Chest Pain

Chest Pain सीने के दर्द को अनदेखा न करें

मुख्यत: छाती में होने वाला दर्द ही हृदय रोग की मूल पहचान मानी जाती है। तेजी से चलना, पहाड़ी पर चढ़ना, दौड़ना, ठंड में पैदल चलना जैसी परिस्थितियों में यदि मरीज छाती पर दबाव या दर्द महसूस करता है और आराम करने पर यह दर्द कम हो जाता है तो इसे ऐज़ाइना कहा जाता है। यदि यही दर्द आराम की अवस्था में भी लगातार 15-20 मिनट तक बना रहे तो यह हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।

सामान्यत: 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग, डायबिटिज़ (शूगर) के मरीज, धूम्रपान, तंबाकू का सेवन करने वाले, अत्याधिक मोटापे के शिकार लोग एवं ऐसे लोग जिनके परिवार (माता-पिता एवं भाई-बहन व सगे-संबंधी आदि) में किसी को कम उम्र में हृदय की समस्याएं आई हों, ऐसे लोगों को हृदयाघात की संभावना अधिक रहती है।

नियमित जांच अवश्य करवाएं

समय-समय पर ब्लॅड शूगर, ब्लॅड प्रैशर (बीपी), कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाते रहें। वहीं ईसीजी, ब्लॅड टेस्ट (ट्रोपोनिन, सीपीकेएमबी), इको-कार्डियोग्राफी हृदय रोग के संभावित खतरे से सचेत करते हैं। यदि घर में अचानक किसी सदस्य को हार्ट अटैक से जुड़ी समस्या आती है तो एस्प्रिन (300/325 एमजी) की टेबलेट चबाकर अथवा पानी में घोलकर तुरंत लेनी चाहिए एवं शीघ्रातिशीघ्र निकटस्थ हृदय चिकित्सक केंद्र पर पहुंचना चाहिए।
-डॉ. अवतार सिंह, शाह सतनाम जी स्पैशलिटी हॉस्पिटल सरसाHeart Machine

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शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त उच्च स्तरीय हरियाणा की नवीनतम कैथ लैब एवं इको कार्डियोग्राफी मशीन की सुविधा उपलब्ध है। स्टंट आदि डालने के लिए प्रख्यात फिलिप्स कंपनी की नवीनतम टेक्नोलॉजी वाली अजूरियन 5 सी 12 मशीन स्थापित की गई है। हृदय संबंधी रोग की जांच के लिए ई.पी.आई. क्यू. सी.वी. एक्स.आई. मशीन भी हैै।

आयुर्वेद चिकित्सा

हृदय रोग की मूल वजह त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) का बिगड़ता संतुलन

आयुर्वेद में हृदय को जीवन का केंद्र माना गया है, जिसकी रक्षा के लिए आहार, जीवनशैली और जड़ी-बूटियों का विशेष संतुलन आवश्यक है। इस पद्धति में हृदय रोग से बचाव के लिए त्रिदोष (वात, पित्त, कफ) का संतुलन, विषाक्त पदार्थों को शरीर से बाहर निकालना और हृदय की मांसपेशियों को मजबूत करना सबसे अहम विषय है।

दिनचर्या और जीवनशैली का भी रखें ख्याल

सुबह जल्दी उठने और समय पर पौष्टिक नाश्ता करने की आदत डालें। शरीर की प्राकृतिक शुद्धि प्रक्रिया को ठीक रखने के लिए रात 10 बजे तक सो जाएं। मानसिक तनाव सीधे हृदय को प्रभावित करता है, इसलिए क्रोध, चिंता और भय से दूर रहकर मन को शांत रखें।

रामबाण हैं योग और आयुर्वेदिक पंचकर्म

अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम तनाव घटाते हैं, जबकि सूर्य नमस्कार से कार्डियोवैस्कुलर क्षमता बढ़ती है। हृदय बस्ती पंचकर्म चिकित्सा में हृदय क्षेत्र पर औषधीय तेल रखा जाता है, जिससे धमनियों की सूजन कम होती है और रक्त प्रवाह बेहतर होता है।

-डॉ. अजय गोपालानी, पूजनीय माता आसकौर जी आयुर्वेद अस्पताल सरसा

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