World Blood Donor Day

रक्तदान कर मानवता के हित में काम करें  विश्व रक्तदाता दिवस प्रत्येक वर्ष ( World Blood Donor Day )14 जून को मनाया जाता है। आज भी बहुत से लोग ऐसे हैं, जो रक्तदान करने से डरते और संकोच करते हैं। हर साल इस दिन को एक खास थीम के तहत मनाया जाता है।

आपके द्वारा किया गया रक्तदान किसी की जिंदगी बचा सकता है। आज भी भारत में रक्तदान काफी कम ही लोग करते हैं, ऐसे में आपातकालीन स्थिति में जरूरतमंद लोगों को खून नहीं मिल पाता है। यदि आप ब्लड डोनेट करेंगे, तो इसमें आपका भी फायदा होगा। ब्लड डोनेट करने के स्वास्थ्य को कई लाभ होते हैं, शायद इसलिए इसे महादान कहा गया है।

हार्ट अटैक की संभावना कम होती है:

आज के समय में हार्ट अटैक जैसी बीमारी से कई लोग अपनी जान गंवा देते हैं। यदि हमारे शरीर में खून थोड़ा मोटा यानी गाढ़ा हो जाता है तो रक्त में थक्का आसानी से जमता है और हार्ट अटैक इस कारण से भी होता है जब आपका ह्रदय ठीक तरीके से रक्त को पंप नहीं कर पाता तो यह फेल हो जाता है। नियमित रूप से रक्तदान करने से शरीर में खून पतला होता है जिससे ह्रदय का संचालन सही तरह से पूरे शरीर में कर पाता है।

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जिससे ह्रदय को अपना कार्य करने में कोई दिक्कत नहीं होती एवं ह्रदय स्वस्थ रहता है क्योंकि रक्तदान के बाद आपके शरीर में नया खून बनता है इसीलिए वह पतला और सही बनता है। इसीलिए किसी भी ऐसे व्यक्ति जिसे हृदय से संबंधित कोई दिक्कत हो वह रक्तदान कर सकता है, इससे उसे नुकसान नहीं, बल्कि फायदा ही होता है।

वजन मेंटेन रहता है:


आज के समय में तेल और फैट युक्त भोजन करने से वजन बढ़ने की समस्या बहुत से लोगों में देखी जाती है। वजन बढ़ना आपके शरीर के लिए बिल्कुल भी अच्छा नहीं होता है इससे आप आलसी बन सकते हैं। साथ ही आपको कई कार्यों को करने में असुविधा भी होने लगती है। परंतु वह व्यक्ति नियमित रूप से रक्तदान करता है उसका वजन मेंटेन रहता है क्योंकि ब्लड डोनेट यानी रक्तदान से शरीर में नए ब्लड सेल्स बनते हैं वे फैट्स को जमने नहीं देते।

कोई भी स्वस्थ्य व्यक्ति जिसका वजन 50 किलोग्राम से अधिक हो वह बिना किसी दिक्कत के वर्ष में तीन से चार बार रक्तदान कर सकता है। शरीर का वजन मेंटेन रखने के लिए शरीर में अच्छे रक्त एवं अच्छे रक्त का सही मात्रा में होना आवश्यक होता है इसीलिए रक्तदान करने वाला व्यक्ति स्वस्थ रहता है और अपना वजन रख पाता है।

लीवर स्वस्थ रहता है:

हमारे रक्त में आयरन पाया जाता है। रक्त में आयरन की सही मात्रा एक स्वस्थ शरीर के लिए आवश्यक होता है परंतु अगर रक्त में आयरन की मात्रा सही ना हो तो यह शरीर में कई बीमारियों को जन्म दे सकता है। शरीर में रक्त में यदि आयरन की मात्रा बढ़ जाए तो इससे लीवर पर दबाव बढ़ता है जिससे लिवर अपना कार्य सही तरह से नहीं कर पाता एवं शरीर में लिवर से संबंधित बीमारियां उत्पन्न हो जाती है।

