आफिस जॉब में कमर का रखें ख्याल
आफिस जॉब में कमर का रखें ख्याल
अगर आप दिन भर में 6 से 8 घंटे कंप्यूटर, लैपटॉप, आफिस में डेस्क जॉब पर काम करते...
उंगलियों से उकेरता है हूबहू
उंगलियों से उकेरता है हूबहू
उसकी उंगलियों में इतनी जादूगरी छिपी है कि बस एक बार किसी को गौर से निहार लिया तो वे थिरकनें...
Paramedical Courses After 12th: डॉक्टर बनने की राह ‘पैरामेडिकल’
इस लेख में, हम Paramedical Course Kya Hota Hai, Paramedical Courses After 12th, पैरामेडिकल कोर्स लिस्ट, Course Types, Eligibility Requirements, List of Paramedical Courses,...
निरंतर प्रयासरत रहना अनिवार्य है
ब्राजील निवासी पुर्तगाली भाषा के मशहूर लेखक पाओलो कोएलो अपने चर्चित उपन्यास द अल्केमिस्ट में कहते हैं कि जब आप दिल से कुछ चाहते हैं तो सारी कायनात उसे आपसे मिलाने के लिए साजिश रचती है।
तीन दिवसीय कॉलेज फेस्ट “रिटेक” रहा कामयाब, प्रतिभाओं को दिया मंच | Retake Fest...
तीन दिवसीय कॉलेज फेस्ट "रिटेक" रहा कामयाब, प्रतिभाओं को दिया मंच | Retake Fest 2022
रीटेक, एलएस रहेजा कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स के बीएएमएमसी...
Enactus MLNC: सामाजिक परिवर्तन की खोज: उद्यमिता और सामाजिक नवाचार
Enactus MLNC: सामाजिक परिवर्तन को बढ़ावा देने वाला एक आंदोलन
Enactus, वैश्विक रूप से सबसे बड़ा सीखने का मंच, छात्र उद्यमशील नेता और सामाजिक नवप्रवर्तक...
अत्मविश्वास के साथ करें एग्जाम की तैयारी
आमतौर पर देखने को मिलता है कि बच्चे की परीक्षाएं आने पर ही बच्चे और अभिभावकों को पढ़ना व पढ़ाना याद आता है। परीक्षा आते ही अभिभावक बच्चे को सारा-सारा दिन पढ़ाने बैठ जाते हैं और बच्चे पर भी पढ़ाई का बहुत अधिक बोझ पड़ जाता है जिससे बच्चे परीक्षा को भूत समझने लगते हैं और उसे हौवा मानकर उसके नाम से भी चिढ़ते हैं।
डिजिटल अरेस्ट घबराएं नहीं एक्शन लें
डिजिटल अरेस्ट Digital Arrest घबराएं नहीं एक्शन लें -कोई भी सरकारी एजेंसी लोगों को फोन पर धमकाकर पैसे की मांग नहीं करती, अपितु डिजिटल...
कर्मचारियों को बाँध कर रखना आपके अपने हाथ में है
जरा एक कामकाजी कॉर्पोरेट महिला के बारे में या एक फिल्म सेलेब्रिटी महिला के बारे में सोचिये| उसके पास नौकरानी है, खाना बनने के...
फॉरेस्ट्री में करियर की अपार संभावनाएं | Immense possibilities of career in forestry
वन संसाधनों पर हमारी निर्भरता प्राचीन समय से रही है। पशुचारे और र्इंधन तक सीमित रही यह निर्भरता आधुनिक समय में और विस्तृत हुई है। भवन निर्माण, फर्नीचर और कागज उद्योग के लिए कच्चे माल की जरूरत भी वनों के दोहन से जुड़ गई है।















































































