Experiences of Satsangis: मालिक खुद संवारते हैं सेवादारों के सब काज- सत्संगियों के अनुभव: पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अपार रहमत
प्रेमी रवि सेठी सुपुत्र श्री विजय सेठी, निवासी मकान नं 31, एडवोकेट कालोनी हिसार से अपने मुर्शिद प्यारे पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की रहमतों का वर्णन करते हुए बताते हैं:-
अप्रैल 2021 की बात है। कोविड महामारी का दौर चल रहा था। हर कोई महामारी के आतंक से भयभीत था। ऐसे में 25 अप्रैल को मेरी मम्मी को बुखार हो गया। उस समय मेरी बहन जो शाह सतनाम जी गर्ल्ज़ स्कूल बुदनी (मध्यप्रदेश) में सेवा करती थी, घर पर आई हुई थी और मैं दिल्ली में था। पापा और बहन ने साधारण बुखार समझकर मम्मी को दवाई दे दी, पर बुखार उतर नहीं रहा था। रात को बुखार पहले से भी ज्यादा हो गया। अगले दिन मेरी बहन ने सेवा पर वापिस जाना था, तो पापा ने उसे रोकने की बहुत कोशिश की लेकिन वो नहीं मानी कि सेवा करने से कर्म कटते हैं।
पापा ने बहुत कहा कि इस टाईम में मम्मी को तेरी जरूरत है, उन्हें कौन संभालेगा? ‘मैं सेवा करूँगी तो घर में पिताजी मम्मी की संभाल करेंगे।’ यह सोचकर वह अपनी सेवा पर चली गई। इस टाईम घर से बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं था, फिर भी वह पब्लिक ट्रांसपोर्ट से चली गई। मम्मी को दवाई से आराम नहीं आ रहा था। दो दिन के बाद मैं घर आया और आते ही मम्मी को गोयत हॉस्पिटल हिसार में लेकर गया। डॉक्टर ने दवाई दे दी और कोविड टैस्ट करवाने को कहा।
मम्मी की कोविड रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। रिपोर्ट देखकर हम सब घबरा गए। मम्मी दवाई ले रही थी पर हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती ही जा रही थी। पिताजी के वचनानुसार काढ़ा और नीम के पत्तों की भाप देनी शुरु कर दी लेकिन हालत में सुधार नहीं हो रहा था। मम्मी से कुछ भी नहीं खाया जा रहा था और वह आॅक्सीजन की कमी महसूस कर रही थी। मम्मी सारा दिन कुछ भी नहीं खाती थी।
इसी दौरान मेरी बहन को एक रात सपने में दिखा कि मम्मी चोला छोड़ गई है। हम सब सहम गए क्योंकि मम्मी की हालत गंभीर होती जा रही थी। हमने मम्मी को शाह सतनाम जी स्पैशलिटी हॉस्पिटल्ज़ सरसा में एडमिट करवाने का निर्णय कर लिया, लेकिन यहाँ पर जगह खाली नहीं थी। कहीं से आॅक्सीजन सिलेंडर भी नहीं मिल रहा था। अपने स्तर पर हम बहुत कोशिश कर रहे थे लेकिन कहीं से कोई उम्मीद की किरण नज़र नहीं आ रही थी। इस गंभीर बीमारी के चलते मम्मी से सुमिरन भी नहीं हो पा रहा था।
मेरी बहन लगातार सेवा के साथ-साथ सुमिरन कर रही थी। एक दिन वह अपनी सहेलियों के साथ स्कूल में रूहानियत की गेम खेल रही थी, जिसमें सभी लोगों के नाम की पर्ची डाली जाती है और फिर रूहानियत से रिलेटिड सवाल पूछे जाते हैं। गेम में एक सवाल पूछा कि पिताजी किसके घर की खुद पहरेदारी कर रहे हैं तो जवाब में मेरी बहन की पर्ची निकली। उसका विश्वास दृढ़ हो गया कि पिताजी अवश्य ही मम्मी की संभाल कर रहे हैं। उसने हममें से किसी को नहीं बताया, बस लगन से सेवा करती रही।
कुछ दिनों बाद मेरी मम्मी को सपने में दिखा कि एक भाई घर के मेन गेट पर पहरा दे रहा है। मम्मी ने उससे पूछा कि आप यहाँ क्या कर रहे है! उसने जवाब दिया कि मैं यहाँ पहरा दे रहा हूँ। मम्मी ने जब मुझे फोन पर अपने सपने के बारे में बताया तो बहन ने उन्हें बताया कि मम्मी हो-न-हो वह पिताजी ही थे, तुम ही बस उन्हें पहचान नहीं पाई। मम्मी जिन्हें कुछ पच नहीं रहा था व जो अब तक जीने की आस छोड़ चुकी थी, के दिल में ढांढस बंधा कि अब मुझे कुछ नहीं होगा।
दो दिन बाद ही सच्चे नम्र सेवादार सरसा दरबार से पावन वचनों का प्रशाद लेकर खुद हमारे घर पर आए और बताया कि ये प्रशाद पिताजी ने कोविड मरीजों के लिए भेजा है। मम्मी की हालत इतनी खराब हो गई थी कि उनसे प्रशाद भी नहीं खाया जा रहा था। एक दाना धक्के से खिलाया। हमने देखा कि शाम तक उनकी हालत में सुधार हुआ और फिर उन्होंने सारा प्रशाद खुद खा लिया। अगले दिन दूध और फ्रूट खाना शुरु कर दिया और उसके दो दिन बाद मम्मी ने खुद से कहा कि मुझे रोटी खानी है। ऐसे धीरे-धीरे मम्मी की हालत में सुधार होता गया। पिताजी ने मम्मी का मौत जैसा कर्म अपने प्रशाद के द्वारा ही काट दिया।
सच कहते हैं कि जो सेवा करते हैं उनके काम-काज व घर की संभाल सतगुरु स्वयं करते हैं। मेरी अपने सतगुरु के पवित्र चरणों में यही प्रार्थना है कि हमारा विश्वास आपजी के प्रति और दृढ़ हो और हमारा सारा परिवार तन-मन-धन से डेरा सच्चा सौदा और आप जी के पावन वचनों के अनुसार मानवता की सेवा में और भी बढ-चढ़कर अपना सहयोग करे। पिता जी, हमारा हर स्वास अपने लेखे लगवाकर अपने चरणों में ओड़ निभा देना जी।































































