साइबर वर्ल्ड को चाहिए रक्षक
इंटरनेट पर निर्भरता बढ़ने के साथ गोपनीय या व्यक्तिगत सूचनाएं लीक होने का खतरा भी बढ़ा है। इसके अलावा, बैंक अकाउंट में सेंध लगाने...
NMCMUN: नरसी मोनजी की वार्षिक सम्मेलन (The Conference) का समापन
NMC MUN क्लब की तरफ से 30 अप्रैल से 2 मई 2021 के मध्य राष्ट्रीय स्तर का सम्मेलन आयोजित किया।
एनएमसीएमयूएन (NMCMUN 2021): नरसी मोनजी...
स्प्रिंग फेस्ट 2025: आईआईटी खड़गपुर का 66वां सांस्कृतिक महोत्सव 26 जनवरी से
Spring Fest 2025 स्प्रिंग फेस्ट 2025: आईआईटी खड़गपुर का 66वां सांस्कृतिक महोत्सव 26 जनवरी से
आईआईटी खड़गपुर का वार्षिक सामाजिक-सांस्कृतिक महोत्सव 'स्प्रिंग फेस्ट' एशिया के...
पॉलीटेक्निक डिप्लोमा कोर्स के बाद बेहतरीन करियर स्कोप्
पॉलीटेक्निक डिप्लोमा कोर्स के बाद बेहतरीन करियर स्कोप्
क्या आपका पॉलीटेक्निक डिप्लोमा कोर्स अब समाप्त होने वाला है या फिर आप पॉलीटेक्निक डिप्लोमा कोर्स करने...
काम और अध्ययन में बनाएं संतुलन
काम और अध्ययन में बनाएं संतुलन
पढ़ाई के साथ-साथ काम करना कोई नई अवधारणा नहीं है। यह अवधारणा पश्चिमी देशों में काफी समय से सफल...
R. A. Podar College अपने सांस्कृतिक फेस्ट “Enigma” के साथ हमारे बीच
आर ए पोदार कॉलेज अपने सांस्कृतिक फेस्ट "Enigma" के साथ हमारे बीच
देश के शीर्ष वाणिज्य कॉलेजों में शामिल आर ए पोदार कॉलेज ऑफ कॉमर्स...
मुद्रा लोन लेकर लिखी सफलता की इबारत
कुछ कर लूं, कुछ कमा लूं और कुछ दूसरे को दे दूं-असम में रंगिया के रहने वाले हृदय डेका की यही तमन्ना थी। मुद्रा लोन ने इनकी ये तमन्ना पूरी कर दी। 2015 से पहले एक छोटी सी मिठाई की दुकान चलाने वाले हृदय डेका ने स्टेट बैंक आॅफ इंडिया से 50 हजार का मुद्रा लोन लिया और अपनी दुकान डेका स्वीट को विस्तार दिया।
Unique identity: बनाएं अपनी विशिष्ट पहचान
बनाएं अपनी विशिष्ट पहचान
समान योग्यता के प्रतिस्पर्धी आपसे पिछड़ सकते हैं बशर्ते अपने पक्ष को आप सुंदर तरीके से सहजता और शालीनता से रखें।...
भारतीय वायुसेना के हवाई लड़ाके
भारतीय वायुसेना के हवाई लड़ाके Indian Air Force air fighters
भारतीय वायुसेना में पायलट का एक बेहतरीन करियर है। वायुसेना पायलट को हमेशा सजग रहना...
अत्मविश्वास के साथ करें एग्जाम की तैयारी
आमतौर पर देखने को मिलता है कि बच्चे की परीक्षाएं आने पर ही बच्चे और अभिभावकों को पढ़ना व पढ़ाना याद आता है। परीक्षा आते ही अभिभावक बच्चे को सारा-सारा दिन पढ़ाने बैठ जाते हैं और बच्चे पर भी पढ़ाई का बहुत अधिक बोझ पड़ जाता है जिससे बच्चे परीक्षा को भूत समझने लगते हैं और उसे हौवा मानकर उसके नाम से भी चिढ़ते हैं।















































































