर वालों को सूचित किया जा सके।
- अपने वाहन की समय-समय पर सर्विस अवश्य कराएं, ताकि ब्रेक, लाइट आदि सही स्थिति में रहें।
- दोपहिया वाहन चलाते समय हमेशा हेलमेट पहनें और चार-पहिया वाहन में सीट-बेल्ट लगाएं।
- यदि किसी कारणवश आपके द्वारा ऐक्सिडेंट हो जाता है या आप शिकार बन जाते हैं, तो घबराएं नहीं, तुरंत गाड़ी रोकें और इंजन बंद करें।
- यदि आप गंभीर रूप से चोटिल नहीं हैं, तो खुद को और दूसरे यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं और सामने वाले की भी मदद करें।
- घायलों को प्राथमिक उपचार दें और तुरंत एंबुलेंस (108/102) बुलाएं। साथ ही पास के थाने या 112 नंबर पर सूचना दें।
- अपने वाहन की इमरजैंसी लाइट/हैजर्ड लाइट जलाएं, ताकि पीछे से आने वाले वाहन चालक सतर्क हो सकें।
- दुर्घटनास्थल की फोटो/वीडियो लें, ताकि घटना का रिकॉर्ड सुरक्षित रहे।
- इंश्योरैंस कंपनी को सूचित करें, क्योंकि दावा (क्लेम) करने के लिए यह आवश्यक है।
- हमेशा अपने पास आवश्यक दस्तावेज रखें, जैसे ड्राइविंग लाइसेंस, आरसी, इंश्योरैंस और पौल्यूशन सर्टिफिकेट। साथ ही इनकी फोटोकॉपी घर पर भी सुरक्षित रखें।
दुर्घटना होने पर क्या न करें:
- झगड़े या बहस न करें, बल्कि शांत रह कर स्थिति को संभालें।
- दुर्घटना स्थल से भागें नहीं, क्योंकि ऐसा करना कानून अपराध है। बेहतर है कि आप रूकें और घायल की मदद करें।
- जब तक आप सुनिश्चित न हों, किसी भी कागजात पर हस्ताक्षर करने से बचें।
- यदि दुर्घटनास्थल पर स्थानीय लोग आएं, तो उन्हें मदद के लिए मना न करें, बल्कि उनकी संभव मदद अवश्य लें।
- घायल को गलत तरीके से न उठाएं, विशेषकर रीढ़ की हड्डी की चोट व सिर की चोट के मामले में। पेशेवर मदद का इंतजार करें।
- दुर्घटना की जानकारी तुरंत सोशल मीडिया पर पोस्ट करने के बजाय कानूनी और मैडिकल मदद को प्राथमिकता दें।
- यदि गलती आपकी नहीं है, तो डर में अपनी गलती न मानें। कानून निर्दोष को सजा नहीं देता।
- पुलिस और इंश्योरैंस कंपनी को अधूरी व झूठी जानकारी न दें बल्कि हमेशा सही और पूरी जानकारी दें।
डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाए जा रहे मानवता भलाई कार्यों में 156वां कार्य है-
FASTER ( first aid servies and treatment for emergency response on roads ) Campaign,
यानि वाहनों में फर्स्ट एड किट रखना, ताकि रास्ते में मिले किसी भी दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति को प्राथमिक उपचार दिया जा सके।’ पूज्य गुरु संत डॉ. एमएसजी की पावन प्रेरणा से साध-संगत हमेशा दुर्घटनाग्रस्त लोगों की मदद के लिए तैयार रहती है।
क्या है नेक व्यक्ति कानून
नेक व्यक्ति’ का अर्थ है एक ऐसा व्यक्ति, जो अच्छी नियत से और बिना किसी इनाम या मुआवजे की उम्मीद के आपातकालीन चिकित्सा या पीड़ित को दुर्घटना के स्थान पर सहायता करता है, ऐसे पीड़ित को अस्पताल पहुँचाता है। भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने पूरे भारत के लिए ‘नेक व्यक्ति कानून’ पारित किया है। मोटर व्हीकल (संशोधन) अधिनियम 2019 भी पारित किया गया, जिसमें एक नई धारा 134ए है। इसमें ‘नेक व्यक्ति की संरक्षा’ के लिए प्रावधान किया गया है, जो यह प्रदान करता है कि एक नेक व्यक्ति किसी भी दुर्घटना में शिकार व्यक्ति की चोट या मृत्यु के लिए किसी भी व्यावहारिक या आपराधिक कार्रवाई के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। इस कानून का मुख्य उद्देश्य लोगों के मन में पुलिसिया पूछताछ या अदालती कार्यवाही का डर कम करना है, ताकि वे सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मदद (गोल्डन आॅवर में) पहुंचा सकें और जान बचाई जा सके।
नेक व्यक्ति’ के अधिकार:
- ‘नेक व्यक्ति’ के साथ धर्म, राष्ट्रीयता, जाति या लिंग के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाएगा। जिसने किसी मोटर वाहन से जुड़ी किसी दुर्घटना के बारे में पुलिस को सूचित किया है या जिसने किसी मोटर वाहन से जुड़े दुर्घटना के शिकार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाया है, उसे पुलिस या अस्पताल द्वारा रोका नहीं जाएगा। उसे तुरंत जाने की अनुमति दी जाएगी।
- कोई भी पुलिस अधिकारी या कोई अन्य व्यक्ति, ‘नेक व्यक्ति’ को नाम, पहचान, पता या ऐसे किसी अन्य व्यक्तिगत विवरण बताने के लिए मजबूर नहीं करेगा। ‘नेक व्यक्ति’ स्वेच्छा से अपना नाम, पता और व्यक्तिगत विवरण का खुलासा करने का विकल्प चुन सकता है।
- एक ‘नेक व्यक्ति’ को किसी भी चिकित्सा प्रक्रिया में शामिल करने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
- नेक व्यक्ति स्वेच्छा से गवाह बन सकता है, लेकिन पुलिस इसके लिए बाध्य नहीं कर सकती। यदि वे गवाही देते हैं, तो उनका उत्पीड़न नहीं किया जाना चाहिए।


































