परंतु यदि आप नियमित रूप से रक्तदान करते हैं तो इससे आपके शरीर के रक्त में आयरन की मात्रा मैंटेन रहती है, जिससे लीवर सही तरह से कार्य कर पाता है एवं इससे संबंधित कोई भी बीमारी नहीं होती। रक्तदान करके शरीर में आयरन की मात्रा को सही रखना एक स्वस्थ शरीर के लिए बहुत ही आवश्यक होता है।

शरीर में नई ऊर्जा आती है:

एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति के शरीर में पांच लीटर जितना खून होता है। परंतु यह रक्त शरीर में इकट्ठा नहीं रहता है। रक्त में आरबीसी यानी रेड ब्लड सेल जिसे लाल रक्त कोशिका भी कहा जाता है, पाया जाता है जिसकी जीवन अवधि कुछ दिनों की ही होती है। इसका मतलब हर वक्त हमारे शरीर में नया रक्त बनता है।

हमारे शरीर में रक्त बनाने का काम पूर्ण भैरव यानी अस्थि मज्जा में होता है जो हड्डियों के अंदर पाया जाता है। यदि आप नियमित रूप से रक्तदान करते हैं तो इससे आपके शरीर में नए रक्त बनाने की प्रक्रिया में तेजी आती है जिस कारण नया रक्त बनने से आपके शरीर में एक नई ऊर्जा प्रवाह होती है। शरीर में नए रक्त कोशिकाओं का बनना रोज ही होता है जिस कारण रक्तदान कर देने से यह आपके शरीर को नुकसान के बजाय फायदा ही पहुंचाता है।

टल जाता है कैंसर का खतरा:

हमारे शरीर में दो प्रकार के ब्लड होते हैं एक आॅक्सिजनेटेड ब्लड यानी जिसमें आॅक्सीजन पाया जाता है और दूसरा डीआॅक्सीजनेटेड ब्लड जिसमें आॅक्सीजन को शरीर के विभिन्न अंगो द्वारा इस्तेमाल कर लिया जाता है। डीआॅक्सीजनेटेड ब्लड भी कहा जाता है। यदि नियमित रूप से रक्तदान करते हैं तो इससे आपके रक्त में जो विषैले और हानिकारक पदार्थ होते हैं वह आपके शरीर से बाहर निकल जाते हैं।

डॉक्टरों ने अपने रिसर्च में पाया है कि रक्तदान करने से कैंसर और उस जैसी कुछ अन्य बीमारियां होने का खतरा भी शरीर को कम रहता है। पुराने रक्त के निकल जाने और नए एवं स्वस्थ रक्त के बनने से शरीर बहुत सी बीमारियों के खिलाफ लड़ने में ज्यादा सक्षम बनता है।

शरीर से घटती है कैलोरीज:

आज के समय में स्वस्थ रहने के लिए कई प्रकार के एक्सरसाइज और व्यायाम आदि करते हैं। विभिन्न प्रकार के कसरत आदि करने से हमारे शरीर की कैलोरीज बर्न होती है, जिसका बर्न होना एक स्वस्थ शरीर के लिए जरूरी होता है। हम एक दिन में जितनी ज्यादा कैलोरीज बर्न कर सके उतना ही वह हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है।

नियमित रूप से रक्तदान करने पर भी शरीर में कैलोरीज बर्न होती है। डेढ़ पाव जितना खून का रक्तदान करने से आपके शरीर से 650 कैलोरीज तक बर्न हो सकती है। इसीलिए अन्य अनेक फायदों के साथ साथ रक्तदान करने से बिना कोई कसरत किए ही आपके शरीर से कैलोरीज बर्न होते हैं एवं आप अपने शरीर को स्वस्थ बनाते हैं।

इसलिए जरूरी है रक्तदान

  • ब्लड डोनेट कर एक शख्स दूसरे शख्स की जान बचा सकता है।
  • ब्लड का किसी भी प्रकार से उत्पादन नहीं किया जा सकता और न ही इसका कोई विकल्प है।
  • देश में हर साल लगभग 250 सीसी की 4 करोड़ यूनिट ब्लड की जरूरत पड़ती है, जबकि सिर्फ 5,00,000 यूनिट ब्लड ही मुहैया हो पाता है।
  • हमारे शरीर में कुल वजन का 7% हिस्सा खून होता है।
  • आंकड़ों के मुताबिक 25 प्रतिशत से अधिक लोगों को अपने जीवन में खून की जरूरत पड़ती है।

