Teach: बच्चों से बोलें- ‘यह मुझे सिखाओ’ वो बेहतर बनेंगे
बच्चा छोटा हो या बड़ा जीवन में आने वाली चुनौतियों का आत्मविश्वास के साथ सामना करने के लिए पेरेंट्स को उसे बचपन से ही तैयार करना पड़ता है। बच्चों की अच्छी परवरिश में सही शिक्षा के साथ-साथ लाइफ स्किल्स का भी अहम किरदार होता है। जो माता-पिता अपने बच्चों को जीवन में आने वाली इन अलग-अलग स्थितियों का सामना करना नहीं सिखाते, उनके बच्चों में आत्मविश्वास की कमी हमेशा बनी रहती है।
ऐसे बच्चे कॉन्फिडेंस के साथ दूसरे लोगों से बात तक नहीं कर पाते हैं। जिसका असर आगे चलकर उनके शारिरिक और मानसिक विकास पर भी पड़ता है। अगर आपको भी लगता है कि किसी वजह से आपके बच्चे में भी आत्मविश्वास की कमी है तो ये टिप्स अपनाकर आप उसके भीतर खोया विश्वास दोबारा जगा सकते हैं।
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बच्चे से सिखाने को कहें:
हफ्ते में एक बार बच्चे से कहें कि मुझे कुछ सिखाओ। बच्चे को यह महसूस कराने के लिए कि वह भी बहुत कुछ जानता है। हफ्ते में सिर्फ पाँच मिनट निकालकर उससे कुछ सीखना काफी हो सकता है। अगर बच्चा ड्राइंग, बिल्डिंग, कुकिंग, गेमिंग या डांस कर रहा है तो उससे पूछें कि यह तुमने कैसे किया?
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब माता-पिता बच्चे से कहते हैं कि मुझे यह समझ नहीं आया, तुम मुझे सिखाओ। तो बच्चा खुद को सिर्फ सीखने वाला नहीं, बल्कि विशेषज्ञ महसूस करता है। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है, कम्युनिकेशन मजबूत होता है, जिज्ञासा बढ़ती है और पैरेंट्स से जुड़ाव भी मजबूत होता है।
निर्णय लेने की आजादी दें:
बच्चे को छोटे-छोटे निर्णय लेने की आजादी दें। उदाहरण के लिए उससे पूछें कि उसे नाश्ते में क्या खाना चाहिए, कौन-सा खेल खेलना है, क्या पढ़ना है इत्यादि। ऐसे छोटे-छोटे निर्णय लेने से आपके बच्चे का सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।
खुद का काम खुद करने दें:
बच्चे को आत्मनिर्भर बनाना चाहते हैं, तो उसे अपने काम जैसे कपड़े फोल्ड करना, अपने कमरे को साफ रखना, अपनी चीज़ों का ध्यान खुद रखना जैसे काम खुद से करने दें। आपके ऐसा करने से बच्चे को महसूस होगा कि उसे अपने किसी काम के लिए दूसरों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। बच्चों को अपनी जिम्मेदारी का अहसास होने पर वो जीवन में आने वाली हर बड़ी चुनौती का सामना करने से डरेंगे नहीं, बल्कि उसका डटकर सामना करेंगे।
कोशिश करने पर तारीफ करें:
अक्सर हम बच्चे की तारीफ तभी करते हैं जब वह फर्स्ट आता है या कोई ट्रॉफी जीतता है, लेकिन आत्मविश्वास बढ़ाने का असली मंत्र कोशिश में छिपा है। अगर आपका बच्चा किसी खेल या परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत करता है तो उसकी मेहनत की तारीफ करें, चाहे नतीजा कुछ भी हो। इससे उसका डर खत्म होता है।
गलतियों से सीख लेना सिखाएं:
कई बार बच्चे गलती करने पर सहम जाते हैं क्योंकि उन्हें डांट का डर होता है। एक सपोर्टिव पेरेंट के रूप में आपको उन्हें यह सिखाना चाहिए कि गलतियाँ इंसान से ही होती हैं और वे सफलता की सीढ़ी हैं। अगर बच्चे से कांच का गिलास टूट जाए या वह किसी कॉम्पिटिशन में फेल हो जाए तो चिल्लाने के बजाय उससे पूछें, उन्हें सिखाएं कि कैसे वे और बेहतर कर सकते हैं।
खुद बनें रोल मॉडल:
अगर आप खुद चुनौतियों से घबराते हैं या खुद की आलोचना करते हैं, तो बच्चा भी वही सीखेगा। अपनी गलतियों को स्वीकार करें और उन्हें शांति से सुधारें। जब बच्चा आपको पॉज़िटिव और आत्मविश्वास से भरा देखेगा तो वह भी उन्हीं गुणों को अपना लेगा। -डेस्क































































