Langar

Langar: लंगर में चावल की हुई शुभ शुुरुआत

आदिकाल से ही चावल को धार्मिक अनुष्ठानों का प्रतीक माना जाता है। हमारे संस्कारों व रीति-रिवाजों के प्रचलन में चावल का हमेशा से ही प्रमुख स्थान रहा है। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, तप, व्रत, दान इत्यादि के लिए चावल को शुभ पवित्र मानकर शामिल किया जाता है और इसके साथ ही यज्ञ आदि इन धार्मिक अनुष्ठानों को सम्पूर्ण होना माना गया है।

चावल की इस महान परम्परा को चार चांद लगाते हुए पूज्य गुरु संत डॉ. एमएसजी ने डेरा सच्चा सौदा की रसोई का प्रमुख अन्न बनाकर एक शुभ शुुरुआत की है। गत 6 सितंबर को पूज्य गुरु जी के पावन वचनों से चावल का लंगर शुरु किया गया जो साध-संगत के लिए एक बड़ी नियामत है। लंगर घर का यह नया बदलाव एक नया इतिहास है, खुशियों का नया दौर है। तन-मन व रूह के लिए ऊर्जा का नया स्त्रोत है।

पूज्य संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने डेरा सच्चा सौदा में साध-संगत को वितरित किये जाने वाले लंगर में ‘दाल-चावल’ को शामिल करके हमारी अपनी रसोई में मौजूद इस अनमोल पकवान की महत्वता को पुन: स्थापित किया है। आज जब बाजार में तरह-तरह के प्रोटीन फूड्स एनर्जी फूड्स और प्रोसेसड फूड्स उपलब्ध हैं, तब पूज्य गुरु जी का यह कदम हमें एक महत्वपूर्ण बात याद दिलाता है कि पौष्टिक भोजन हमेशा महंगा या जटिल होना जरूरी नहीं है। आप अपने घर में ही सरल और संतुलित भोजन से अपनी रोजमर्रा की पौष्टिक जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। तो जानिए क्यों यह दाल-चावल की साधारण-सी जोड़ी भोजन की सबसे समझदार साझेदारियों में से एक है।

चावल: शुभता और संस्कारों का प्रतीक

भारतीय संस्कृति में अन्न को सम्मान की दृष्टि से देखा गया है। विशेष रूप से चावल का उपयोग लंबे समय से अनेक पूजा-पद्धतियों, धार्मिक अनुष्ठानों और शुभ कार्यों में होता आया है। चावल आज भी पूजा में शुभता और पूर्णता का प्रतीक माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों में चावल, खिचड़ी और अन्य सरल अनाज आधारित व्यंजन ऐसे अवसरों पर बनाए और परोसे जाते रहे हैं। यही कारण है कि चावल भारतीय भोजन में केवल एक अनाज नहीं बल्कि संस्कृति, आतिथ्य और सामूहिकता से जुड़ा खाद्य पदार्थ भी है।

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दाल-चावल को और पौष्टिक बनाने के तरीके:

  • चावल को उबालकर उसका पानी निकल लें। ऐसा करने से स्टार्च निकल जाती है व चावल पचाने में हल्का हो जाता है।
  • भोजन में प्रोटीन बढ़ाने के लिए पर्याप्त दाल लें।
  • मूंग, मसूर, अरहर, उड़द, चना आदि दालों को बदल-बदलकर खाएं, ताकि पोषक तत्वों में विविधता बनी रहे।
  • दाल में अधिक तेल या घी के बजाय हल्का तड़का रखें।
  • चावल की मात्रा अपनी एक्टिविटी लेवल और स्वास्थ्य जरूरत के अनुसार रखें।
  • दाल के साथ नींबू, टमाटर या आंवला जैसे विटामिन-सी के स्त्रोत प्लांट बेस्ड आयरन के अवशोषण में मदद कर सकते हैं।

दाल-चावल सिर्फ एक भोजन नहीं बल्कि भारत की उस भोजन परंपरा का प्रतीक है जिसमें स्वाद, सादगी, संतुलन और अपनापन सब एक ही थाली में मिल जाते हैं। जब अगली बार आपके सामने गरम दाल और भाप उठते चावल की थाली आए तो उसे केवल एक साधारण भोजन न समझें। यह पीढ़ियों से चली आ रही भारतीय भोजन परंपरा और पोषण विज्ञान का एक सुंदर मेल है। गुरु वचनों से शुरु हुआ लंगर का यह नया रूप बेशकीमती अन्न है। यह आत्मसंतुष्टि देने वाला है। रोगों को काटने वाला है। बस, बात है विश्वास की, श्रद्धा की और प्यार की।

पुरातन समय से ये रीत है कि किसी भी धार्मिक यज्ञ की पूर्ति चावल से ही होती है। इसलिए अब डेरा सच्चा सौदा में साध-संगत द्वारा हर दिन एक यज्ञ होता है, जिसमें लंगर में पौष्टिक दाल-चावल का सेवन करने वालों का तन-मन तंदरुस्त व पवित्र होता है व अनेकों रोग कटते हैं। -पूज्य गुरु जी संत डॉ. एमएसजी

बेहतर प्रोटीन, बेहतर पोषण

अलग-अलग प्लांट फूड्स में पाए जाने वाले एमिनो एसिड्स का अनुपात अलग होता है। दालों में कुछ आवश्यक एमिनो एसिड्स कम मात्रा में होते हैं, जबकि चावल उन्हें पूरा करने में मदद कर सकते हैं। इसी प्रकार चावल में कम पाए जाने वाले कुछ एमिनो एसिड्स दालों से मिल जाते हैं। इसलिए दाल और चावल को साथ खाने से भोजन का प्रोटीन क्वालिटी बेहतर हो जाता है। यही वैज्ञानिक कारण है कि दाल-चावल को शाकाहारी भोजन में एक उपयोगी प्रोटीन कॉम्बिनेशन माना जाता है।

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ऊर्जा भी, संतुष्टि भी

चावल से मिलने वाला कार्बोहायड्रेट शरीर को तुरंत और उपयोगी ऊर्जा देता है। जब उसी भोजन में दाल का प्रोटीन और फाइबर जुड़ जाता है, तो भोजन अधिक संतुलित महसूस होता है और पेट भी अपेक्षाकृत देर तक भरा रह सकता है।

क्यों माना जाता है हल्का भोजन

भारतीय घरों में मूंग दाल व चावल या खिचड़ी को अक्सर हल्के भोजन के रूप में चुना जाता है। कम तेल, हल्के मसालों और नरम बनावट में तैयार होने पर यह कई लोगों के लिए आसानी से खाया जाने वाला विकल्प है। बीमारी के बाद भूख कम होने पर या बहुत भारी भोजन से बचना हो, तब भी इसे पसंद किया जाता है। आजकल जेन-जी भी दाल-चावल को अपना कम्फर्ट फूड मानते हैं। साथ ही बच्चे, युवा व बुजुर्ग हर किसी को अपने-अपने तरीके से दाल-चावल खाना अच्छा लगता है।

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