रक्तदान में डेरा सच्चा सौदा के नाम रिकार्ड

  • 7 दिसम्बर 2003 क ो 8 घंटों में सर्वाधिक 15,432 यूनिट रक्त दान।
  • 10 अक्त ूबर 2004 क ो 17921 यूनिट रक्त दान।
  • 8 अगस्त 2010 को मात्र 8 घंटों में 43,732 यूनिट रक्त दान।

ऐसे तय होते हैं ब्लड ग्रुप

खून जिन लाल रक्त कोशिकाओं से बना होता है, उनके ऊपर प्रोटीन की एक परत होती है, जिन्हें एंटीजन कहा जाता है। ब्लड टाइप ए में सिर्फ एंटीजन ए होते हैं, ब्लड बी में सिर्फ बी, ब्लड एबी में दोनों होते हैं। टाइप ओ में दोनों ही नहीं होते। लाल रक्त कोशिकाओं में एक और तरह का एंटीजन होता है। जिसे कहते हैं आरएचडी। यह एंटीजन 61 आरएच टाइप के एंटीजनों के समूह का हिस्सा होता है। जब खून में आरएचडी हो तो इसे पॉजिटिव कहा जाता है और अगर न हो तो नेगेटिव टाइप कहा जाता है।

  • बीस तरह से सामान्य ब्लड ग्रुप्स की पहचान करके उनका वर्गीकरण बीस तरह किया जाता है: ए-, बी +, बी-, एबी +, एबी-, ओ+ और ओ-।
  • यदि किसी को खून चढ़ाने की जरूरत पड़े तो उसके ब्लड ग्रुप का पता होना जरूरी होता है।
  • अगर नेगेटिव ग्रुप वाले शख्स को पॉजिटिव वाले डोनर का खून चढ़ाया जाए तो यह उनके लिए जानलेवा हो सकता है। ऐसा इसीलिए क्योंकि उसके शरीर के एंटीबॉडीज इस खून को अस्वीकार कर सकते हैं।
  • इसी कारण ओ- ब्लड ग्रुप वालों को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है। क्योंकि इसमें न तो एंटीजन ए, बी होते हैं और न ही आरएचडी। ऐसे में खून बिना रिजेक्ट हुए अन्य ग्रुप वालों के खून में मिक्स हो जाता है।

कौन कर सकता है रक्तदान

  • 18 से 65 साल की बीच वाला स्वस्थ व्यक्ति, जिसका वजन 45 किलो से ज्यादा और हेमोग्लोबिन 12.5 ग्राम से ज्यादा हो।
  • एक बार रक्तदान करने के बाद तीन महीने के बाद फिर से रक्तदान किया जा सकता है।
  • बल्ड डोनेट करने से पहले हल्का भोजन और एक पहले खूब सारा पानी पीना चाहिए।
  • रक्तदान करने वक्त पेट भरा होना बहुत जरूरी है।
  • बल्ड डोनेशन में केवल एक यूनिट का खून लिया जाता है। एक यूनिट में लगभग 1 पिंट (400-525 मिली लीटर) खून होता है। जिससे तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है।
  • आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ओ नेगेटिव वाला ब्लड ग्रुप युनिवर्सल डोनर कहलाता है। 0 नेगेटिव बल्ड ग्रुप के शख्स किसी भी ब्लड ग्रुप के शख्स को दिया जा सकता है। वहीं अगर किसी बच्चे को खून की कमी है और उसका ब्लड ग्रुप न पता हो तो उसे ओ नेगेटिव ब्लड ग्रुप का खून चढ़ाया जा सकता है।

जो नहीं कर सकते रक्तदान

  • पीरियड्स के समय महिलाएं
  • ब्रेस्टफीडिंग करवाने वाली महिलाएं
  • 18 साल से कम उम्र के लोग
  • 65 साल से ज्यादा उम्र के लोग
  • जिनका 12 प्रतिशत से कम हेमोग्लोबिन स्तर हो
  • 45 किलों से कम वजन के लोग
  • किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित लोग
  • एचआईवी, सिफलिस हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस सी और मलेरिया जैसी बीमारियों से ग्रस्त लोग

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