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Avatar Diwas पौधारोपण कर मनाई खुशियाँ

पूज्य गुरु जी का यह 59वां पवित्र अवतार दिवस पूरे देश व समाज के लिए खुशियों की नई सुबह लेकर आया। इस पवित्र 59वें अवतार दिवस पर साध-संगत ने पूज्य गुरु जी को उपहार स्वरूप पौधारोपण का अनोखा गिफ्ट दिया जो धरा के लिए खुशहाली की सौगात लाने वाला सिद्ध हो रहा है।

वर्णनीय है कि पूज्य गुरु जी ने साध-संगत को यह वचन फरमाए थे कि अगर आप इस दिन हमें गिफ्ट देना ही चाहते हैं तो आप पौधे लगाएं व उनकी संभाल करें, यही हमारे लिए बेशकीमती गिफ्ट है। इसलिए साध-संगत इस पवित्र दिन को बेमिसाल बनाने के लिए पौधे लगाती है। हर ब्लॉक बढ़-चढ़कर इस मुहिम में हिस्सा लेता है।

यह सिलसिला वर्ष 2008 से चल रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक डेरा सच्चा सौदा के द्वारा करोड़ों पौैधे लगाए जा चुके हैं और उनमें 80-85 प्रतिशत कामयाब भी हो चुके हैं। साध-संगत की यह मुहिम धरा के लिए संजीवनी है। वीरान व बंजर धरा डेरा सच्चा सौदा के इन प्रयासों की बदौलत हरी-भरी हो चुकी है क्योंकि डेरा प्रेमी पौधा लगाने या फोटो करवाने तक ही सीमित नहीं रहते। वे हर पौधे की बड़े होने तक देखभाल करते हैं

जिससे आज उनके द्वारा लगाए करोड़ों पौधे लहलहा रहे हैं व अपने मुर्शिद के वचनों पर चलते हुए इस पौधारोपण को बड़ी शिद्दत के साथ करते हैं। उनका यह प्रयास वर्ल्ड रिकार्ड बन चुका है। डेरा सच्चा सौदा के नाम 35 करोड़, 7 लाख, 92 हजार 692 पौधे लगाने का रिकार्ड है। पूज्य गुरु जी के इस अवतार दिवस के उपलक्ष्य में 14 अगस्त को देश ही नहीं अपितु विदेशों में भी श्रद्धालुओं ने बड़ी संख्या में पौधे लगाकर अपनी खुशी का इज़हार किया।

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पूरी दुनिया में उनके इस अभियान को देखा व सराहा गया। भारत में हर राज्य में ब्लॉक स्तर पर पौधे लगाए गए वहीं विदेशों में कनाडा, आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, अमेरिका, सिंगापुर, दोहा, कतर, आबुधाबी, बहरीन, फिलिपींस आदि विभिन्न देशों में स्थानीय लोगों व संस्थाओं के साथ मिलकर पौधे लगाए गए। साध-संगत के इस प्रयास की वहाँ की संस्थाओं, संगठनों व सरकारों ने भूरि-भूरि प्रशंसा की व कई जगह सम्मानित भी किया गया।

हर वर्ष इस प्रकार मनाए जाने वाला यह पावन दिवस देश-विदेश में लोगों की जुबां पर है। हर किसी के दिलो-दिमाग पर यह पौधारोपण छाया हुआ है। इस प्यारे दिन पर सिर्फ पौधे लगाना ही नहीं बल्कि और भी कई प्रकार के मानवता हित के सेवाकार्य करके साध-संगत अपनी खुशियाँ दूसरों के साथ सांझा करती है। उनका मकसद यही होता है कि इस दिन ज्यादा से ज्यादा भलाई कार्य किए जाएं और समाज को एक नई प्रेरणा मिल सके।

इसलिए कहीं खूनदान किया जाता है, कहीं राशन, वस्त्र इत्यादि बांटे जाते हैं और कहीं मकान बनाकर दिए जाते हैं। पूज्य गुरु जी की यह प्रेरणा लोगों में नई उम्मीद जगा रही है। उम्मीद, उत्साह व उमंग से भरा यह पावन दिन 15 अगस्त हर किसी के लिए अविस्मरणीय बन गया है। -डेस्क

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