Touching Feet: परंपरा और ऊर्जा का संचार करता है चरण स्पर्श
झुककर पैर छूना शरीर के लिए एक तरह का योग है, जो रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन और रक्त संचार को बढ़ाता है। आशीर्वाद के समय बोले गए सकारात्मक शब्द व्यक्ति के अवचेतन मन पर गहरा प्रभाव डालते हैं। शोध बताते हैं कि जो बच्चे अपने दादा-दादी के करीब होते हैं, उनमें विपरीत परिस्थितियों को झेलने की शक्ति अधिक होती है।
बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि अपनी जड़ों से जुड़ने और सकारात्मक ऊर्जा को ग्रहण करने का विज्ञान है। यह हमें विनम्र बनाता है और जीवन की चुनौतियों से लड़ने के लिए एक अदृश्य मानसिक शक्ति देता है। अगली बार जब आप किसी बुजुर्ग के पैर छुएं, तो महसूस कीजिएगा कि आपके भीतर ऊर्जा का एक नया प्रवाह शुरु हो रहा है।
हमारी भारतीय संस्कृति हमेशा से ही विविध संस्कारों की परिचायक रही है, ये दुनिया की सबसे प्राचीनतम संस्कृतियों में से एक है और इसे दुनिया की सभी संस्कृतियों की जननी भी माना गया है। इस संस्कृति में छोटों को आशीष और बड़ों को आदर देने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। इसी परंपरा को हम ‘चरणस्पर्श, चरणवंदन या पैर छूना’ कहते हैं। जिस तरह चुम्बक लोहे को आकर्षित कर अपनी ओर खींचता है, उसी तरह अच्छे आचरण वाले व्यक्ति भी हमें अपनी ओर आकर्षित करते हैं और हम सहसा ही झुक कर उन्हें चरणस्पर्श कर प्रणाम करते हैं।
आज की पीढ़ी को यह थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन अगर हम इसे विज्ञान और मनोविज्ञान के नज़रिए से देखें, तो चरण स्पर्श करना ऐसी परंपरा है, जिससे हम मानसिक शांति प्राप्त कर सकते हैं। शरीर में ऊर्जा का नियंत्रण केन्द्र मस्तिष्क है और हाथ-पैर इस ऊर्जा का अंतिम छोर या आदान-प्रदान केन्द्र होते हैं। जब हम झुककर किसी बड़े के पैर छूते हैं, तो हमारे हाथों की उंगलियाँ उनके पैरों के अंगूठों के संपर्क में आती हैं। इससे एक क्लोज्ड सर्किट बनता है। उनके पैरों से निकलने वाली सकारात्मक ऊर्जा हमारे हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश करती है, जिससे हमारे भीतर एक जुड़ाव बनता है।
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विनम्रता का विकास:
झुकना विनम्रता का प्रतीक है। जब हम किसी के सामने झुकते हैं, तो हमारा अहंकार कम होता है। अहंकार कम होने से मस्तिष्क में तनाव पैदा करने वाले हार्मोन घटते हैं। यह आत्म-सम्मान और मानसिक शांति को बढ़ाता है। जो व्यक्ति झुकना जानता है, उसका मानसिक स्वास्थ्य उन लोगों से बेहतर होता है जो निरंतर तनाव और प्रतिस्पर्धा में रहते हैं।
आशीर्वाद का विज्ञान:
जब कोई बुजुर्ग हमारे सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद देता है, तो उस स्पर्श का गहरा असर होता है। बुजुर्गों के स्नेहपूर्ण स्पर्श से हमारे मस्तिष्क में आॅक्सीटोसिन हार्मोन रिलीज़ होता है, जिसे लव हार्मोन भी कहते हैं। यह हार्मोन हमें सुरक्षा, प्यार और अपनेपन का अहसास कराता है, जिससे डिप्रेशन और अकेलेपन जैसी समस्याएं दूर होती हैं। यह परंपरा परिवारों को जोड़े रखने का एक तरीका है। जब बच्चे बुजुर्गों का आशीर्वाद लेते हैं, तो बुजुर्गों में उपयोगिता का अहसास जागता है, जो उनकी उम्र बढ़ाने में सहायक है। वहीं बच्चों को एक अनुभवी मार्गदर्शन और मनोवैज्ञानिक सुरक्षा मिलती है। पीढ़ियों के बीच यह जुड़ाव समाज को टूटने से बचाता है।
चरणस्पर्श की ये परंपरा धर्म, अध्यात्म और विज्ञान की दृष्टि से काफी उपयोगी और महत्वपूर्ण है। देखा गया है कि, कोई व्यक्ति चाहे कितना ही क्रोधित या कठोर स्वभाव का क्यों न हो, अगर हम उसके पैर छूते है, तो बदले में उसका हाथ हमें आशीर्वाद देने के लिए ही उठता है। इसलिए चरण स्पर्श, चरणवंदन, चरण स्तुति, चरण पूजा या चरण स्मृति कभी भी व्यर्थ नहीं जाती, इनके अच्छे परिणाम जरूर मिलते हैं।
-मुकेश त्यागी
































































