Editorial: गुरू की महिमा कथन ना जाए -सम्पादकीय
गुरु उस शक्ति का नाम है जिसकी महिमा वेद-पुराण, ग्रंथ-शास्त्र और सब ऋषि-मुनि व महापुरुष करते हैं। गुरु सर्वोच्च है। गुरु ही सब कुछ है। गुरु से ही सब कुछ है। यहाँ तक कि चारों युगों का महत्व गुरु के अधीन ही है। गुरु के अधीन ही सब चलायमान है। महापुरुषों का कथन है कि धरती पर गुरु न हो तो एक पल के लिए भी धरती का टिकना संभव नहीं है।
धरती, आकाश, पाताल, चाँद, सूरज सब का खेल खत्म हो जाए, अगर गुरु की शक्ति मौजूद न हो। वो ऐसी महानतम शक्ति है, जिसके सामने सब नतमस्तक हैं। गुरु से परे कुछ नहीं है। सब ऋषि-मुनि, पीर-पैगम्बर, अवतार गुरु के सामने अपने-आपको शून्य समझते हैं। इतिहास गवाह है कि महापुरुष-अवतार जो धरती पर आए, उन्होंने भी अपने-आपको गुरु के आगे तुच्छ समझा। वो अपने गुरु के अधीन रहे। तन-मन से गुरु की सेवा की और गुरु की आज्ञा पर चले। इतने बड़े महापुरुष-अवतार जिन गुरुओं के अधीन रहे, उनकी शक्ति का अंदाजा लगाना आसान नहीं।
गुरु की शक्ति, उनका बल, उनकी चेतना को समझ पाना आम इन्सान के बस की बात नहीं होती। वो भले ही हमारी तरह रहते हैं, हमारी तरह ही दिखते हैं लेकिन उनका आत्मिक स्वरूप, आत्मिक सौंदर्यबौद्ध विलक्षण होता है। उनकी यात्रा अंतर्मन से होती है। वे जीवनपर्यन्त अंर्तध्यान से जुड़े रहते हैं। बाहरी दिखावे या आडम्बरों, पाखण्डों का उनसे कोई वास्ता नहीं होता बल्कि पाखण्डों-आडम्बरों में घिरा रहने वाला कभी गुरु नहीं हो सकता।
गुरु का जीवन बड़ा सीधा-सादा होता है। उसकी पहचान भी वो ही कर सकता है जो उसका संग, सोहबत करने की इच्छा रखता है। गुरु की शरण में जाने से हृदय रूपी कमल खिल जाता है। इन्सान की आत्मिक शक्तियाँ जाग उठती हैं और वह अपने कल्याण का मार्ग खोज लेता है। आदिकाल से चली आ रही इसी गुरु परम्परा का अनूठा उदाहरण है डेरा सच्चा सौदा, जिसकी स्थापना पूजनीय शहनशाह सार्इं शाह मस्ताना जी महाराज ने की है।
शहनशाह मस्ताना जी महाराज ने दुनिया को ऐसा पवित्र धाम बना कर दिया, जिसके प्रताप से रूहों के भाग जाग रहे हैं। यह दरबार आस्था का सैलाब है। इस दर पे आने वाला हर कोई अलौकिक नज़ारों से निहाल हो रहा है। उनकी मुरादें, उनकी मन्नतें बिना मांगे ही पूरी हो रही हैं। उनको ऐसा दर मिला है, ऐसा महान सतगुरु मिला है, जो दुनिया में नहीं मिल सकता। यह दुनिया एक भीड़ है और इस भीड़ में सब भटके हुए, अटके हुए दिखाई पड़ते हैं।
किसी को किसी से कोई लेना-देना नहीं। सब अपनी-अपनी एक अंधी दौड़ में तमाम उलझनों की गिरफ्त में जा रहे हैं, लेकिन वो भाग्यशाली जीव हैं, जिन्हें सतगुरु मिल गए, डेरा सच्चा सौदा की राह मिल गई। वो भीड़ का हिस्सा बनने से बच गए। उन्हें पता है कि उनका गुरु महान है। वो जिंदगियाँ बख्श देता है। मुर्दों में जान डाल देता है। (भाव मौत जैसा कर्म काट देते हैं।) उनके ऐसे-ऐसे बिगड़े काम जो कोई नहीं कर सकता था, वो चुटकी में सतगुरु ने कर दिखाए।
इसी अंक में सतगुरु की महानता को दर्शाते दो करिश्में हैं, जो असंभव को संभव कर दिखाने वाले हैं। एक बच्ची, जिसे बिच्छु के काटने से वह मौत के मुँह में चली गई थी, लेकिन पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने अपने वचनों व प्रसाद के द्वारा ही उसको मरने से बचा लिया।
इसी प्रकार एक भयानक एक्सीडेंट में मृतप्राय हो चुके सेवादार को पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने दावे के साथ यह वचन फरमाते हुए कि ‘हमने कहा है ना, उसे कोई नहीं मार सकता।’ मौत से बचाकर जिंदगी बख्श दी। ये सतगुरु का ही प्रताप है।
दुनिया की कोई ताकत मृत शरीर में जान नहीं डाल सकती लेकिन यह प्रमाण सिद्ध करता है कि ऐसा करने में एक सतगुरु ही सक्षम होता है और सच्चा सौदा में करोड़ों लोग इस बात के गवाह हैं। हर कोई बलिहारे है गुरु आपनै!! -सम्पादक

































































