Experiences of the Satsangis

Experiences of the Satsangis बहुत दवाइयाँ ले ली, बस अब बंद कर दो… -सत्संगियों के अनुभव

पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की दया-मेहर

प्रेमी बंत सिंह इन्सां पुत्र श्री रामचंद्र सिंह, निवासी जुझार नगर, भटिंडा (पंजाब) से पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज की अपने परिवार पर हुई रहमत का इस तरह वर्णन करते हैं-

जुलाई 1990 की बात है। उस समय मेरी बेटी 7 साल की हो गई थी। उसके बाद हमें कोई भी बच्चा नहीं हुआ। हमने कई डॉक्टरों से दवाई ली, चैकअप करवाते रहे, परंतु कहीं से भी बच्चे की आशा नहीं बंधी। जब कहीं से भी फायदा नहीं हुआ तो फिर हमने अपने घर-परिवार में बैठकर विचार किया कि हमारी इस समस्या का हल केवल सतगुरु ही कर सकते हैं। वो दो जहाँ का मालिक है। हम इस संबंध में पूजनीय परमपिता जी के चरणों में फरियाद लेकर परिवार सहित डेरा सच्चा सौदा सरसा दरबार में पहुँचे।

आज्ञा मिलने पर हम परिवार सहित पूजनीय परमपिता जी की पावन हजूरी में पहुँच गए। मैंने परमपिता जी के सम्मुख विनती की कि पिता जी, मेरी बेटी 7 साल की हो गई है, उसके बाद हमें कोई बच्चा नहीं है। आप ही कृपा करो जी। दवाइयाँ खा-खाकर थक गए हैं, परंतु कोई फायदा नहीं हुआ। परमपिता जी ने पवित्र मुखारबिंद से फरमाया ‘अच्छा भई! बहुत दवाइयाँ ले लीं, बस अब बँद कर दो!’

पूजनीय परमपिता जी की कृपा से अप्रैल 1991 में बच्चे की आस जगी। हमारा पूरा परिवार पूजनीय परमपिता जी के पास अर्ज़ करने के लिए पहुँचा कि पिता जी, एक बेटी तो हमारे घर है, बेटा हो जाए। उस समय सतगुरु जी की दोनों नूरी बॉडियाँ विराजमान थीं। पूजनीय परमपिता जी पलंग पर और पूज्य हजूर पिता जी पास ही कुर्सी पर विराजमान थे। परमपिताजी ने हजूर पिताजी से नज़रें मिलाकर उनकी सहमति जताते हुए फरमाया, ‘एक बेटी है, एक बेटा हो जाए तो बढ़िया परिवार बन जाएगा।’

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हजूर पिताजी ने पूजनीय परमपिताजी की हाँ में हाँ मिला दी। इस तरह परमपिताजी ने हजूर पिताजी की भी मोहर लगवा दी। समय बीता, आखिर 21 जनवरी 1992 को पावन वचनानुसार हमारे घर पुत्र ने जन्म लिया। पूजनीय परमपिता जी कदम-कदम पर हमारी मदद करते हैं। जो परोपकार परमपिताजी ने हमारे परिवार पर किए, उनका ऋण कभी नहीं चुकाया जा सकता। हम हमेशा सतगुरु जी से यही दुआ, प्रार्थना करते हैं कि अपनी रहमत इसी प्रकार बनाए रखना जी।