Makarasana

Makarasana: तनाव घटाए, पाचन सुधारे मकरासन

आज की तेज भागदौड़ वाली ज़िंदगी में मानसिक तनाव, पीठ दर्द और पाचन संबंधी समस्याएं आम हो गई हैं। ऐसे में योग एक ऐसा माध्यम है जो न केवल शरीर को सुकून देता है बल्कि मन को भी स्थिरता प्रदान करता है। योग की इसी श्रृंखला में एक महत्वपूर्ण और सरल योगासन है मकरासन, जो नाम में जितना शांत प्रतीत होता है, उतना ही शरीर को भीतर से गहराई से राहत देने वाला है।

मगरमच्छ की तरह विश्रामदायक:

मकरासन दो शब्दों से मिलकर बना है मकर यानी मगरमच्छ और आसन यानी स्थिति या मुद्रा। यह आसन करते समय शरीर की आकृति मगरमच्छ जैसी प्रतीत होती है, जो पानी में स्थिरता से लेटा होता है। यही कारण है कि इसे विश्राम मुद्रा के रूप में भी जाना जाता है।

पीठ और रीढ़ को दे मजबूती:

मकरासन विशेष रूप से पीठ, कमर और रीढ़ की हड्डी के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। आयुष मंत्रालय के अनुसार, यह आसन पीठ की मांसपेशियों को राहत देता है और स्लिप डिस्क या साइटिका जैसी समस्याओं में राहत पहुंचाता है। इससे रीढ़ की हड्डी में लचीलापन बढ़ता है और कमर की जकड़न दूर होती है। आॅफिस में लंबे समय तक बैठने वालों या श्रमशील लोगों के लिए यह एक वरदान साबित हो सकता है।Makarasana yoga

तनाव और चिंता से राहत:

मकरासन केवल शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। इस मुद्रा में शरीर को विश्राम मिलता है, जिससे मस्तिष्क की तंत्रिकाओं को शांति मिलती है। नियमित अभ्यास से मन शांत होता है, चिंता कम होती है और एकाग्रता में सुधार आता है। आयुष मंत्रालय भी इस बात को मानता है कि यह आसन मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

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पाचन शक्ति को करता है बेहतर:

जो लोग गैस, अपच या कब्ज से परेशान रहते हैं, उनके लिए मकरासन बेहद लाभकारी है। इस आसन में पेट के बल लेटने से पेट पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे पाचन अंग सक्रिय होते हैं। साथ ही, गहरी और धीमी सांस लेने से शरीर में आॅक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, जिससे पाचन क्रिया में सुधार होता है। यह आसन पेट की गर्मी को शांत करता है और भोजन के पचने की प्रक्रिया को तेज करता है। -डेस्क

मकरासन कैसे करें

  • एक समतल स्थान पर योगा मैट बिछाएं।
  • पेट के बल लेट जाएं और पैरों को थोड़ा फैलाकर पंजे बाहर की ओर रखें।
  • सिर को अपने हाथों पर आराम से टिकाएं। बाईं या दाईं ओर मोड़ सकते हैं।
  • आंखें बंद करें, शरीर को ढीला छोड़ दें और सामान्य रूप से सांस लें।
  • 3 से 5 मिनट तक इसी स्थिति में रहें।

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