Editorial: विश्व भाईचारे का संदेश है हिंदू संस्कृति -सम्पादकीय
हिंदू संस्कृति के मुख्य अंग वेद, उपनिषदों में विश्व भाईचारे को बनाए रखने पर बल दिया जाता है। इसे विस्तार से समझने के लिए महा उपनिषद के निम्नलिखित श्लोक पर गौर करें। इसे ‘वासुधैव कुटुम्बकम’ का नाम दिया गया है।
अय निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्।।
महाउपनिषद (अध्याय 6, मंत्र 71)
इस श्लोक का अर्थ जानने से पहले इन दो शब्दों के संधि विच्छेद से ही इसका महत्व स्पष्ट मालूम पड़ता है।
वसुधा: मतलब धरती, ऐव: ही और कुटुम्बकम् अर्थात् परिवार, जिसका अर्थ है कि यह सम्पूर्ण पृथ्वी और इस पर विचरण करने वाले सभी जीव प्राणी एक ही परिवार हैं। ‘दो’ की भावना स्वार्थमयी भावना की जनक है। अब जरा महा उपनिषद के इस श्लोक के पूरे अर्थ को भी समझिए-
यह मेरा भाई है और वह कोई दूसरा है, ऐसी सोच संकुचित दायरे वाले लोगों की ही हो सकती है। इसके विपरीत जो लोग उदार-हृदय (विशाल दया-भावना) वाले होते हैं, उनके लिए तो यह सम्पूर्ण पृथ्वी ही उनका अपना परिवार है। स्पष्ट अर्थों में यही आया है कि सम्पूर्ण धरती एक ही परिवार है। तो बार-बार यह ही बात सामने आती है वैश्विक भाईचारा।
पूरा विश्व एक ही परिवार है। भारतीय संस्कृति सबसे महान है। हजारों वर्ष पहले से ही वेद-उपनिषदों में वैश्विक बंधुत्व (विश्व भाईचारे) बनाए रखने का उपदेश है। पूरे विश्व के प्रति सच्ची सहानुभूति और आपसी भाईचारा हो जिसकी कि आज के इस स्वार्थी युग में और भी ज्यादा आवश्यकता है। सभी धर्मों में इसी पवित्र भावना को अपनाने की शिक्षा है।
लेकिन आज का स्वार्थी इन्सान अपने लालचवश यह मेरा, यह मेरा, यह भी मेरा, बस मेरा ही मेरा हो, मैं ही रहूं, इस लालची भावना को अपनाकर विश्व भाईचारे को तोड़ने की कोशिश में लगा हुआ है। लोगों को जात-धर्म के नाम पर बांटा जा रहा है। अपने-आपको बड़ा व दूसरों को छोटा बताकर, ऊँच-नीच की दीवारें खड़ी की जा रही हैं। समाज के हालात इतने दयनीय बना दिए गए हैं कि आपसी प्यार, विश्वास खत्म हो चुका है।
ऐसे समय में डेरा सच्चा सौदा उम्मीद की एक नई सुबह लेकर आया है। आपसी प्यार, विश्वास बढ़ाने की शिक्षा देकर समाज को संवारा जा रहा है। आप देख सकते हैं कि डेरा के अनुयायी अपने सतगुरु के पावन वचनों से लोगों की सहायता करते हैं। कोई भी दीन-दु:खी उन्हें मिल जाता है, बिना किसी भेदभाव के उसकी मदद की जाती है। कोई भी उन्हें पीड़ित मिलता है, चाहे वो मंदबुद्धि ही क्यों न हो, लावारिस ही क्यों न हो, अनुयायी बढ़-चढ़कर उसका भला करते हैं।
पावन शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए नि:स्वार्थ भाव से मंदबुद्धियों का खान-पान, स्वास्थ्य, चिकित्सा, इलाज ही नहीं करवाते बल्कि उनसे उनके परिवार की जानकारी प्राप्त करके हजारों किलोमीटर का सफर करके परिजनों से वर्षों से बिछुड़ों को खुद जाकर मिला देते हैं।
पूछें उस माता, उस बहन, उस पिता व उसके भाई से, उनके परिवार से जब उनके किसी बिछुड़े हुए अपने को उनसे मिलाया जाता है जो इतने वर्षों तक रो-धोकर अपनी अंश की आशा को खो चुके थे। क्या यह छोटी सी बात है! थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए डेरा सच्चा सौदा के ये अनुयायी, शाह सतनाम जी ग्रीन एस वैल्फेयर कमेटी के सदस्य व अन्य सेवादार मददगार बन रहे हैं।
पटियाला, सरसा जैसे शहरों के बड़े हस्पतालों में ये पीड़ित जिंदगी-मौत की जंग लड़ रहे हैं और केवल मात्र निश्चित समय पर प्राप्त ब्लॅड के सहारे ही जीवित हैं। केवल ब्लॅड ही उनके जीवन का सहारा है। ये सेवादार अपना सैकड़ों यूनिट रक्त दान करके उन्हें जीवनदान देने की भरसक कोशिश में लगे हुए हैं।
तो क्या ये सेवादार अपने स्वार्थ या अपनी वाह-वाही के लिए ये सब कर रहे हैं, नहीं। बिल्कुल भी नहीं है ऐसा। बस, अपने प्यारे गुरु मुर्शिदे-कामिल की इस पावन शिक्षा के अनुसार कि ब्लॅड की कमी से किसी की जान न जाने पाए। सड़क दुर्घनाओं में रोज़ाना कितने ही लोग घायल हो जाते हैं और उन्हें फौरी तौर पर ब्लॅड की आवश्यकता पड़ सकती हैं। पता चलने पर ये सेवादार अपने मुर्शिद प्यारे की शिक्षा के अनुसार खुद वहाँ पहुँच कर उनके लिए नि:स्वार्थ भाव से अपना खून दान करते हैं।
लेख के शीर्षक के अनुसार कि सारा विश्व हमारा ही परिवार है। वेद-उपनिषेदों की इस पवित्र शिक्षाओं का प्रैक्टिकली रूप आप अगर आज देखना चाहते हैं तो डेरा सच्चा सौदा में होने वाले रूहानी सत्संगों में खुद अपनी आँखों से भी देख सकते हैं जहाँ हर जात-धर्म के लोग मिलकर बैठते हैं।
एक जगह ही लंगर-भोजन खाते हैं और सब मिलकर भजन-बंदगी करते हैं। देश-विदेश से करोड़ों डेरा श्रद्धालु चाहे कोई किसी भी धर्म-जाति से है यहाँ पर पहुँच कर एक परिवार के रूप मेें दिखाई देते है। सच्चाई भी यही है कि वैश्विक भाईचारे ‘वसुदेव कुटुम्बकम्’ की प्रत्यक्ष मिसाल है डेरा सच्चा सौदा सर्वधर्म सत्संग।






























































